04 Nov 2026, 07:08 PM
Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा से कैसे कटेंगे सारे दोष?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Somvati Amavasya 2026: </strong>सोमवती अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा और पितरों के निमित्त तर्पण करने से त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की कृपा, अखंड सौभाग्य और पितृदोष से मुक्ति मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;">साल 2026 की अंतिम सोमवती अमावस्या 9 नवंबर 2026, सोमवार को उदया तिथि में मनाई जाएगी. स्कंद पुराण और श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार पीपल में साक्षात श्रीहरि और पितरों का वास माना गया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार का सबसे अनूठा पहलू यह है कि 8 नवंबर को प्रदोष काल में दीपावली लक्ष्मी पूजन संपन्न होने के ठीक अगली सुबह यह दुर्लभ सोमवती अमावस्या पड़ रही है यानी माता लक्ष्मी के आह्वान के तुरंत बाद पितृ आशीर्वाद और सौभाग्य सिद्धि का महासंयोग बन रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/HT0bHTAjhV8" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक बनने वाले इस विशेष काल में पीपल की 108 परिक्रमा और पितृ तर्पण की सही विधि क्या है, आइए समझते हैं कि शास्त्रों में इसे इतना फलदायी क्यों बताया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोमवती अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है. साल 2026 में कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन प्रभावी रह रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व दोगुना हो गया है.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या प्रारंभ-</strong> 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे</li>
<li><strong>लक्ष्मी पूजन (प्रदोष काल)-</strong> 8 नवंबर 2026 (रविवार शाम)</li>
<li><strong>अमावस्या समाप्त-</strong> 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे</li>
<li><strong>मुख्य पर्व (उदया तिथि)-</strong> 9 नवंबर 2026 (सोमवार)</li>
<li><strong>पूजा व परिक्रमा मुहूर्त-</strong> सुबह 06:41 से दोपहर 12:31 बजे तक</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीपल की पूजा क्यों मानी जाती है इतनी खास?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>त्रिदेवों का साक्षात वास:</strong> पीपल की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और ऊपरी भाग में शिव जी वास करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप:</strong> गीता में श्रीकृष्ण ने पीपल को स्वयं का स्वरूप बताया है, इसलिए यह वृक्ष परम पवित्र है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अखंड सौभाग्य की प्राप्ति:</strong> सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>108 परिक्रमा और कलावा:</strong> पेड़ पर कलावा लपेटकर 108 परिक्रमा करने से सोना धोबिन की तरह सौभाग्य और संकटों से मुक्ति मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पितरों से पीपल का गहरा संबंध: कैसे पाएं पितृदोष से राहत?</strong></p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या पर पितरों का वास:</strong> अमावस्या के स्वामी पितृ देव होते हैं और इस दिन वे सूक्ष्म रूप से पीपल पर निवास करते हैं.</li>
<li><strong>जल और तिल से तृप्ति:</strong> पीपल में दूध, जल और काले तिल अर्पित करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और तृप्ति मिलती है.</li>
<li><strong>पितृदोष से मुक्ति:</strong> इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्नदान करने से कुंडली का पितृदोष शांत होता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोमवती अमावस्या पर पूजा और परिक्रमा की सही विधि:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर की सुबह स्नान-ध्यान के बाद इस क्रम से पूजा संपन्न करें:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>1. सूर्योदय से पूर्व स्नान:</strong> संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अथवा घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2. पीपल को जल अर्पण:</strong> पीपल के वृक्ष के पास जाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल, कच्चा दूध और काले तिल मिश्रित अर्घ्य चढ़ाएं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>3. परिक्रमा का संकल्प:</strong> हाथ में अक्षत, पुष्प और फल लेकर 108 परिक्रमा का संकल्प लें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>4. कच्चा सूत लपेटना:</strong> प्रत्येक परिक्रमा के साथ पीपल के तने पर मौली या कच्चा सूत लपेटें. यदि 108 परिक्रमा संभव न हो, तो कम से कम 7 या 21 परिक्रमा अवश्य करें और बाकी संख्या के लिए मखाने, मूंगफली या फल अर्पित करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>5. दान-पुण्य:</strong> पूजा समाप्ति के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को काले तिल, कंबल, <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a>ी फल या भोजन दान करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
<p style="text-align: justify;">साल 2026 की अंतिम सोमवती अमावस्या 9 नवंबर 2026, सोमवार को उदया तिथि में मनाई जाएगी. स्कंद पुराण और श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार पीपल में साक्षात श्रीहरि और पितरों का वास माना गया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार का सबसे अनूठा पहलू यह है कि 8 नवंबर को प्रदोष काल में दीपावली लक्ष्मी पूजन संपन्न होने के ठीक अगली सुबह यह दुर्लभ सोमवती अमावस्या पड़ रही है यानी माता लक्ष्मी के आह्वान के तुरंत बाद पितृ आशीर्वाद और सौभाग्य सिद्धि का महासंयोग बन रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/HT0bHTAjhV8" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक बनने वाले इस विशेष काल में पीपल की 108 परिक्रमा और पितृ तर्पण की सही विधि क्या है, आइए समझते हैं कि शास्त्रों में इसे इतना फलदायी क्यों बताया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोमवती अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p style="text-align: justify;">हिंदू पंचांग में उदया तिथि का विशेष महत्व होता है. साल 2026 में कार्तिक अमावस्या तिथि दो दिन प्रभावी रह रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व दोगुना हो गया है.</p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या प्रारंभ-</strong> 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे</li>
<li><strong>लक्ष्मी पूजन (प्रदोष काल)-</strong> 8 नवंबर 2026 (रविवार शाम)</li>
<li><strong>अमावस्या समाप्त-</strong> 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे</li>
<li><strong>मुख्य पर्व (उदया तिथि)-</strong> 9 नवंबर 2026 (सोमवार)</li>
<li><strong>पूजा व परिक्रमा मुहूर्त-</strong> सुबह 06:41 से दोपहर 12:31 बजे तक</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीपल की पूजा क्यों मानी जाती है इतनी खास?</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>त्रिदेवों का साक्षात वास:</strong> पीपल की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और ऊपरी भाग में शिव जी वास करते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप:</strong> गीता में श्रीकृष्ण ने पीपल को स्वयं का स्वरूप बताया है, इसलिए यह वृक्ष परम पवित्र है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अखंड सौभाग्य की प्राप्ति:</strong> सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>108 परिक्रमा और कलावा:</strong> पेड़ पर कलावा लपेटकर 108 परिक्रमा करने से सोना धोबिन की तरह सौभाग्य और संकटों से मुक्ति मिलती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पितरों से पीपल का गहरा संबंध: कैसे पाएं पितृदोष से राहत?</strong></p>
<ul style="text-align: justify;">
<li><strong>अमावस्या पर पितरों का वास:</strong> अमावस्या के स्वामी पितृ देव होते हैं और इस दिन वे सूक्ष्म रूप से पीपल पर निवास करते हैं.</li>
<li><strong>जल और तिल से तृप्ति:</strong> पीपल में दूध, जल और काले तिल अर्पित करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति और तृप्ति मिलती है.</li>
<li><strong>पितृदोष से मुक्ति:</strong> इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्नदान करने से कुंडली का पितृदोष शांत होता है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोमवती अमावस्या पर पूजा और परिक्रमा की सही विधि:</strong></p>
<p style="text-align: justify;">9 नवंबर की सुबह स्नान-ध्यान के बाद इस क्रम से पूजा संपन्न करें:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>1. सूर्योदय से पूर्व स्नान:</strong> संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अथवा घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2. पीपल को जल अर्पण:</strong> पीपल के वृक्ष के पास जाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल, कच्चा दूध और काले तिल मिश्रित अर्घ्य चढ़ाएं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>3. परिक्रमा का संकल्प:</strong> हाथ में अक्षत, पुष्प और फल लेकर 108 परिक्रमा का संकल्प लें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>4. कच्चा सूत लपेटना:</strong> प्रत्येक परिक्रमा के साथ पीपल के तने पर मौली या कच्चा सूत लपेटें. यदि 108 परिक्रमा संभव न हो, तो कम से कम 7 या 21 परिक्रमा अवश्य करें और बाकी संख्या के लिए मखाने, मूंगफली या फल अर्पित करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>5. दान-पुण्य:</strong> पूजा समाप्ति के बाद किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को काले तिल, कंबल, <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a>ी फल या भोजन दान करें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.<br /></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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