भारत में आया स्टारलिंक तो कैसे होगा सुरक्षा को खतरा? यूक्रेन से समझिए
22 Oct 2026, 04:13 PM

भारत में आया स्टारलिंक तो कैसे होगा सुरक्षा को खतरा? यूक्रेन से समझिए

ABP News
@abpnews
<p>हाल ही में Elon Musk ने भारत में अपने Starlink इंटरनेट को मंजूरी न मिलने की भड़ास निकालते हुए देश के टॉप बिजनेसमैन मुकेश अंबानी और पीएम मोदी को लेकर तंज भरे ट्वीट्स किए थे. मस्क को कहना था कि उनके सैटेलाइट इंटरनेट को जानबूझकर रोका जा रहा है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? तो आपको बता दें नहीं, इसके पीछे कई वजहें हैं जिनमें एक मुद्द देश की सुरक्षा की भी है. हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने Starlink को लेकर बड़ा खुलासा किया है. </p>
<p>जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति <a title="डोनाल्ड ट्रंप" href="https://www.abplive.com/topic/donald-trump" data-type="interlinkingkeywords">डोनाल्ड ट्रंप</a> के साथ हुई अनबन के बाद, यूक्रेन को सबक सिखाने के लिए वहां Starlink की इंटरनेट स्पीड जानबूझकर स्लो कर दी गई. उनका कहना है कि अमेरिकी सरकार के इशारे पर SpaceX ने यह कदम उठाया. हालांकि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताकर खारिज कर दिया है. लेकिन इस बवाल ने साफ कर दिया है कि किसी विदेशी प्राइवेट कंपनी के भरोसे देश की सुरक्षा छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है.</p>
<h3><strong>जंग में अचानक इंटरनेट स्लो होने से यूक्रेन को नुकसान</strong></h3>
<p>आज के दौर में कोई भी लड़ाई सिर्फ तोप और बंदूकों के दम पर नहीं लड़ी जाती. बल्कि तेज कम्युनिकेशन और डेटा के भरोसे जीती जाती है. जब जंग के दौरान जमीन पर लगे मोबाइल टावर और केबल नेटवर्क तबाह हो जाते हैं. तब Starlink जैसा सैटेलाइट इंटरनेट ही सेना के लिए सबसे बड़ा सहारा बनता है. यूक्रेन की फौज अपने सैनिकों से बात करने, दुश्मन पर नजर रखने और जानकारी शेयर करने के लिए पूरी तरह से इसी नेटवर्क पर टिकी हुई है. </p>
<p>लेकिन जेलेंस्की के मुताबिक जब अचानक Starlink टर्मिनल्स की स्पीड घटाई गई तो फ्रंटलाइन पर लड़ रहे जवानों के हाथ बंध गए. वहां ड्रोन उड़ाने और हवाई हमलों से बचने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को चलाने में भारी दिक्कतें आने लगीं. इससे समझ आता है कि अगर किसी देश की सेना एक ऐसी प्राइवेट कंपनी के नेटवर्क पर निर्भर हो जाए जिसका स्विच किसी दूसरे देश के हाथ में है. तो ऐन वक्त पर कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/22/c1c257dc3614972885f86ca6c2ec3dc31792650469457907_original.jpg" /></p>
<h3><strong>भारत क्यों नहीं दे रहा स्टारलिंक को मंजूरी?</strong></h3>
<p>यूक्रेन के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसे देखकर समझ आता है कि भारत सरकार Starlink को लेकर इतना सख्त और सतर्क रुख क्यों अपना रही है. यह सच है कि सैटेलाइट इंटरनेट की मदद से देश के उन दूर-दराज और पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से नेटवर्क पहुंचाया जा सकता है, जहां आज तक केबल बिछाना मुमकिन नहीं हो पाया है. लेकिन भारत के लिए इस सुविधा से कहीं ज्यादा जरूरी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आजादी है. </p>
<p>खासतौर पर हमारे बॉर्डर वाले संवेदनशील इलाकों में कम्युनिकेशन सिस्टम ऐसा होना चाहिए, जिस पर सौ फीसदी भरोसा किया जा सके. भारत किसी भी विदेशी टेक्नोलॉजी को अपने यहां लाने से पहले यह पक्का करना चाहता है कि डेटा और नेटवर्क का पूरा कंट्रोल किसके पास रहेगा. सरकार यह जोखिम बिल्कुल नहीं उठाना चाहती कि कल को किसी ग्लोबल टेंशन या राजनीतिक दबाव की वजह से देश के जरूरी इलाकों में अचानक संचार व्यवस्था ठप कर दी जाए और हम बस देखते रह जाएं.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/22/771f9d279cd605916fd69974143c0f191792650820615907_original.jpg" /></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/trai-is-introducing-a-new-system-to-curb-otp-fraud-3204983">OTP फ्रॉड पर लगेगा ताला, नया सिस्टम ला रहा है TRAI</a><br /></strong></p>
<h3><strong>विदेशी कंपनियों के हाथ में कंट्रोल होना देश के लिए रिस्क</strong></h3>
<p>तकनीकी तौर पर देखें तो जो कंपनी Satellite Internet और नेटवर्क चलाती है. उसके पास ही उसे कंट्रोल करने की पूरी ताकत होती है. वह कंपनी जब चाहे अपने हिसाब से या फिर अपने देश की सरकार के एक इशारे पर किसी भी इलाके में Internet की स्पीड घटा सकती है और सर्विस पूरी तरह से बंद कर सकती है. जब किसी देश का सीधा नियंत्रण उस टेक्नोलॉजी पर नहीं होता. तो उस पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है.</p>
<p>आज यह खतरा सिर्फ Starlink जैसे Satellite Internet तक ही सीमित नहीं है. बल्कि विदेशी क्लाउड सर्विस, बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बाकी टेक्निकल सिस्टम के साथ भी यही दिक्कत जुड़ी हुई है. अगर युद्ध या किसी बड़े संकट के समय कोई विदेशी कंपनी अपने नियम बदल दे, तो देश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है.</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/phone-charging-tips-90-percent-of-people-make-these-mistakes-while-charging-their-phones-3205034">फोन चार्ज करते वक्त 90 फीसदी लोग करते हैं ये गलतियां, आप न करें</a><br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
Read Full Story
3

Comments (0)

Login to join the conversation