02 Nov 2026, 11:02 AM
Heart Tests: 40 के बाद जरूर कराएं ये 3 हार्ट टेस्ट, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने दी सलाह
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Heart Tests After 40:</strong> आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खानपान, मानसिक तनाव और बढ़ता मोटापा लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है. यही वजह है कि आज के समय में कम उम्र के लोग भी दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों और हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं. कई बार ब्लड प्रेशर या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल शरीर में बिना किसी बड़े लक्षण के चुपचाप पनपता रहता है, जिसका पता लोगों को तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र पार करता है, उसके लिए अपने शरीर और दिल की सेहत पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है. एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि 40 के बाद हर व्यक्ति को नियमित अंतराल पर 3 मुख्य टेस्ट जरूर कराने चाहिए ताकि किसी भी तरह के खतरे को समय रहते पहचाना जा सके.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ब्लड प्रेशर की नियमित जांच है सबसे जरूरी</h3>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. कई बार बीपी बढ़ने पर शरीर में कोई बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है. 40 की उम्र पार कर चुके लोगों को साल में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">जिन लोगों की जीवनशैली ज्यादा तनावपूर्ण है या जिन्हें पहले से सेहत से जुड़ी कोई अन्य समस्या है, वे डॉक्टर की सलाह पर हर तीन महीने में भी बीपी की जांच करा सकते हैं. समय पर बीपी की निगरानी करने से दिल पर बढ़ने वाले अचानक दबाव को रोका जा सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से जानें कोलेस्ट्रॉल का स्तर</h3>
<p style="text-align: justify;">दूसरा सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट लिपिड प्रोफाइल है, जो हमारे खून में मौजूद फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को मापता है. इस टेस्ट के जरिए टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल, एचडीएल, औऱ ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता लगाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने विशेष रूप से आगाह किया है कि शरीर में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिेए, क्योंकि यह धीरे-धीरे दिल की धमनियों में जमा होने लगता है और ब्लॉकेज का कारण बनता है. हर व्यक्ति के शरीर और रिस्क फेक्टर के हिसाब से कोलेस्ट्रॉल का सुरक्षित स्तर अलग हो सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ब्लड शुगर से डायबिटीज पर रखें नजर&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">तीसरा अनिवार्य टेस्ट ब्लड शुगर की जांच है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायबिटीज का सीधा संबंध दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे से होता है. नियमित रूप से शुगर की जांच कराने से यह पता चल जाता है कि व्यक्ति को डायबिटीज है या वह प्रीडायबिटीज की श्रेणी में है.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रीडायबिटीज वह स्थिति है जहां शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है लेकिन वह पूरी तरह डायबिटीज में नहीं बदला होता. अगर इस स्थिति का शुरुआती चरणों में ही पता चल जाए, तो खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित करके इसे टाइप-2 डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/treat-chickenpox-scars-on-face-3209272"><strong>Chickenpox Scars Care Tips: चिकन पॉक्स के दाग चेहरे से कैसे हटाएं, ये रहे घरेलू तरीके</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">फैमिली हिस्ट्री और खराब लाइफस्टाइल को न करें नजरअंदाज</h3>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने जोर देकर कहा है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से ही माता-पिता या किसी करीबी को दिल की बीमारी रही है, उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत है. अनुवांशिक कारणों के साथ-साथ तंबाकू या धूम्रपान का सेवन, नींद की कमी, शराब और असंतुलित आहार दिल की सेहत को तेजी से बिगाड़ते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल स्क्रीनिंग कराने से बीमारी से बचने की कोई पूर्ण गारंटी तो नहीं मिलती, लेकिन इससे शरीर में छिपे रिस्क फैक्टर्स का समय पर पता चल जाता है, जिससे गंभीर स्थिति पैदा होने से पहले ही बचाव के कदम उठाए जा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/world-vegan-day-what-is-vegan-diet-food-list-benefits-difference-between-vegetarian-plant-based-3209127"><strong>World Vegan Day: वीगन डाइट क्या है और इसमें क्या खाया जाता है? जानें फायदे</strong></a></p>
<p style="text-align: justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र पार करता है, उसके लिए अपने शरीर और दिल की सेहत पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है. एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि 40 के बाद हर व्यक्ति को नियमित अंतराल पर 3 मुख्य टेस्ट जरूर कराने चाहिए ताकि किसी भी तरह के खतरे को समय रहते पहचाना जा सके.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ब्लड प्रेशर की नियमित जांच है सबसे जरूरी</h3>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है. कई बार बीपी बढ़ने पर शरीर में कोई बाहरी लक्षण दिखाई नहीं देता, इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है. 40 की उम्र पार कर चुके लोगों को साल में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर जरूर चेक कराना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">जिन लोगों की जीवनशैली ज्यादा तनावपूर्ण है या जिन्हें पहले से सेहत से जुड़ी कोई अन्य समस्या है, वे डॉक्टर की सलाह पर हर तीन महीने में भी बीपी की जांच करा सकते हैं. समय पर बीपी की निगरानी करने से दिल पर बढ़ने वाले अचानक दबाव को रोका जा सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">लिपिड प्रोफाइल टेस्ट से जानें कोलेस्ट्रॉल का स्तर</h3>
<p style="text-align: justify;">दूसरा सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट लिपिड प्रोफाइल है, जो हमारे खून में मौजूद फैट और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को मापता है. इस टेस्ट के जरिए टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल, एचडीएल, औऱ ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर का पता लगाया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने विशेष रूप से आगाह किया है कि शरीर में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिेए, क्योंकि यह धीरे-धीरे दिल की धमनियों में जमा होने लगता है और ब्लॉकेज का कारण बनता है. हर व्यक्ति के शरीर और रिस्क फेक्टर के हिसाब से कोलेस्ट्रॉल का सुरक्षित स्तर अलग हो सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ब्लड शुगर से डायबिटीज पर रखें नजर&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">तीसरा अनिवार्य टेस्ट ब्लड शुगर की जांच है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायबिटीज का सीधा संबंध दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे से होता है. नियमित रूप से शुगर की जांच कराने से यह पता चल जाता है कि व्यक्ति को डायबिटीज है या वह प्रीडायबिटीज की श्रेणी में है.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रीडायबिटीज वह स्थिति है जहां शुगर का स्तर सामान्य से अधिक होता है लेकिन वह पूरी तरह डायबिटीज में नहीं बदला होता. अगर इस स्थिति का शुरुआती चरणों में ही पता चल जाए, तो खानपान में सुधार, नियमित व्यायाम और वजन को नियंत्रित करके इसे टाइप-2 डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/treat-chickenpox-scars-on-face-3209272"><strong>Chickenpox Scars Care Tips: चिकन पॉक्स के दाग चेहरे से कैसे हटाएं, ये रहे घरेलू तरीके</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">फैमिली हिस्ट्री और खराब लाइफस्टाइल को न करें नजरअंदाज</h3>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने जोर देकर कहा है कि जिन लोगों के परिवार में पहले से ही माता-पिता या किसी करीबी को दिल की बीमारी रही है, उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत है. अनुवांशिक कारणों के साथ-साथ तंबाकू या धूम्रपान का सेवन, नींद की कमी, शराब और असंतुलित आहार दिल की सेहत को तेजी से बिगाड़ते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">डॉक्टरों का मानना है कि मेडिकल स्क्रीनिंग कराने से बीमारी से बचने की कोई पूर्ण गारंटी तो नहीं मिलती, लेकिन इससे शरीर में छिपे रिस्क फैक्टर्स का समय पर पता चल जाता है, जिससे गंभीर स्थिति पैदा होने से पहले ही बचाव के कदम उठाए जा सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/world-vegan-day-what-is-vegan-diet-food-list-benefits-difference-between-vegetarian-plant-based-3209127"><strong>World Vegan Day: वीगन डाइट क्या है और इसमें क्या खाया जाता है? जानें फायदे</strong></a></p>
Source Credit: abplive.com
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