17 Oct 2026, 08:23 PM
बेकाबू हुए AI एजेंट्स, भारतीय कंपनियों का कर रहे डेटा लीक; CERT-In ने दी चेतावनी
ABP News
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<p style="text-align: justify;">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज के वक्त में हर जगह इस्तेमाल हो रही है. बहुत सी बड़ी कंपनिया भी इसका सहारा ले रही है. कोडिंग से लेकर डेटा मैनेजमेंट तक हर जगह ऑटोनॉमस AI एजेंट्स को काम पर लगाया जा रहा है. लेकिन जिस तकनीक से हम अपना काम आसान कर रहे हैं वही अब मुश्किल बनती दिख रही है. भारत की साइबर सेफ्टी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम यानी CERT-In&nbsp; ने हाल ही में एक ऐसी चेतावनी जारी की है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">जिसने कॉर्पोरेट जगत की नींद उड़ा दी है. पता चला है कि टेस्टिंग और रिसर्च के दौरान कुछ AI एजेंट्स अपनी तय सीमा लांघकर सीधे भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम में घुस गए. इन्होंने बिना किसी इजाजत के वहां मौजूद सीक्रेट फाइलें और प्राइवेट रिकॉर्ड्स खंगाल डाले. सबसे डराने वाली बात यह रही कि जिन कंपनियों के सिस्टम में यह घुसपैठ हुई उन्हें खुद इसकी भनक तक नहीं लगी. बाद में खुद AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों ने सामने आकर यह खुलासा किया.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>अपनी हद पार कर गए AI मॉडल्स</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">CERT-In ने अपनी एडवाइजरी CIAD-2026-0049 में इस पूरे मामले की परतें खोली हैं. एजेंसी के मुताबिक कुछ AI एजेंट्स को सिर्फ रिसर्च और मूल्यांकन के काम में लगाया गया था लेकिन वे अपनी तय बाउंड्री पार कर गए. इन एजेंट्स ने भारतीय संस्थानों के आईटी और कम्युनिकेशन नेटवर्क यानी ICT इंफ्रास्ट्रक्चर में घुसकर ऐसे बिजनेस रिकॉर्ड्स निकाल लिए, जिनमें लोगों की निजी जानकारी और बेहद संवेदनशील डेटा मौजूद था. सवाल उठता है कि आखिर इन एजेंट्स को अंदर घुसने का रास्ता मिला कैसे?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, इसके पीछे कंपनियों की अपनी तकनीकी लापरवाही भी जिम्मेदार रही. सोर्स कोड, रिपॉजिटरी, CI/CD वेरिएबल्स, कॉन्फिगरेशन फाइल्स, क्लाइंट ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज में कई जगह पासवर्ड और लॉगिन क्रेडेंशियल्स खुले पड़े थे. AI एजेंट्स ने इन्हीं कमजोर कड़ियों को पकड़ा और सीधे लाइव सिस्टम का दरवाजा खोल लिया. हालांकि सरकार ने प्रभावित कंपनियों के नाम उजागर नहीं किए हैं. लेकिन इस घटना ने कंपनियों के साइबर सिक्योरिटी को हिला कर रख दिया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/e98f6ad181ebc194beea19c9131280431792217576995907_original.jpg" /></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>हैकरों का नया हथियार बने ओपन-सोर्स टूल्स</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">खतरा सिर्फ टेस्टिंग वाले AI मॉडल्स के भटकने तक का ही नहीं है. बल्कि Cyber अपराधी अब इस तकनीक को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं. CERT-In की जांच में सामने आया है कि हैकर्स का एक नेटवर्क आर्थिक फायदे के लिए भारतीय संस्थानों को निशाना बना रहा है. इसके लिए साइबर ठग इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाले ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स और ऑफेंसिव-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क्स का धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों के IT सिस्टम पर भी इसी तरह के हमले हो रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि AI की एंट्री से साइबर हमलों की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है. पहले किसी कंपनी के नेटवर्क में सेंध लगाने और नुकसान पहुंचाने में हैकर्स को कई दिन लग जाते थे, लेकिन AI की मदद से यही काम अब महज कुछ घंटों में पूरा हो रहा है. यानी जब तक सिक्योरिटी टीम संभलती है, तब तक खेल खत्म हो चुका होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/b980f2b0e6f5a35ad8fabe9c34cf4d5d1792217644027907_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/technology/american-company-to-sell-incense-at-night-with-the-help-of-indian-company-skyroot-3203066">भारतीय कंपनी &lsquo;स्काईरूट&rsquo; की मदद से रात में &lsquo;धूप&rsquo; बेचेगी अमेरिकी कंपनी</a><br /></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>बचाव के लिए तुरंत उठाएं यह कदम</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">सरकारी एजेंसी ने आगाह किया है कि जो कंपनियां इस खतरे को हल्के में लेंगी और समय रहते अपनी खामियां दूर नहीं करेंगी. उन पर कुछ ही दिनों के भीतर दोबारा हमलों भी किया जा सकता है. हमला होने के बाद हैकर्स को नेटवर्क के और भी अंदर के हिस्सों तक पहुंचने का मौका मिल जाता है जिससे और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है. इस खतरे से बचने के लिए&nbsp;CERT-In ने कंपनियों को तुरंत अपनी सेफ्टी और मजबूस करने की सलाह दी है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे पहला काम यह है कि किसी भी AI एजेंट को सिस्टम का खुला एक्सेस बिल्कुल भी न दें और उसके काम की एक टाइम लिमिट तय करें. इसके अलावा अपने सभी Password और Credentials को सेफ रखें Coding Files फाइलों में उन्हें खुला न छोड़ें और Cloud Storage की परमिशन्स को रेगुलर तौर पर रिव्यू करते रहे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/israel-company-spying-through-online-advertisements-research-revealed-3203002">ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा</a><br /></strong></p>
<p style="text-align: justify;">जिसने कॉर्पोरेट जगत की नींद उड़ा दी है. पता चला है कि टेस्टिंग और रिसर्च के दौरान कुछ AI एजेंट्स अपनी तय सीमा लांघकर सीधे भारतीय कंपनियों के लाइव सिस्टम में घुस गए. इन्होंने बिना किसी इजाजत के वहां मौजूद सीक्रेट फाइलें और प्राइवेट रिकॉर्ड्स खंगाल डाले. सबसे डराने वाली बात यह रही कि जिन कंपनियों के सिस्टम में यह घुसपैठ हुई उन्हें खुद इसकी भनक तक नहीं लगी. बाद में खुद AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों ने सामने आकर यह खुलासा किया.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>अपनी हद पार कर गए AI मॉडल्स</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">CERT-In ने अपनी एडवाइजरी CIAD-2026-0049 में इस पूरे मामले की परतें खोली हैं. एजेंसी के मुताबिक कुछ AI एजेंट्स को सिर्फ रिसर्च और मूल्यांकन के काम में लगाया गया था लेकिन वे अपनी तय बाउंड्री पार कर गए. इन एजेंट्स ने भारतीय संस्थानों के आईटी और कम्युनिकेशन नेटवर्क यानी ICT इंफ्रास्ट्रक्चर में घुसकर ऐसे बिजनेस रिकॉर्ड्स निकाल लिए, जिनमें लोगों की निजी जानकारी और बेहद संवेदनशील डेटा मौजूद था. सवाल उठता है कि आखिर इन एजेंट्स को अंदर घुसने का रास्ता मिला कैसे?&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, इसके पीछे कंपनियों की अपनी तकनीकी लापरवाही भी जिम्मेदार रही. सोर्स कोड, रिपॉजिटरी, CI/CD वेरिएबल्स, कॉन्फिगरेशन फाइल्स, क्लाइंट ऐप्स और क्लाउड स्टोरेज में कई जगह पासवर्ड और लॉगिन क्रेडेंशियल्स खुले पड़े थे. AI एजेंट्स ने इन्हीं कमजोर कड़ियों को पकड़ा और सीधे लाइव सिस्टम का दरवाजा खोल लिया. हालांकि सरकार ने प्रभावित कंपनियों के नाम उजागर नहीं किए हैं. लेकिन इस घटना ने कंपनियों के साइबर सिक्योरिटी को हिला कर रख दिया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/e98f6ad181ebc194beea19c9131280431792217576995907_original.jpg" /></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>हैकरों का नया हथियार बने ओपन-सोर्स टूल्स</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">खतरा सिर्फ टेस्टिंग वाले AI मॉडल्स के भटकने तक का ही नहीं है. बल्कि Cyber अपराधी अब इस तकनीक को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं. CERT-In की जांच में सामने आया है कि हैकर्स का एक नेटवर्क आर्थिक फायदे के लिए भारतीय संस्थानों को निशाना बना रहा है. इसके लिए साइबर ठग इंटरनेट पर आसानी से मिलने वाले ओपन-सोर्स एजेंटिक AI टूल्स और ऑफेंसिव-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क्स का धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों के IT सिस्टम पर भी इसी तरह के हमले हो रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि AI की एंट्री से साइबर हमलों की रफ्तार कई गुना बढ़ गई है. पहले किसी कंपनी के नेटवर्क में सेंध लगाने और नुकसान पहुंचाने में हैकर्स को कई दिन लग जाते थे, लेकिन AI की मदद से यही काम अब महज कुछ घंटों में पूरा हो रहा है. यानी जब तक सिक्योरिटी टीम संभलती है, तब तक खेल खत्म हो चुका होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/b980f2b0e6f5a35ad8fabe9c34cf4d5d1792217644027907_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/technology/american-company-to-sell-incense-at-night-with-the-help-of-indian-company-skyroot-3203066">भारतीय कंपनी &lsquo;स्काईरूट&rsquo; की मदद से रात में &lsquo;धूप&rsquo; बेचेगी अमेरिकी कंपनी</a><br /></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>बचाव के लिए तुरंत उठाएं यह कदम</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">सरकारी एजेंसी ने आगाह किया है कि जो कंपनियां इस खतरे को हल्के में लेंगी और समय रहते अपनी खामियां दूर नहीं करेंगी. उन पर कुछ ही दिनों के भीतर दोबारा हमलों भी किया जा सकता है. हमला होने के बाद हैकर्स को नेटवर्क के और भी अंदर के हिस्सों तक पहुंचने का मौका मिल जाता है जिससे और भी ज्यादा नुकसान हो सकता है. इस खतरे से बचने के लिए&nbsp;CERT-In ने कंपनियों को तुरंत अपनी सेफ्टी और मजबूस करने की सलाह दी है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे पहला काम यह है कि किसी भी AI एजेंट को सिस्टम का खुला एक्सेस बिल्कुल भी न दें और उसके काम की एक टाइम लिमिट तय करें. इसके अलावा अपने सभी Password और Credentials को सेफ रखें Coding Files फाइलों में उन्हें खुला न छोड़ें और Cloud Storage की परमिशन्स को रेगुलर तौर पर रिव्यू करते रहे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/israel-company-spying-through-online-advertisements-research-revealed-3203002">ऑनलाइन विज्ञापनों से कैसे जासूसी कर रहा था इजरायल? रिसर्च में खुलासा</a><br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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