03 Nov 2026, 10:58 PM
NTA Overhaul: NEET UG 2027 एग्जाम फिर होगा ऑफलाइन? NTA में बना 5000 एक्सपर्ट का पैनल
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>NTA Overhaul:</strong> नीट पेपर लीक के बाद एनटीए में हुए बदलावों के साथ ही कई खबरें सामने आ रही थी. 2027 नीट यूजी परीक्षा को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि 2027 का पेपर ऑनलाइन सीबीटी मोड में कराया जाएगा. लेकिन इसे लेकर अब कुछ रिपोर्ट्स सामने आ रही है, जिसमें बताया गया है कि एनटीए नीट यूजी 2027 में पहले वाला ट्रेडिशनल मोड यानी पेन पेपर का ऑप्शन ही जारी रख सकता है. दरअसल यह खबर तब सामने आई, जब केंद्र ने नंदन नीलेकणि &nbsp;की अगुवाई वाली एग्जामिनेशन रिफॉर्म टास्क फोर्स का समय 27 जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा दक्षिणी राज्यों ने प्रस्तावित एग्जाम ओवर हॉल पर चिंता जताई है. &nbsp;रिपोर्ट्स के अनुसार केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक ने सीबीटी का विरोध किया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों टल सकता है 2027 से CBT मोड?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए की ओर से नीट यूजी को लेकर पेन पेपर टेस्टिंग से कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग में बदलाव के प्रस्ताव पर कई महीनों से चर्चा चल रही है. इससे पहले केंद्र ने संकेत दिया था कि परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक को लेकर चिंताओं के बाद नीट यूजी 2027 से परीक्षा को सीबीटी मोड में कराया जा सकता है. लेकिन इस बदलाव में कई प्रैक्टिकल समस्याएं सामने आई है. जिनमें कंप्यूटर टेस्टिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं होना, &nbsp;कैंडिडेट्स की बड़ी संख्या और स्कोर नॉर्मलाइजेशन को लेकर चिंता शामिल है. वहीं नीट यूजी परीक्षा हर साल मई में होती है और परीक्षा की तैयारी आमतौर पर 5 से 6 महीने पहले शुरू हो जाती है. वहीं नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स की रिपोर्ट अब 27 जनवरी 2027 तक आने की उम्मीद है. इसलिए अगले परीक्षा साइकिल के लिए परीक्षा के फॉर्मेट में पूरा बदलाव लागू करने के लिए जनवरी 2027 से मई 2027 तक का यह समय पर्याप्त नहीं माना जा रहा है. इसलिए फिलहाल नीट यूजी 2027 परीक्षा का मोड ऑफलाइन ही रह सकता है, जबकि 2028 या उसके बाद कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग में बदलाव पर विचार किया जा रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दक्षिण भारतीय राज्यों ने भी जताई चिंता&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए की ओर से प्रस्तावित ऑनलाइन परीक्षा और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों ने कई गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं. तमिलनाडु और केरल का तर्क है कि ऑनलाइन मोड में ग्रामीण, सरकारी स्कूलों और राज्य बोर्ड से पढ़ रहे छात्रों को नुकसान हो सकता है. वहीं राज्यों ने मांग की है कि 12वीं बोर्ड के अंकों और अलग-अलग राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों को भी प्रवेश प्रक्रिया में वेटेज दिया जाए. इसमें तमिलनाडु ने एचपीटीएफ को दिए अपने सबमिशन में राज्य में नीट के असर पर 2021 की जस्टिस एके राजन कमेटी की रिपोर्ट के नतीजे शेयर किए हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि नीट एडमिशन में तमिल मीडियम बैकग्राउंड, सरकारी स्कूलों और स्टेट बोर्ड इंस्टीट्यूशन के स्टूडेंट्स के अलावा पिछड़े सोशल ग्रुप के कैंडिडेट्स को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है. &nbsp;इसके अलावा कर्नाटक सरकार ने मांग की है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में राज्यों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तरीके से आयोजित हो सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/education/amu-student-union-election-total-voters-female-student-count-comparison-du-jnu-jamia-3210092">AMU में कितने स्टूडेंट्स और कितनी लड़कियां, दूसरी यूनिवर्सिटी की तुलना में क्या हाल?</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाई पावर्ड टास्क फोर्स की समय सीमा बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी और केंद्र ने देश के एग्जामिनेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की सिफारिश करने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में 6 सदस्यों वाली हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाई. कमेटी नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद बनाई गई थी, जिसके कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और नेशनल लेवल की एंट्रेंस परीक्षाओं की सुरक्षा और भरोसे पर सवाल उठें. पैनल ने मिनिस्ट्री, सरकारी डिपार्टमेंट और दूसरे स्टेट होल्डर के साथ 18 मीटिंग और 40 से ज्यादा कंसल्टेशन किया. इसे स्टूडेंट, पेरेंट्स, टीचर, एकेडमिक इंस्टीट्यूशन, सब्जेक्ट एक्सपर्ट, इंडस्ट्री आर्गेनाईजेशन और एग्जामिनेशन बोर्ड से 54,000 से ज्यादा सुझाव और फीडबैक भी मिले. इस एक्स्ट्रा समय में कमेटी को राज्य सरकारों से सलाह लेने और प्रस्तावित एग्जामिनेशन सुधारों पर आम सहमति बनाने का मौका मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>NTA में बना 5000 एक्सपर्ट का पैनल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए ने अपनी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के तहत अपने पुराने एक्सपर्ट पैनल में भी बड़ा बदलाव किया है. इसमें पहले एजेंसी ने करीब 600 एक्सपर्ट्स पैनल को हटा दिया गया था. इसके बाद में एक्सपर्ट शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई. दरअसल 600 एक्सपर्ट्स को हटाने के बाद 5000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स का एक नया पैनल तैयार किया गया है. यह एक्सपर्ट्स नीट यूजी, जेईई मेन, यूजीसी नेट, सीयूईटी यूजी जैसी एनटीए परीक्षाओं के पेपर तैयार करने, ट्रांसलेट करने, जांचने, मॉडरेशन आंसर की वेरिफिकेशन, सिलेबस मैपिंग और दूसरे गोपनीय काम करेंगे. इस नए पैनल में एजुकेशनल एक्सपर्ट, साइंटिस्ट, रिसर्चर्स, शिक्षक और ट्रांसलेटर जैसे प्रोफेशनल शामिल होंगे. एनटीए के अनुसार इन एक्सपर्ट्स की नियुक्ति नहीं की जाएगी, बल्कि उन्हें 3 साल के पैनल में शामिल किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/education/jobs/bihar-resident-tutor-recruitment-2026-apply-online-for-575-vacancies-check-dates-3209966">Bihar Resident Tutor Recruitment 2026: बिहार में सीनियर रेजिडेंट-ट्यूटर के 575 पदों पर भर्ती, 1.15 लाख तक सैलरी&nbsp;</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों टल सकता है 2027 से CBT मोड?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए की ओर से नीट यूजी को लेकर पेन पेपर टेस्टिंग से कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग में बदलाव के प्रस्ताव पर कई महीनों से चर्चा चल रही है. इससे पहले केंद्र ने संकेत दिया था कि परीक्षा की सुरक्षा और पेपर लीक को लेकर चिंताओं के बाद नीट यूजी 2027 से परीक्षा को सीबीटी मोड में कराया जा सकता है. लेकिन इस बदलाव में कई प्रैक्टिकल समस्याएं सामने आई है. जिनमें कंप्यूटर टेस्टिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी नहीं होना, &nbsp;कैंडिडेट्स की बड़ी संख्या और स्कोर नॉर्मलाइजेशन को लेकर चिंता शामिल है. वहीं नीट यूजी परीक्षा हर साल मई में होती है और परीक्षा की तैयारी आमतौर पर 5 से 6 महीने पहले शुरू हो जाती है. वहीं नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली टास्क फोर्स की रिपोर्ट अब 27 जनवरी 2027 तक आने की उम्मीद है. इसलिए अगले परीक्षा साइकिल के लिए परीक्षा के फॉर्मेट में पूरा बदलाव लागू करने के लिए जनवरी 2027 से मई 2027 तक का यह समय पर्याप्त नहीं माना जा रहा है. इसलिए फिलहाल नीट यूजी 2027 परीक्षा का मोड ऑफलाइन ही रह सकता है, जबकि 2028 या उसके बाद कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग में बदलाव पर विचार किया जा रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दक्षिण भारतीय राज्यों ने भी जताई चिंता&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए की ओर से प्रस्तावित ऑनलाइन परीक्षा और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों ने कई गंभीर मुद्दे भी उठाए हैं. तमिलनाडु और केरल का तर्क है कि ऑनलाइन मोड में ग्रामीण, सरकारी स्कूलों और राज्य बोर्ड से पढ़ रहे छात्रों को नुकसान हो सकता है. वहीं राज्यों ने मांग की है कि 12वीं बोर्ड के अंकों और अलग-अलग राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रमों को भी प्रवेश प्रक्रिया में वेटेज दिया जाए. इसमें तमिलनाडु ने एचपीटीएफ को दिए अपने सबमिशन में राज्य में नीट के असर पर 2021 की जस्टिस एके राजन कमेटी की रिपोर्ट के नतीजे शेयर किए हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि नीट एडमिशन में तमिल मीडियम बैकग्राउंड, सरकारी स्कूलों और स्टेट बोर्ड इंस्टीट्यूशन के स्टूडेंट्स के अलावा पिछड़े सोशल ग्रुप के कैंडिडेट्स को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है. &nbsp;इसके अलावा कर्नाटक सरकार ने मांग की है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में राज्यों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि परीक्षा प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तरीके से आयोजित हो सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें-<a href="https://www.abplive.com/education/amu-student-union-election-total-voters-female-student-count-comparison-du-jnu-jamia-3210092">AMU में कितने स्टूडेंट्स और कितनी लड़कियां, दूसरी यूनिवर्सिटी की तुलना में क्या हाल?</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हाई पावर्ड टास्क फोर्स की समय सीमा बढ़ी&nbsp;</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दूसरी और केंद्र ने देश के एग्जामिनेशन सिस्टम में बड़े सुधारों की सिफारिश करने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में 6 सदस्यों वाली हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाई. कमेटी नीट यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद बनाई गई थी, जिसके कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और नेशनल लेवल की एंट्रेंस परीक्षाओं की सुरक्षा और भरोसे पर सवाल उठें. पैनल ने मिनिस्ट्री, सरकारी डिपार्टमेंट और दूसरे स्टेट होल्डर के साथ 18 मीटिंग और 40 से ज्यादा कंसल्टेशन किया. इसे स्टूडेंट, पेरेंट्स, टीचर, एकेडमिक इंस्टीट्यूशन, सब्जेक्ट एक्सपर्ट, इंडस्ट्री आर्गेनाईजेशन और एग्जामिनेशन बोर्ड से 54,000 से ज्यादा सुझाव और फीडबैक भी मिले. इस एक्स्ट्रा समय में कमेटी को राज्य सरकारों से सलाह लेने और प्रस्तावित एग्जामिनेशन सुधारों पर आम सहमति बनाने का मौका मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>NTA में बना 5000 एक्सपर्ट का पैनल</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एनटीए ने अपनी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के तहत अपने पुराने एक्सपर्ट पैनल में भी बड़ा बदलाव किया है. इसमें पहले एजेंसी ने करीब 600 एक्सपर्ट्स पैनल को हटा दिया गया था. इसके बाद में एक्सपर्ट शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई. दरअसल 600 एक्सपर्ट्स को हटाने के बाद 5000 से ज्यादा एक्सपर्ट्स का एक नया पैनल तैयार किया गया है. यह एक्सपर्ट्स नीट यूजी, जेईई मेन, यूजीसी नेट, सीयूईटी यूजी जैसी एनटीए परीक्षाओं के पेपर तैयार करने, ट्रांसलेट करने, जांचने, मॉडरेशन आंसर की वेरिफिकेशन, सिलेबस मैपिंग और दूसरे गोपनीय काम करेंगे. इस नए पैनल में एजुकेशनल एक्सपर्ट, साइंटिस्ट, रिसर्चर्स, शिक्षक और ट्रांसलेटर जैसे प्रोफेशनल शामिल होंगे. एनटीए के अनुसार इन एक्सपर्ट्स की नियुक्ति नहीं की जाएगी, बल्कि उन्हें 3 साल के पैनल में शामिल किया जाएगा.</p>
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Source Credit: abplive.com
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