Uttar Pradesh
25 Oct 2026, 01:43 PM
UP चुनाव में NDA के सहयोगियों की दावेदारी तेज, ज्यादा सीटों पर रहेगी नजर
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव 2027 का समय करीब आ रहा है, वैसे पार्टियों में अपने दम दिखाने की होड़ लग गई है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में सीटों के बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों की दावेदारी भी तेज होने लगी है. अपना दल (एस), निषाद पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अपनी राजनीतिक ताकत के हिसाब से ज्यादा सीटें हासिल करना चाहते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ अपना दल (एस) और निषाद पार्टी थीं. वहीं, रालोद और सुभासपा समाजवादी पार्टी के गठबंधन में शामिल थे. अब ये दोनों दल एनडीए में शामिल हो गए है. ऐसे में आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे का गणित पहले के मुकाबले ज्यादा जटिल हो सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अपना दल की 30-35 सीटों पर नजर</h3>
<p style="text-align: justify;">अपना दल (एस) ने 2022 में बीजेपी गठबंधन के तहत 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें 12 पर जीत मिली थी. इस बार पार्टी अपना दायरा बढ़ाने में लगी है. इसको लेकर सार्वजनिक तौर पर अनुप्रिया पटेल भी कई बार कह चुकी है कि इस चुनाव में पार्टी का दायरा बढ़ेगा. पार्टी की नजर 30 से 35 सीटों पर बताई जा रही है. अपनी मजबूत स्थिति दिखाने के लिए अनुप्रिया पटेल ने <a title="लखनऊ" href="https://www.abplive.com/topic/lucknow" data-type="interlinkingkeywords">लखनऊ</a>, सोनभद्र, मऊ और घाटमपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन करके पार्टी की ताकत को दिखाया है. वही, 2 नवंबर को पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन भी होगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #e03e2d;"><a style="color: #e03e2d;" href="https://www.abplive.com/states/up-uk/congress-demands-200-seats-in-uttar-pradesh-rahul-gandhi-posters-trigger-political-buzz-3206486">'200 सीट हक है हमारा', कांग्रेस के पोस्टर बढ़ा न दें अखिलेश की टेंशन?</a></span></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;">आरक्षण के मुद्दे से निषाद पार्टी की दावेदारी</h3>
<p style="text-align: justify;">निषाद पार्टी ने 2022 में 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें 10 सीटों पर पार्टी के अपने चुनाव चिह्न और छह पर बीजेपी के चिह्न से उम्मीदवार उतारे गए थे. अब पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद निषाद समाज के आरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं. इसे आगामी चुनाव में ज्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं. 21 अक्टूबर को दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित &lsquo;दिल्ली चलो&rsquo; सम्मेलन में उन्होंने बीजेपी से इस मुद्दे पर जल्द फैसला लेने को कहा है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पश्चिमी यूपी में RLD का विस्तार</h3>
<p style="text-align: justify;">RLD भी गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है. 2022 में सपा गठबंधन के तहत पार्टी को 33 सीटें मिली थीं, जिनमें आठ पर जीत दर्ज की थी. इस बार रालोद की नजर पश्चिमी यूपी के साथ आगरा, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जैसे क्षेत्रों में भी सीटें हासिल करने पर है. पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी की ओर से आगरा के किरावली में आयोजित बड़ी रैली को भी पश्चिमी यूपी से आगे संगठन का विस्तार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;">सुभासपा भी पूर्वांचल में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहती है. पार्टी की कोशिश ज्यादा सीटों के जरिए क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की है. ऐसे में बीजेपी को चुनाव से पहले सहयोगियों की मांगों, क्षेत्रीय समीकरणों और जीत की संभावनाओं के बीच संतुलन बनाना होगा. सीटों का बंटवारा एनडीए की एकजुटता और चुनावी रणनीति की अहम परीक्षा बन सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ अपना दल (एस) और निषाद पार्टी थीं. वहीं, रालोद और सुभासपा समाजवादी पार्टी के गठबंधन में शामिल थे. अब ये दोनों दल एनडीए में शामिल हो गए है. ऐसे में आगामी चुनाव में सीटों के बंटवारे का गणित पहले के मुकाबले ज्यादा जटिल हो सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अपना दल की 30-35 सीटों पर नजर</h3>
<p style="text-align: justify;">अपना दल (एस) ने 2022 में बीजेपी गठबंधन के तहत 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें 12 पर जीत मिली थी. इस बार पार्टी अपना दायरा बढ़ाने में लगी है. इसको लेकर सार्वजनिक तौर पर अनुप्रिया पटेल भी कई बार कह चुकी है कि इस चुनाव में पार्टी का दायरा बढ़ेगा. पार्टी की नजर 30 से 35 सीटों पर बताई जा रही है. अपनी मजबूत स्थिति दिखाने के लिए अनुप्रिया पटेल ने <a title="लखनऊ" href="https://www.abplive.com/topic/lucknow" data-type="interlinkingkeywords">लखनऊ</a>, सोनभद्र, मऊ और घाटमपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन करके पार्टी की ताकत को दिखाया है. वही, 2 नवंबर को पार्टी का राष्ट्रीय सम्मेलन भी होगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #e03e2d;"><a style="color: #e03e2d;" href="https://www.abplive.com/states/up-uk/congress-demands-200-seats-in-uttar-pradesh-rahul-gandhi-posters-trigger-political-buzz-3206486">'200 सीट हक है हमारा', कांग्रेस के पोस्टर बढ़ा न दें अखिलेश की टेंशन?</a></span></strong></p>
<h3 style="text-align: justify;">आरक्षण के मुद्दे से निषाद पार्टी की दावेदारी</h3>
<p style="text-align: justify;">निषाद पार्टी ने 2022 में 16 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें 10 सीटों पर पार्टी के अपने चुनाव चिह्न और छह पर बीजेपी के चिह्न से उम्मीदवार उतारे गए थे. अब पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद निषाद समाज के आरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं. इसे आगामी चुनाव में ज्यादा सीटें हासिल करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है. निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद निषाद समाज को अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं. 21 अक्टूबर को दिल्ली के टॉकाटोरा स्टेडियम में आयोजित &lsquo;दिल्ली चलो&rsquo; सम्मेलन में उन्होंने बीजेपी से इस मुद्दे पर जल्द फैसला लेने को कहा है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पश्चिमी यूपी में RLD का विस्तार</h3>
<p style="text-align: justify;">RLD भी गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है. 2022 में सपा गठबंधन के तहत पार्टी को 33 सीटें मिली थीं, जिनमें आठ पर जीत दर्ज की थी. इस बार रालोद की नजर पश्चिमी यूपी के साथ आगरा, अलीगढ़, मथुरा और हाथरस जैसे क्षेत्रों में भी सीटें हासिल करने पर है. पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी की ओर से आगरा के किरावली में आयोजित बड़ी रैली को भी पश्चिमी यूपी से आगे संगठन का विस्तार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;">सुभासपा भी पूर्वांचल में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहती है. पार्टी की कोशिश ज्यादा सीटों के जरिए क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की है. ऐसे में बीजेपी को चुनाव से पहले सहयोगियों की मांगों, क्षेत्रीय समीकरणों और जीत की संभावनाओं के बीच संतुलन बनाना होगा. सीटों का बंटवारा एनडीए की एकजुटता और चुनावी रणनीति की अहम परीक्षा बन सकता है.</p>
Source Credit: abplive.com
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