26 Oct 2026, 08:53 PM
Explained: Xiaomi, Oppo और VIVO के सस्ते फोन कभी नहीं मिलेंगे? चिप की कमी से कैसे बिखरा भारतीय बाजार
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">दुनिया भर में चिप की कमी की असली वजह कोई फैक्ट्री बंद होना या सप्लाई के दौरान हादसा नहीं है. यह एक ऐसी 'भूख' है जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कहा जाता है. अमेरिकी मल्टीनेशनल सेमीकंडरक्टर कंपनी माइक्रोन के मुताबिक, AI डेटा सेंटरों की मांग इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मेमोरी चिप की कमी 2027 से आगे भी जारी रह सकती है. यह भी नहीं पता कि आपूर्ति कब मांग के बराबर होगी. डेल के CEO माइकल डेल ने कहा कि 2027 में हालात 2026 से और खराब होंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><em>इसका सीधा असर भारत के सस्ते फोन बाजार पर कितना पड़ रहा है, क्या अब शाओमी और वीवो जैसे फोन सस्ते नहीं होंगे?</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चिप की सप्लाई में असली गड़बड़ कहां है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेमोरी चिप (DRAM और NAND) हर स्मार्टफोन की जान होती है. पहले एक नॉर्मल फोन की कुल लागत में इनका हिस्सा 10-15% हुआ करता था. 2026 की शुरुआत में ही यह हिस्सा 30-40% तक पहुंच गया. कुछ मामलों में तो 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले फोन की कीमत सालाना आधार पर लगभग तीन गुना हो गई. एक 10 हजार रुपए के फोन में तो चिप की लागत अब 53% तक पहुंच गई है, जबकि 20 हजार रुपए से कम के फोन में यह 45% है.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, सैमसंग, SK हायनिक्स और माइक्रोन जैसी कंपनियां अपनी सारी ताकत AI डेटा सेंटरों के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) बनाने में लगा रही हैं, क्योंकि वहां फायदा ज्यादा है. यहां एक गणित भी है कि 100 बिट HBM3E बनाने के लिए DDR मेमोरी का उत्पादन करीब 300 बिट कम हो जाता है. HBM4E के साथ यह अनुपात 4:1 तक पहुंच सकता है. यानी जितनी ज्यादा HBM बनेगी, उतनी ही कम आम फोनों के लिए मेमोरी बचेगी.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/687c64a01ea1c196675162723f1e319a17929986018461317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या भारतीय बाजार में चीनी ब्रांडों की पकड़ ढीली पड़ी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों की बाजार हिस्सेदारी जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में घटकर 67-68% रह गई, जो आठ साल में सबसे कम है. पहले यह 75% थी. वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी कंपनियां अपने बजट मॉडल कम कर रही हैं और स्पेक्स में कटौती कर रही हैं ताकि लागत संभाली जा सके.</p>
<p style="text-align: justify;">शाओमी ने तो 2026 की शुरुआत में ही चेतावनी दे दी थी कि मेमोरी लागत के कारण उसकी कीमतों में लगभग 25% की बढ़ोतरी होगी. बाद में रेडमी 15 5G जैसे मॉडलों की कीमत 4 हजार रुपए तक बढ़ा दी गई. कंपनी ने कहा है कि 2026 की दूसरी छमाही में कीमतों और बढ़ेंगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारतीय ब्रांडों को मिला 'अनचाहा मौका'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जहां चीनी कंपनियां बजट सेगमेंट से पीछे हट रही हैं, वहीं भारतीय ब्रांडों ने इस जगह को भरना शुरू कर दिया है. काउंटरपॉइंट के मुताबिक, भारतीय ब्रांडों की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी सितंबर 2026 की तिमाही में 7% हो गई, जो पिछले साल सिर्फ 2% थी. यह अक्टूबर-दिसंबर 2018 के बाद सबसे बड़ी छलांग है. इसमें Ai+ और Lava की हिस्सेदारी लगभग 95% रही.</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा Ai+ का है. यह ब्रांड जुलाई 2025 में लॉन्च हुआ था और 2026 के Q3 में शिपमेंट सालाना आधार पर 306% बढ़ गई. यह पूरे बाजार में सबसे तेज ग्रोथ है. हालांकि, यह जीत बाजार की मजबूरी से मिली है. भारतीय ब्रांड भी उसी महंगी मेमोरी की चपेट में हैं. लेकिन वे कम स्पेक्स वाले फोन बनाकर और क्वांटिटी पर ध्यान देकर इस दौर में टिके हुए हैं.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/5c970b0eae4063c2beaf3f93ff44612317929985310491317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो क्या सस्ते मोबाइल का दौर अब नहीं लौटेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आप सोच रहे हैं कि 'अगले साल तक सब ठीक हो जाएगा,' तो आंकड़े कुछ और कहते हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>2027 और खराब होगा:</strong> माइक्रोन के मुताबिक, 2026 से भी तंग होगा 2027. डेल के CEO भी यही मानते हैं कि 2027 में हालात बिगड़ेंगे.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>राहत की उम्मीद:</strong> Gartner के मुताबिक, 2027 के अंत से पहले कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि नई मेमोरी कैपिसिटी बनाने में लंबा समय लगता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चिप की कमी H2 2027 तक बनी रहेगी.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>2029-30 में राहत:</strong> नई मेमोरी फैब (फैक्ट्री) बनाने में लगभग चार साल लगते हैं. इस वजह से डेल को 2029 या 2030 से पहले कोई बड़ी नई आपूर्ति आने की उम्मीद नहीं है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कीमतों का गिरना:</strong> भले ही आपूर्ति सुधर जाए, लेकिन उद्योग के जानकारों का कहना है कि कीमतें कम होने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि कंपनियों ने ऊंची कीमतों को 'लॉक' कर लिया है. कुछ रिपोर्ट्स तो यहां तक कहती हैं कि स्मार्टफोन और लैपटॉप की महंगी कीमतों से राहत 2030 तक नहीं मिल सकती.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब 'किफायती' की नई परिभाषा बनेगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जिस Xiaomi, Vivo और Oppo की पहचान 'कम कीमत में ज्यादा फीचर्स' थी, वे अब मजबूरी में अपने बजट मॉडल कम कर रहे हैं और स्पेक्स घटा रहे हैं. भारतीय ब्रांड Ai+ और Lava को भले ही फिलहाल फायदा मिल रहा है, लेकिन वे भी उसी महंगी मेमोरी की चपेट में हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे बड़ी बात है कि AI की मांग जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह कमी 2027 में और गहरी होगी. 2029-30 से पहले राहत मिलने की उम्मीद बहुत कम है. यानी जो दौर 'हर साल सस्ते में बेहतर फोन' का था, वह अब खत्म हो चुका है. आने वाले सालों में 'सस्ता' फोन पाने के लिए या तो आपको समझौता करना पड़ेगा या फिर अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong><em>इसका सीधा असर भारत के सस्ते फोन बाजार पर कितना पड़ रहा है, क्या अब शाओमी और वीवो जैसे फोन सस्ते नहीं होंगे?</em></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>चिप की सप्लाई में असली गड़बड़ कहां है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मेमोरी चिप (DRAM और NAND) हर स्मार्टफोन की जान होती है. पहले एक नॉर्मल फोन की कुल लागत में इनका हिस्सा 10-15% हुआ करता था. 2026 की शुरुआत में ही यह हिस्सा 30-40% तक पहुंच गया. कुछ मामलों में तो 8GB रैम और 256GB स्टोरेज वाले फोन की कीमत सालाना आधार पर लगभग तीन गुना हो गई. एक 10 हजार रुपए के फोन में तो चिप की लागत अब 53% तक पहुंच गई है, जबकि 20 हजार रुपए से कम के फोन में यह 45% है.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, सैमसंग, SK हायनिक्स और माइक्रोन जैसी कंपनियां अपनी सारी ताकत AI डेटा सेंटरों के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) बनाने में लगा रही हैं, क्योंकि वहां फायदा ज्यादा है. यहां एक गणित भी है कि 100 बिट HBM3E बनाने के लिए DDR मेमोरी का उत्पादन करीब 300 बिट कम हो जाता है. HBM4E के साथ यह अनुपात 4:1 तक पहुंच सकता है. यानी जितनी ज्यादा HBM बनेगी, उतनी ही कम आम फोनों के लिए मेमोरी बचेगी.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/687c64a01ea1c196675162723f1e319a17929986018461317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या भारतीय बाजार में चीनी ब्रांडों की पकड़ ढीली पड़ी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">चीनी स्मार्टफोन ब्रांडों की बाजार हिस्सेदारी जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में घटकर 67-68% रह गई, जो आठ साल में सबसे कम है. पहले यह 75% थी. वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसी कंपनियां अपने बजट मॉडल कम कर रही हैं और स्पेक्स में कटौती कर रही हैं ताकि लागत संभाली जा सके.</p>
<p style="text-align: justify;">शाओमी ने तो 2026 की शुरुआत में ही चेतावनी दे दी थी कि मेमोरी लागत के कारण उसकी कीमतों में लगभग 25% की बढ़ोतरी होगी. बाद में रेडमी 15 5G जैसे मॉडलों की कीमत 4 हजार रुपए तक बढ़ा दी गई. कंपनी ने कहा है कि 2026 की दूसरी छमाही में कीमतों और बढ़ेंगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारतीय ब्रांडों को मिला 'अनचाहा मौका'</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जहां चीनी कंपनियां बजट सेगमेंट से पीछे हट रही हैं, वहीं भारतीय ब्रांडों ने इस जगह को भरना शुरू कर दिया है. काउंटरपॉइंट के मुताबिक, भारतीय ब्रांडों की संयुक्त बाजार हिस्सेदारी सितंबर 2026 की तिमाही में 7% हो गई, जो पिछले साल सिर्फ 2% थी. यह अक्टूबर-दिसंबर 2018 के बाद सबसे बड़ी छलांग है. इसमें Ai+ और Lava की हिस्सेदारी लगभग 95% रही.</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा Ai+ का है. यह ब्रांड जुलाई 2025 में लॉन्च हुआ था और 2026 के Q3 में शिपमेंट सालाना आधार पर 306% बढ़ गई. यह पूरे बाजार में सबसे तेज ग्रोथ है. हालांकि, यह जीत बाजार की मजबूरी से मिली है. भारतीय ब्रांड भी उसी महंगी मेमोरी की चपेट में हैं. लेकिन वे कम स्पेक्स वाले फोन बनाकर और क्वांटिटी पर ध्यान देकर इस दौर में टिके हुए हैं.</p>
<p><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/5c970b0eae4063c2beaf3f93ff44612317929985310491317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो क्या सस्ते मोबाइल का दौर अब नहीं लौटेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">अगर आप सोच रहे हैं कि 'अगले साल तक सब ठीक हो जाएगा,' तो आंकड़े कुछ और कहते हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>2027 और खराब होगा:</strong> माइक्रोन के मुताबिक, 2026 से भी तंग होगा 2027. डेल के CEO भी यही मानते हैं कि 2027 में हालात बिगड़ेंगे.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>राहत की उम्मीद:</strong> Gartner के मुताबिक, 2027 के अंत से पहले कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि नई मेमोरी कैपिसिटी बनाने में लंबा समय लगता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चिप की कमी H2 2027 तक बनी रहेगी.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>2029-30 में राहत:</strong> नई मेमोरी फैब (फैक्ट्री) बनाने में लगभग चार साल लगते हैं. इस वजह से डेल को 2029 या 2030 से पहले कोई बड़ी नई आपूर्ति आने की उम्मीद नहीं है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>कीमतों का गिरना:</strong> भले ही आपूर्ति सुधर जाए, लेकिन उद्योग के जानकारों का कहना है कि कीमतें कम होने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि कंपनियों ने ऊंची कीमतों को 'लॉक' कर लिया है. कुछ रिपोर्ट्स तो यहां तक कहती हैं कि स्मार्टफोन और लैपटॉप की महंगी कीमतों से राहत 2030 तक नहीं मिल सकती.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब 'किफायती' की नई परिभाषा बनेगी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">जिस Xiaomi, Vivo और Oppo की पहचान 'कम कीमत में ज्यादा फीचर्स' थी, वे अब मजबूरी में अपने बजट मॉडल कम कर रहे हैं और स्पेक्स घटा रहे हैं. भारतीय ब्रांड Ai+ और Lava को भले ही फिलहाल फायदा मिल रहा है, लेकिन वे भी उसी महंगी मेमोरी की चपेट में हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">सबसे बड़ी बात है कि AI की मांग जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उसे देखते हुए यह कमी 2027 में और गहरी होगी. 2029-30 से पहले राहत मिलने की उम्मीद बहुत कम है. यानी जो दौर 'हर साल सस्ते में बेहतर फोन' का था, वह अब खत्म हो चुका है. आने वाले सालों में 'सस्ता' फोन पाने के लिए या तो आपको समझौता करना पड़ेगा या फिर अपना बजट बढ़ाना पड़ेगा.</p>
Source Credit: abplive.com
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