30 Oct 2026, 07:48 PM
10 साल की उम्र में गंवाए दोनों हाथ, फिर भी हार नहीं मानी और बने तहसीलदार
ABP News
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<p style="text-align: justify;">राजस्थान प्रशासनिक सेवा RAS 2024 की परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद एक बेहद प्रेरणादायक और भावुक कर देने वाली सफलता की कहानी सामने आई है. राजस्थान के दौसा जिले के रहने वाले राजवीर गुर्जर ने तमाम शारीरिक और मानसिक चुनौतियों को पार करते हुए आरएएस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है. बचपन में हुए एक भयानक हादसे में अपने दोनों हाथ गंवाने के बावजूद राजवीर ने कभी हिम्मत नहीं हारी और आज उन्हें तहसीलदार के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किया गया है. उनकी यह ऐतिहासिक सफलता देश भर के उन लाखों युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा बन गई है जो विपरीत परिस्थितियों में अपने सपनों को छोड़ देते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बचपन में हुए एक दर्दनाक हादसे ने छीन लिए थे दोनों हाथ</strong></p>
<p style="text-align: justify;">राजवीर गुर्जर के जीवन का यह कड़ा संघर्ष बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गया था. जब वह महज छह साल के थे, तब एक खेल के दौरान हुए विस्फोटक धमाके की चपेट में आने से उनके दोनों हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे. डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथों की हथेलियों को काटना पड़ा था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एक छोटे बच्चे के लिए बिना हथेलियों के अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीना और समाज के तानों का सामना करना बेहद दर्दनाक था. परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन राजवीर के माता-पिता ने उनका हौसला बनाए रखा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कलाइयों के सहारे लिखना सीखकर पूरी की अपनी पढ़ाई</h3>
<p style="text-align: justify;">हाथ न होने के कारण राजवीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी स्कूली शिक्षा को जारी रखने की थी. उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. राजवीर ने अपनी दोनों कलाइयों से लिखने का कड़ा अभ्यास शुरू किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">शुरुआत में उन्हें काफी दर्द और कठिनाई का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार मेहनत से उन्होंने कलाइयों से लिखना सीख लिया. इसी अनोखे अंदाज के दम पर उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और फिर कॉलेज की पढ़ाई अच्छे अंकों के साथ पूरी की, जिससे उनका आत्मविश्वास और ज्यादा बढ़ गया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बिना किसी कोचिंग के घर पर रहकर की RAS की तैयारी</h3>
<p style="text-align: justify;">ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद राजवीर ने राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में जाने का बड़ा लक्ष्य तय किया. बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी करने का फैसला किया.</p>
<p style="text-align: justify;">इंटरनेट और किताबों की मदद से उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की और परीक्षा के पूरे सिलेबस को अच्छे से तैयार किया. RAS जैसी मुख्य परीक्षा में बड़े-बड़े उत्तर लिखने होते हैं, जहाx राजवीर ने बिना किसी राइटिंग असिस्टेंट की मदद लिए अपनी कलाइयों के दम पर ही मुख्य परीक्षा के सभी पेपर खुद लिखे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/education/ca-cs-demand-rises-in-job-market-as-companies-plan-more-hiring-than-for-mba-and-engineering-graduates-3197148"><strong>जॉब मार्केट में CA-CS की बढ़ी डिमांड, MBA और इंजीनियर्स से निकले आगे</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">तहसीलदार के पद पर नियुक्ति और युवाओं के लिए प्रेरणा</h3>
<p style="text-align: justify;">RAS 2024 परीक्षा के अंतिम परिणाम में राजवीर गुर्जर को उनकी कड़ी मेहनत और अटूट लगन का सबसे बड़ा इनाम मिला. विभाग की ओर से उन्हें तहसीलदार के पद पर नियुक्त किया गया है, जो प्रशासनिक सेवाओं में एक बेहद जिम्मेदार और सम्मानित पद माना जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">राजवीर की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर मिलते ही उनके पूरे गांव और दौसा जिले में जश्न का माहौल है. उनकी यह जांबाज कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का सच्चा जज्बा हो, तो शारीरिक दिव्यांगता भी सफलता के रास्ते में कभी रोड़ा नहीं बन सकती.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/education/upsc-success-story-sudarshan-ravankole-17-lakh-package-devops-engineer-career-gap-carelon-solutions-3197413"><strong>UPSC में 3 बार फेल, 8 साल नौकरी नहीं, फिर मिला 17 लाख का पैकेज</strong></a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बचपन में हुए एक दर्दनाक हादसे ने छीन लिए थे दोनों हाथ</strong></p>
<p style="text-align: justify;">राजवीर गुर्जर के जीवन का यह कड़ा संघर्ष बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गया था. जब वह महज छह साल के थे, तब एक खेल के दौरान हुए विस्फोटक धमाके की चपेट में आने से उनके दोनों हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे. डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनके दोनों हाथों की हथेलियों को काटना पड़ा था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">एक छोटे बच्चे के लिए बिना हथेलियों के अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जीना और समाज के तानों का सामना करना बेहद दर्दनाक था. परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन राजवीर के माता-पिता ने उनका हौसला बनाए रखा और उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कलाइयों के सहारे लिखना सीखकर पूरी की अपनी पढ़ाई</h3>
<p style="text-align: justify;">हाथ न होने के कारण राजवीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी स्कूली शिक्षा को जारी रखने की थी. उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी शारीरिक कमजोरी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. राजवीर ने अपनी दोनों कलाइयों से लिखने का कड़ा अभ्यास शुरू किया.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">शुरुआत में उन्हें काफी दर्द और कठिनाई का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार मेहनत से उन्होंने कलाइयों से लिखना सीख लिया. इसी अनोखे अंदाज के दम पर उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा और फिर कॉलेज की पढ़ाई अच्छे अंकों के साथ पूरी की, जिससे उनका आत्मविश्वास और ज्यादा बढ़ गया.</p>
<h3 style="text-align: justify;">बिना किसी कोचिंग के घर पर रहकर की RAS की तैयारी</h3>
<p style="text-align: justify;">ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद राजवीर ने राजस्थान की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में जाने का बड़ा लक्ष्य तय किया. बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी करने का फैसला किया.</p>
<p style="text-align: justify;">इंटरनेट और किताबों की मदद से उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की और परीक्षा के पूरे सिलेबस को अच्छे से तैयार किया. RAS जैसी मुख्य परीक्षा में बड़े-बड़े उत्तर लिखने होते हैं, जहाx राजवीर ने बिना किसी राइटिंग असिस्टेंट की मदद लिए अपनी कलाइयों के दम पर ही मुख्य परीक्षा के सभी पेपर खुद लिखे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/education/ca-cs-demand-rises-in-job-market-as-companies-plan-more-hiring-than-for-mba-and-engineering-graduates-3197148"><strong>जॉब मार्केट में CA-CS की बढ़ी डिमांड, MBA और इंजीनियर्स से निकले आगे</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">तहसीलदार के पद पर नियुक्ति और युवाओं के लिए प्रेरणा</h3>
<p style="text-align: justify;">RAS 2024 परीक्षा के अंतिम परिणाम में राजवीर गुर्जर को उनकी कड़ी मेहनत और अटूट लगन का सबसे बड़ा इनाम मिला. विभाग की ओर से उन्हें तहसीलदार के पद पर नियुक्त किया गया है, जो प्रशासनिक सेवाओं में एक बेहद जिम्मेदार और सम्मानित पद माना जाता है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">राजवीर की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर मिलते ही उनके पूरे गांव और दौसा जिले में जश्न का माहौल है. उनकी यह जांबाज कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का सच्चा जज्बा हो, तो शारीरिक दिव्यांगता भी सफलता के रास्ते में कभी रोड़ा नहीं बन सकती.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp;</strong><a href="https://www.abplive.com/education/upsc-success-story-sudarshan-ravankole-17-lakh-package-devops-engineer-career-gap-carelon-solutions-3197413"><strong>UPSC में 3 बार फेल, 8 साल नौकरी नहीं, फिर मिला 17 लाख का पैकेज</strong></a></p>
Source Credit: abplive.com
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