ओपीडी में इलाज संभव बताकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती बीमा कंपनी
Gwalior, Madhya Pradesh 12 Sep 2026, 08:01 PM

ओपीडी में इलाज संभव बताकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती बीमा कंपनी

Patrika
@patrika
ग्वालियर. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बीमा क्लेम से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मरीज की स्थिति को देखते हुए उसका इलाज ओपीडी स्तर पर होगा या अस्पताल में भर्ती कराकर, इसका निर्णय इलाज कर रहे डॉक्टर के विवेक पर निर्भर करता है। बीमा कंपनी अपनी मर्जी से यह तय कर क्लेम खारिज नहीं कर सकती।आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए 60 हजार रुपए की क्लेम राशि, 3 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 2 हजार रुपए वाद व्यय 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है। तय समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर बीमा कंपनी को 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।अशोक कुमार साहू ने नीवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी से 2 मार्च 2023 से एक वर्ष की अवधि के लिए हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी। पॉलिसी अवधि के दौरान 8 सितंबर 2023 को उनकी तबीयत बिगड़ गई और प्लेटलेट््स कम पाए गए। स्थिति में सुधार नहीं होने पर 12 सितंबर 2023 को बिरला हॉस्पिटल में जांच कराई गई, जहां प्लेटलेट््स घटकर 63 हजार रह गए। मरीज को तेज बुखार, उल्टी और लूज मोशन की शिकायत थी। डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए केवल ओरल मेडिसिन (दवाएं) देने के बजाय उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी।16 सितंबर तक चले उपचार में परिवादी के करीब 60 हजार रुपए खर्च हुए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब परिवादी ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया तो कंपनी ने पॉलिसी के क्लॉज बी-1 का हवाला देते हुए क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि मरीज केवल जांच और आकलन (इन्वेस्टिगेशन) के लिए भर्ती हुआ था और उसका उपचार ओपीडी स्तर पर संभव था।
Source Credit: patrika.com
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