Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा आज, चांदनी में खीर रखने और रात जागने की क्या है मान्यता?
25 Oct 2026, 07:49 PM

Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा आज, चांदनी में खीर रखने और रात जागने की क्या है मान्यता?

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Sharad Purnima 2026:</strong> आज रविवार 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जा रही है. कहीं चंद्रमा को अर्घ्य देकर खुले आकाश के नीचे खीर रखी जाएगी, तो कहीं मां लक्ष्मी की पूजा और रात्रि जागरण होगा. एक ही पूर्णिमा से जुड़ी ये परंपराएं देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग रूपों में दिखाई देती हैं. इस पर्व को शरद पूर्णिमा के साथ कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों रखते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">शरद पूर्णिमा की सबसे परिचित परंपरा रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें विशेष शुभता लेकर आती हैं. इसी विश्वास से दूध और चावल की खीर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">लोकपरंपरा में इसे ‘अमृत बरसने’ की रात भी कहते हैं. हालांकि, चांदनी में रखने से खीर औषधि बन जाती है या उसे खाने से बीमारियां दूर हो जाती हैं, ऐसे दावों को वैज्ञानिक तथ्य की तरह नहीं लिखना चाहिए. इस प्रथा का महत्व श्रद्धा और सांस्कृतिक परंपरा में है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मां लक्ष्मी की पूजा से क्या संबंध है?</h3>
<p style="text-align: justify;">आश्विन पूर्णिमा की रात लक्ष्मी आराधना का भी विशेष अवसर मानी जाती है. कोजागरी की प्रचलित कथा के अनुसार देवी इस रात विचरण करते हुए पूछती हैं, ‘को जागर्ति’, यानी ‘कौन जाग रहा है?’ विश्वास है कि जागकर आराधना करने वाले भक्तों को उनका आशीर्वाद मिलता है. इसी कारण कई परिवार पूजा के बाद रात्रि जागरण करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यहां समृद्धि की कामना केवल धन तक सीमित नहीं है. घर में अन्न, सुख और पारिवारिक शांति बनी रहे, यह भावना भी लक्ष्मी पूजा से जुड़ी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बंगाल में शंख और उल्लू ध्वनि की परंपरा</h3>
<p style="text-align: justify;">बंगाल के अनेक परिवारों में इसी पूर्णिमा पर कोजागरी लक्ष्मी पूजा होती है. घर में चावल के घोल से अल्पना और देवी के पदचिह्न बनाए जाते हैं. धान, फल और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं. इन रीतियों में बंगाल की कृषि संस्कृति की झलक दिखाई देती है.</p>
<p style="text-align: justify;">यहां एक विशेष लोकाचार घंटी और कांसर नहीं बजाने का भी है. इनके स्थान पर शंख और उल्लू ध्वनि से देवी का स्वागत किया जाता है. लेकिन यह क्षेत्रीय परंपरा है. इसे शरद पूर्णिमा पर देशभर में होने वाली पूजा का अनिवार्य नियम नहीं समझना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूजा में अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखें</h3>
<p style="text-align: justify;">शरद पूर्णिमा पर कहीं चंद्रपूजन और खीर का प्रसाद प्रमुख है, तो कहीं लक्ष्मी पूजा, पांचाली पाठ और जागरण. इसलिए किसी एक क्षेत्र की विधि को सभी श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बताना ठीक नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आज पूजा करते समय अपने परिवार में चली आ रही पद्धति का पालन करें. चंद्रमा को अर्घ्य देना हो, खीर का प्रसाद रखना हो या लक्ष्मी आराधना करनी हो, पर्व की अलग-अलग परंपराओं को उनके स्थानीय संदर्भ में समझना जरूरी है. घंटी बजाने या न बजाने जैसी किसी एक रीति के आधार पर पूजा को सही या गलत ठहराने से बचें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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