Madhya Pradesh
15 Sep 2026, 11:57 PM
रतलाम में संत ने समझाई बड़ी बात सन्यास मार्ग पर कब बढ़ें
Patrika
@patrika
रतलाम. संन्यास केवल वस्त्र बदलने का नाम नहीं है। सम्यक प्रकार के न्यास को ही संन्यास कहा गया है। आश्रम, गृहस्थ और संन्यास आश्रम के संबंध में भी साधकों को चिंतन करना चाहिए। जब बुद्धि शुद्ध हो जाए और भीतर से वैराग्य जागृत हो, तभी संन्यास के मार्ग पर आगे बढऩा चाहिए।स्वामी ज्ञानानंद मार्ग, सैलाना बस स्टैंड स्थित अखंड ज्ञान आश्रम में आयोजित दिव्य चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को संत विशोकानंद भारती के सानिध्य में प्रात:काल कठोपनिषद का स्वाध्याय एवं सायंकाल श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कथा एवं प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। उन्होंने कहा कि राम ब्रह्म हैं तो माता कौशल्या समाधि के स्वरूप को धारण करती हैं।
Source Credit: patrika.com
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