Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?
20 Oct 2026, 07:02 PM

Cancer Medicines Price Cut: 137 कैंसर दवाएं 70% तक सस्ती, जानिए जेब पर कितना पड़ेगा असर?

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Government Slashes Prices Of 137 Anti Cancer Drugs: </strong> कैंसर के इलाज का खर्च कम करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं की कीमतों में जल्द कमी आने वाली है. केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स मंत्रालय के मुताबिक, इन दवाओं को ट्रेड मार्जिन रेशनलाइजेशन (टीएमआर) के दायरे में लाया गया है. इसके बाद इन दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत यानी एमआरपी मौजूदा कीमत के मुकाबले 70% तक कम हो सकती है. नई दरें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी.</p>
<p style="text-align: justify;">इस फैसले का सीधा असर उन मरीजों और परिवारों पर पड़ सकता है, जो कैंसर के लंबे और महंगे इलाज का खर्च उठा रहे हैं. सरकार के मुताबिक, कीमतों में कमी अलग-अलग दवाओं की मौजूदा कीमत और उनके ट्रेड मार्जिन पर निर्भर करेगी. यानी सभी 137 दवाएं जरूरी नहीं कि 70% सस्ती हों, लेकिन जिन दवाओं में ट्रेड मार्जिन ज्यादा है, उनकी एमआरपी में बड़ी कमी देखने को मिल सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>137 कैंसर दवाओं की कीमतों में क्यों होगी कमी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मंत्रालय के मुताबिक, 137 गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं को टीएमआर के तहत लाया गया है. इन दवाओं के ट्रेड मार्जिन को एमआरपी के 30% तक सीमित किया जाएगा. इसका मकसद दवा की कीमत में डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल चैनल के स्तर पर जुड़ने वाले अतिरिक्त मार्जिन को नियंत्रित करना है. सरकार का कहना है कि इससे मरीजों को कम कीमत पर जरूरी दवाएं मिल सकेंगी, जबकि दवा कंपनियों के वैध राजस्व हितों को भी सुरक्षित रखा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/20/be688459c67d5b1394b445f5598c792317924859906751257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;">इन दवाओं में कई ऐसी दवाएं शामिल हैं जिनका इस्तेमाल अलग-अलग तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है. इनमें 20 से ज्यादा प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाली डेनोसुमैब, कैंसर मरीजों में न्यूट्रोपेनिया को रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाली पेगफिलग्रास्टिम और कोलन, ओवेरियन और सर्वाइकल कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेवाकिजुमैब भी इस सूची में शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब और ओसिमर्टिनिब भी सूची में</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मंत्रालय ने बताया कि पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब और ओसिमर्टिनिब जैसी व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली एंटी-कैंसर दवाओं की एमआरपी भी कम हो सकती है. इसके अलावा सूची में एबेमासिक्लिब, अबिराटेरोन एसीटेट, एकालाब्रूटिनिब, एलेक्टिनिब, एटेजोलिजुमैब, बेवाकिजुमैब, सेटक्सिमैब, डाराटुमुमैब, डेनोसुमैब, निवोलुमैब, ओलापैरिब, पाल्बोसिक्लिब, पर्टुजुमैब, पेमेट्रेक्सेड, रिबोसिक्लिब, सुनिटिनिब, वेनेटोक्लैक्स और कई अन्य दवाएं शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/20/e6735baa82d4e067f041c273217a7d0717924860191121257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मेडिकल बिल कितना कम हो सकता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अब सवाल यह है कि 70% तक कीमत घटने से मरीजों का मेडिकल बिल कितना कम होगा. सरकार की ओर से सभी दवाओं के लिए एक समान 70% कटौती की बात नहीं कही गई है. कीमत में कमी हर दवा की मौजूदा प्राइस टू स्टॉकिस्ट या प्राइस टू डिस्ट्रीब्यूटर और उसके ट्रेड मार्जिन के आधार पर तय होगी.</p>
<p style="text-align: justify;">मंत्रालय ने इसे समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया है. अगर किसी गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवा की मौजूदा एमआरपी 300 रुपये और पीटीएस/पीटीडी यानी स्टॉकिस्ट या डिस्ट्रीब्यूटर को मिलने वाली कीमत 70 रुपये है, तो नए फॉर्मूले के आधार पर अधिकतम संशोधित एमआरपी 100 रुपये प्लस लागू जीएसटी हो सकती है. यानी इस उदाहरण में एमआरपी 300 रुपये से घटकर 100 रुपये प्लस जीएसटी तक आ सकती है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>9 नवंबर से मरीजों को मिलेगी कम कीमत पर दवा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी. सरकार ने दवा कंपनियों को निर्देश दिया है कि गजट नोटिफिकेशन जारी होने के सात दिनों के भीतर एनपीपीए को संशोधित कीमतों की जानकारी देनी होगी. कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर नई कीमतों की सूची दिखाने के साथ-साथ रिटेलर्स और अस्पतालों तक भी इसकी जानकारी पहुंचानी होगी. रिटेलर्स और अस्पतालों को 9 नवंबर से कम की गई कीमत पर ही इन दवाओं की बिक्री करनी होगी. अस्पतालों को अपनी फार्मेसी के साथ वेबसाइट पर भी संशोधित कीमतों को प्रमुखता से दिखाने का निर्देश दिया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2019 में भी कम की गई थीं कैंसर की दवाओं की कीमतें</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कैंसर की दवाओं की कीमतों को कम करने की दिशा में यह पहला कदम नहीं है. सरकार ने 2019 में 42 एंटी-कैंसर दवाओं के लिए कीमतों पर नियंत्रण से जुड़ा कदम उठाया था. उस समय इन दवाओं की कीमतों में 90% तक की कमी की गई थी. अब 137 गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं को टीएमआर के दायरे में लाकर कीमतों को और नियंत्रित करने की कोशिश की गई है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>नई कीमत कैसे चेक करें?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मरीज और उनके परिवार नई कीमतों की जानकारी के लिए फॉर्मो सही दाम ऐप और एनपीपीए की वेबसाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकार के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म पर संशोधित कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. ऐसे में दवा खरीदने से पहले एमआरपी जरूर चेक करें और यह देखें कि 9 नवंबर 2026 से लागू संशोधित कीमत ही आपसे ली जा रही है.</p>
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Source Credit: abplive.com
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