विपक्ष की 1 नवंबर की रैली के विरोध में उतरा सिख समुदाय, कहा- 'हमारे दुखों को...'
25 Oct 2026, 10:04 PM

विपक्ष की 1 नवंबर की रैली के विरोध में उतरा सिख समुदाय, कहा- 'हमारे दुखों को...'

ABP News
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<p style="text-align: justify;">1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली विपक्ष कि महारैली को लेकर सिख समुदाय ने नाराजगी जताई है. सिख समुदाय का कहना है कि 1 नवंबर का दिन 1984 में हुए सिख दंगों का ही दिन है. इसी दिन कोई बड़ी रैली करना उनके दुखों को कुरेदने जैसा होगा. इसलिए सिख समुदाय ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में होने वाली इस रैली का विरोध करने का ऐलान किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">1984 में हुए दंगों से पीड़ित परिवारों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर रैली की अनुमति नहीं देने की मांग करने की बात कही है. उनका कहना है कि यदि रैली आयोजित की गई, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और इसे रोकने की कोशिश करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गांधी परिवार पर लगाए आरोप</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दंगा पीड़ितों ने कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार पर 1984 की हिंसा को लेकर गंभीर भी आरोप लगाए. उनका कहना है कि 42 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रभावित परिवार उस दर्द को नहीं भूल पाए हैं. उन्होंने मांग की कि कांग्रेस को पीड़ितों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए और 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली आयोजित नहीं करनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>रैली सिख समुदाय के जख्म पर नमक जैसी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">IANS के अनुसार एक दंगा पीड़ित ने कहा कि "1984 के कत्लेआम को 42 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उस हिंसा की यादें आज भी उनके परिवारों को परेशान करती हैं. उस समय लोगों को भड़काया गया और सिख समुदाय को निशाना बनाया गया. सिखों की फैक्ट्रियों और पेट्रोल पंपों को जलाया गया तथा लोगों की पहचान उनकी पगड़ी से की गई. परिवार की तीन पीढ़ियां इस त्रासदी से प्रभावित हुई हैं. उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि आखिर 1 नवंबर को ही इतनी बड़ी रैली आयोजित करने की जरूरत क्यों महसूस हुई. कांग्रेस या विपक्षी गठबंधन की आड़ में इस दिन राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है."</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने यह भी कहा कि जून 1984 में दरबार साहिब में हुई कार्रवाई सहित सिख समुदाय से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को लोग भूले नहीं हैं. 1 नवंबर की तारीख उनके लिए केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि परिवारों के दर्द और नुकसान की याद से जुड़ी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पीड़ितों ने याद किया अपनों को</strong></p>
<p style="text-align: justify;">प्रदर्शन की चेतावनी देने वाली 1984 दंगा पीड़ित एक महिला ने कहा कि राहुल गांधी की रैली नहीं होनी चाहिए और यदि ऐसा कार्यक्रम आयोजित हुआ, तो उसका विरोध किया जाएगा. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिवारों ने अपने पति, बच्चों और अन्य रिश्तेदारों को खोया, उनके दुख और न्याय की मांगों पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया. महिला ने कहा कि उनके परिवार में भी चार लोगों की मौत हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान लोगों को केवल उनकी पगड़ी देखकर निशाना बनाया गया. प्रभावित परिवार आज भी उस घटना को भूल नहीं सकता और उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने बताया कि 1 से 5 नवंबर तक उनके यहां पाठ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इस दौरान पीड़ित परिवार एक-दूसरे के साथ अपना दुख साझा करते हैं और दिवंगत परिजनों को याद करते हैं. महिला ने भाजपा सरकार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री <a title="अमित शाह" href="https://www.abplive.com/topic/amit-shah" data-type="interlinkingkeywords">अमित शाह</a> से अपील की कि उनकी भावनाओं को समझते हुए रैली की अनुमति न दी जाए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दंगे में शामिल कांग्रेस नेताओं को नहीं सजा</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक अन्य दंगा पीड़ित ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि सिख समुदाय के लोग गांधी परिवार को देखते हैं तो उन्हें हिंसा में मारे गए अपने परिजनों और जलाए गए गुरुद्वारों की याद आती है. उन्होंने आरोप लगाया कि 1984 की हिंसा के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले कुछ नेताओं को कांग्रेस ने राजनीतिक जिम्मेदारियां दीं. उन्होंने जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार और कमलनाथ का नाम लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राजीव गांधी ने कहा था 'बड़ा पेड़ गिरता है...'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित कमलजीत सिंह धीर ने भी 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली पर आपत्ति जताई. उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय सिख समुदाय से माफी मांगने पर ध्यान देना चाहिए. धीर ने कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के समय दिल्ली में सिख समुदाय के लोगों का कत्लेआम हुआ था. उन्होंने राजीव गांधी के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें 'बड़े पेड़ के गिरने पर धरती हिलने' की बात कही गई थी.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्होंने कहा कि दिल्ली में तीन हजार से अधिक सिखों की हत्या की गई थी और मयूर विहार के पास कल्याणपुरी तथा त्रिलोकपुरी जैसे इलाकों में भी लोगों को निशाना बनाया गया. सिख समुदाय इस हिंसा को कभी नहीं भूल सकता. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को रैली करने के बजाय पीड़ितों से माफी मांगनी चाहिए.</p>
Source Credit: abplive.com
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