नवरात्रि के तुरंत बाद एकादशी, 9 दिन उपवास रखने वालों को क्या फिर रखना चाहिए व्रत? जानें नियम और सही तरीका
17 Oct 2026, 07:23 PM

नवरात्रि के तुरंत बाद एकादशी, 9 दिन उपवास रखने वालों को क्या फिर रखना चाहिए व्रत? जानें नियम और सही तरीका

ABP News
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<p style="text-align: justify;">शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की नौ दिनों तक कठिन उपासना और फलाहार करने के तुरंत बाद एकादशी (पापांकुशा एकादशी) का व्रत आ जाता है. ऐसे में कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठता है कि क्या लगातार नौ दिन उपवास रखने के बाद दसवें दिन पारण करके फिर ग्यारहवें दिन एकादशी का उपवास रखना सही है?</p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों और स्वास्थ्य, दोनों ही नजरिए से इसका जवाब और सही नियम समझना बहुत जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>क्या कहते हैं धार्मिक ग्रंथ और शास्त्र?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है. पद्म पुराण के अनुसार, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि और एकादशी दोनों अलग-अलग संकल्प और देवताओं से जुड़े हैं. नवरात्रि शक्ति की उपासना (मां दुर्गा) का पर्व है, जबकि एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. इसलिए एक व्रत के कारण दूसरे व्रत का निषेध नहीं होता.</p>
<p style="text-align: justify;">जो भक्त साल की सभी 24 एकादशियों का नियमित व्रत रखते हैं, उनके लिए नवरात्रि के बाद आने वाली एकादशी को छोड़ना शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता. वे दशमी तिथि को सात्विक पारण कर अगले दिन एकादशी का व्रत रख सकते हैं. आपने केवल नवरात्रि का संकल्प लिया था और आप नियमित एकादशी व्रत नहीं करते हैं, तो आपके लिए यह व्रत रखना अनिवार्य नहीं है. आप केवल सात्विक रहकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">स्वास्थ्य के नजरिए से क्या ध्यान रखें?</h3>
<p style="text-align: justify;">लगातार नौ दिनों तक सीमित आहार या फलाहार पर रहने के बाद शरीर की ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है. ऐसे में दशमी को भारी भोजन करना और फिर अगले ही दिन एकादशी पर भूखा रहना पाचन तंत्र पर दबाव डाल सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>शरीर की क्षमता पहचानें:</strong> यदि नौ दिनों के उपवास के बाद कमजोरी, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर या डिहाइड्रेशन महसूस हो रहा हो, तो निर्जला या सख्त उपवास रखने से बचें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>दशमी के पारण में सावधानी:</strong> नवमी या दशमी को पारण करते समय एकदम से गरिष्ठ, तला-भुना या अधिक मीठा भोजन न खाएं. हल्का सुपाच्य भोजन (जैसे मूंग दाल की खिचड़ी, लौकी की सब्जी या दलिया) लें ताकि शरीर अगले दिन के उपवास के लिए तैयार रह सके.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बीमार और बुजुर्ग रखें ध्यान:</strong> डायबिटीज, बीपी या गैस्ट्रिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को लगातार उपवास करने से बचना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>अगर व्रत रखना चाहते हैं, तो अपनाएं यह आसान तरीका</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">आपकी गहरी आस्था है और आप एकादशी का पुण्य भी प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन व्यावहारिक नियमों का पालन कर सकते हैं:</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>फलाहारी या जलीय व्रत रखें:</strong> निर्जला या कठोर व्रत रखने के बजाय दूध, ताजे फल, नारियल पानी और मखाने का सेवन करते हुए उपवास करें.<br /><strong>अन्न का त्याग, मानसिक व्रत:</strong> अगर शरीर अनुमति नहीं दे रहा, तो भूखे रहने के बजाय सिर्फ अन्न (विशेषकर चावल और अनाज) का त्याग करें और सात्विक आहार लेकर प्रभु विष्णु का नाम जपें.<br /><strong>चावल का पूरी तरह परहेज:</strong> धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि आप व्रत न भी रखें, तो भी एकादशी के दिन घर में चावल पकाने और खाने से बचें.<br /><strong>दान-पुण्य और सेवा:</strong> उपवास न रख पाने की स्थिति में जरूरतमंदों को अन्न, फल या वस्त्र का दान करें. शास्त्रों में भाव और सेवा को उपवास के समान ही फलदायी माना गया है.</p>
<p style="text-align: justify;">आपका शरीर पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान है, तो दशमी को सात्विक पारण करके एकादशी का व्रत रखना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद शुभ और फलदायी है. लेकिन अगर नौ दिन के व्रत के बाद शरीर साथ न दे, तो खुद को कष्ट दिए बिना केवल सात्विक दिनचर्या, चावल-परहेज और नाम-जप करके भी एकादशी की पूर्ण कृपा प्राप्त की जा सकती है.</p>
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Source Credit: abplive.com
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