खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का बड़ा ऐलान, सरपंच चुनावों का बहिष्कार
Rajasthan 30 Oct 2026, 11:55 PM

खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का बड़ा ऐलान, सरपंच चुनावों का बहिष्कार

ABP News
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<p style="text-align: justify;">सिरोही जिले के भारजा गांव से पंचायतीराज चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. मैसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों ने सरपंच और पंच पद के चुनाव का बहिष्कार करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया.</p>
<p style="text-align: justify;">गुरुवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने इन पदों के लिए एक भी नामांकन दाखिल नहीं किया. ग्रामीणों के इस सामूहिक निर्णय ने क्षेत्र में खनन परियोजना को लेकर चल रहे विरोध को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.</p>
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<h3 style="text-align: justify;">प्रशासन की समझाइश के बावजूद नहीं बदला ग्रामीणों का रुख</h3>
<p style="text-align: justify;">जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीण लंबे समय से अपनी मांग उठा रहे हैं. चुनाव बहिष्कार के निर्णय के बाद प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे. उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना निरस्त नहीं होती, तब तक वो सरपंच और पंच पद के चुनाव में भाग नहीं लेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया कि उनके लिए गांव का हित सर्वोपरि है. उन्होंने सरकार और प्रशासन के सामने खनन परियोजना निरस्त करने की मांग रखी और कहा कि मांग पूरी होने के बाद ही वे चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने पर विचार करेंगे.</p>
<h3 style="text-align: justify;">गांव की एकजुटता ने खड़े किए कई सवाल</h3>
<p style="text-align: justify;">भारजा में सरपंच और पंच पद के लिए एक भी नामांकन दाखिल नहीं होना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. ग्रामीणों के इस फैसले ने स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान, प्रशासनिक संवाद और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीणों का कहना है कि जब वो लंबे समय से प्रस्तावित खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं, तो उनकी मांग पर ठोस समाधान क्यों नहीं निकाला गया? हालांकि, परियोजना निरस्त करने की मांग पर सरकार और संबंधित विभागों की ओर से क्या निर्णय लिया गया है, इसकी आधिकारिक स्थिति सामने आना बाकी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी निगाहें</h3>
<p style="text-align: justify;">हजारों की आबादी वाले भारजा गांव में चुनाव बहिष्कार का यह घटनाक्रम लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थानीय जनआंदोलन के बीच महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है. ग्रामीणों ने अपने सामूहिक निर्णय के जरिए खनन परियोजना के विरोध को प्रमुखता से सामने रखा है.</p>
<p style="text-align: justify;">अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव बहिष्कार के बाद प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर क्या कदम उठाता है और प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर आगे क्या निर्णय होता है. फिलहाल ग्रामीणों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. खनन परियोजना निरस्त होने तक चुनाव में भागीदारी नहीं.</p>
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Source Credit: abplive.com
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