04 Oct 2026, 10:32 AM
शरीर पर दाद सिर्फ स्किन प्रॉब्लम नहीं, हो सकता है स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा!
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">त्वचा पर अचानक जलन, चुभन और दर्द के साथ छोटे-छोटे दाने या फफोले निकलें तो अक्सर इसे एक सामान्य स्किन प्रॉब्लम समझ लिया जाता है. लेकिन अगर ये लक्षण शिंगल्स यानी हर्पीज जोस्टर की वजह से हैं, तो मामला सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं माना जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक और हार्ट संबंधी घटनाओं के बढ़े हुए खतरों के बीच संबंध देखा गया है. खासतौर पर संक्रमण के बाद शुरुआती दिनों और हफ्तों को महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में जानिए आखिर शिंगल्स होता क्या है और इसकी वजह से कैसे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">क्या होता है शिंगल्स?</h3>
<p style="text-align: justify;">शिंगल्स उसी वायरस से होता है जो चिकनपॉक्स का कारण बनता है. इसे वैरिसेला-जोस्टर वायरस कहा जाता है. चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि नर्व सेल्स में निष्क्रिय अवस्था में रहता है. वर्षों बाद जब इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है या उम्र बढ़ती है, तो यही वायरस दोबारा सक्रिय होकर शिंगल्स का कारण बन जाता है. इसमें आमतौर पर शरीर या चेहरे के एक हिस्से पर दर्द, जलन, खुजली या झुनझुनी के बाद फफोले निकलते हैं. दाने अक्सर शरीर की एक तरफ नसों के रास्ते में दिखाई देते हैं. फफोले कुछ दिनों में पपड़ी में बदलते हैं और करीब 2 से 4 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">दर्द खत्म होने के बाद भी रह सकती है परेशानी</h3>
<p style="text-align: justify;">शिंगल्स की सबसे आम मुसिबतों में पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया यानी लंबे समय तक रहने वाला नसों का दर्द शामिल है. शिंगल्स से गुजरने वाले करीब 10 से 18 परसेंट लोगों में यह समस्या हो सकती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है. कुछ लोगों में दाने ठीक होने के बाद भी प्रभावित हिस्से में महीनों या कभी-कभी वर्षों तक दर्द बना रहता है. अगर संक्रमण चेहरे या आंख के आसपास हो, तो आंखों और नजर पर भी असर पड़ सकता है. दुर्लभ मामलों में वायरस मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या भी पैदा कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/world-heart-day-scad-heart-attack-young-women-symptoms-causes-3195239"><strong>SCAD In Women: 30-40 की उम्र में फिट महिलाओं को हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानें छिपा खतरा</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">शिंगल्स और स्ट्रोक के बीच क्या संबंध है?</h3>
<p style="text-align: justify;">कई स्टडी में हर्पीज जोस्टर के बाद स्ट्रोक के जोखिम में बढ़ोतरी देखी गई है. संक्रमण के शुरुआती समय में जोखिम अधिक दिखाई देता है. रिसर्चर्स के अनुसार इसका एक कारण वायरस से जुड़ी रक्त-नलिकाओं की सूजन या वैस्कुलोपैथी हो सकती है. रिसर्च में शिंगल्स और हार्ट अटैक समेत अन्य कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच भी संबंध सामने आया है. कुछ स्टडीज में स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ऐसे करें शिंगल्स से बचाव</h3>
<p style="text-align: justify;">भारत में शिंगल्स से बचाव का सबसे असरदार और मुख्य तरीका टीकाकरण करवाना है. यह टीका वायरस को दोबारा सक्रिय होने से रोकता है और इसके गंभीर दर्द के जोखिम को कम करता है. अगर घर में किसी को शिंगल्स हुआ है, तो उनके फफोलों या दानों को सीधे छूने से बचें और रैशेज को साफ और ढंक कर रखें. वहीं समस्या बढ़ने से पहले ही डॉक्टर को दिखाना फायदेमंद होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/pm-modi-mention-amla-know-health-benefits-3194849"><strong>आंवला खाने से शरीर को मिलते हैं ये फायदे, पीएम मोदी ने भी किया जिक्र</strong></a></p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्च में शिंगल्स के बाद स्ट्रोक और हार्ट संबंधी घटनाओं के बढ़े हुए खतरों के बीच संबंध देखा गया है. खासतौर पर संक्रमण के बाद शुरुआती दिनों और हफ्तों को महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में जानिए आखिर शिंगल्स होता क्या है और इसकी वजह से कैसे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">क्या होता है शिंगल्स?</h3>
<p style="text-align: justify;">शिंगल्स उसी वायरस से होता है जो चिकनपॉक्स का कारण बनता है. इसे वैरिसेला-जोस्टर वायरस कहा जाता है. चिकनपॉक्स ठीक होने के बाद वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि नर्व सेल्स में निष्क्रिय अवस्था में रहता है. वर्षों बाद जब इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है या उम्र बढ़ती है, तो यही वायरस दोबारा सक्रिय होकर शिंगल्स का कारण बन जाता है. इसमें आमतौर पर शरीर या चेहरे के एक हिस्से पर दर्द, जलन, खुजली या झुनझुनी के बाद फफोले निकलते हैं. दाने अक्सर शरीर की एक तरफ नसों के रास्ते में दिखाई देते हैं. फफोले कुछ दिनों में पपड़ी में बदलते हैं और करीब 2 से 4 सप्ताह में ठीक हो जाते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">दर्द खत्म होने के बाद भी रह सकती है परेशानी</h3>
<p style="text-align: justify;">शिंगल्स की सबसे आम मुसिबतों में पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया यानी लंबे समय तक रहने वाला नसों का दर्द शामिल है. शिंगल्स से गुजरने वाले करीब 10 से 18 परसेंट लोगों में यह समस्या हो सकती है और उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है. कुछ लोगों में दाने ठीक होने के बाद भी प्रभावित हिस्से में महीनों या कभी-कभी वर्षों तक दर्द बना रहता है. अगर संक्रमण चेहरे या आंख के आसपास हो, तो आंखों और नजर पर भी असर पड़ सकता है. दुर्लभ मामलों में वायरस मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या भी पैदा कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/world-heart-day-scad-heart-attack-young-women-symptoms-causes-3195239"><strong>SCAD In Women: 30-40 की उम्र में फिट महिलाओं को हार्ट अटैक? डॉक्टर से जानें छिपा खतरा</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">शिंगल्स और स्ट्रोक के बीच क्या संबंध है?</h3>
<p style="text-align: justify;">कई स्टडी में हर्पीज जोस्टर के बाद स्ट्रोक के जोखिम में बढ़ोतरी देखी गई है. संक्रमण के शुरुआती समय में जोखिम अधिक दिखाई देता है. रिसर्चर्स के अनुसार इसका एक कारण वायरस से जुड़ी रक्त-नलिकाओं की सूजन या वैस्कुलोपैथी हो सकती है. रिसर्च में शिंगल्स और हार्ट अटैक समेत अन्य कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं के बीच भी संबंध सामने आया है. कुछ स्टडीज में स्ट्रोक और कोरोनरी हार्ट डिजीज के जोखिम में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ऐसे करें शिंगल्स से बचाव</h3>
<p style="text-align: justify;">भारत में शिंगल्स से बचाव का सबसे असरदार और मुख्य तरीका टीकाकरण करवाना है. यह टीका वायरस को दोबारा सक्रिय होने से रोकता है और इसके गंभीर दर्द के जोखिम को कम करता है. अगर घर में किसी को शिंगल्स हुआ है, तो उनके फफोलों या दानों को सीधे छूने से बचें और रैशेज को साफ और ढंक कर रखें. वहीं समस्या बढ़ने से पहले ही डॉक्टर को दिखाना फायदेमंद होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/pm-modi-mention-amla-know-health-benefits-3194849"><strong>आंवला खाने से शरीर को मिलते हैं ये फायदे, पीएम मोदी ने भी किया जिक्र</strong></a></p>
Source Credit: abplive.com
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