26 Oct 2026, 02:52 PM
कौन है देश का सबसे पढ़ा लिखा जीवित शख्स, क्या करते हैं वह?
ABP News
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<p style="text-align: justify;">देश में शिक्षा को अक्सर बेहतर नौकरी और करियर बनाने का माध्यम माना जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके लिए सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती. राजस्थान के डॉ. दशरथ सिंह शेखावत की कहानी इसी बात को बतानी है. भारतीय सेना में सेवा दे चुके शेखावत ने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा अलग-अलग विषयों का अध्ययन करने में लगाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके पास कुल 138 डिग्रियां, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र हैं. इनमें तीन पीएचडी, सात बैचलर डिग्रियां और 46 मास्टर डिग्रियां शामिल हैं. इसके अलावा उन्होंने सैन्य अध्ययन से जुड़े पाठ्यक्रमों सहित कई अन्य विषयों में भी योग्यता हासिल की है.</p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत की पहचान सिर्फ उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है. उनका जीवन यह भी दिखाता है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने से किसी व्यक्ति को किस तरह एक अलग पहचान मिल जाती है. उनकी कहानी उन लोगों के लिए है, जो कम उम्र में किसी वजह से अपनी पढ़ाई के सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">राजस्थान के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. दशरथ सिंह शेखावत राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के खिरोड़ गांव के रहने वाले हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार &nbsp;उनका बचपन ऐसे परिवार में बीता जहां उच्च शिक्षा के लिए सही माहौल और आर्थिक चीजों की कमी थी. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. आगे की पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी. इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा. वर्ष 1988 में भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. सैन्य सेवा के दौरान उन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने उपलब्ध समय का इस्तेमाल अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/education/upsssc-up-pet-2026-guidelines-check-up-pet-upsssc-pet-rules-instructions-3206317"><strong>UP PET परीक्षा आज से, सेंटर जाने से पहले जान लें जरूरी नियम और सावधानियां</strong></a></p>
<h3 style="text-align: justify;">सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रही पढ़ाई</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत वर्ष 2004 में सेना से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने इंटरेस्ट को और आगे बढ़ाया. उन्होंने वाणिज्य, कानून, पत्रकारिता, शिक्षा, राजनीति, अर्थशास्त्र और धार्मिक अध्ययन जैसे कई विषयों में पढ़ाई की. एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से विशिष्ट योग्यता के साथ वैदिक अध्ययन में मास्टर डिग्री प्राप्त की. यह उनकी 138वीं शैक्षणिक योग्यता थी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अब क्या करते हैं डॉ. शेखावत?</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत ने अपनी शैक्षणिक योग्यता का उपयोग सामाजिक और कानूनी कार्यों में भी किया है. वह कानून के क्षेत्र में एक्टिव हैं और सेना के सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों से जुड़े मामलों में सहायता करते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सेना की सप्त शक्ति कमान में विधि सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: </strong><a href="https://www.abplive.com/photo-gallery/education/festive-hiring-boots-ad-tech-fresher-demand-in-delhi-and-mumbai-teamlease-edthech-3205936"><strong>फेस्टिव सीजन से बढ़ी डिजिटल जॉब्स की मांग, दिल्ली 50% के साथ सबसे आगे</strong></a></p>
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<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत की पहचान सिर्फ उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है. उनका जीवन यह भी दिखाता है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई जारी रखने से किसी व्यक्ति को किस तरह एक अलग पहचान मिल जाती है. उनकी कहानी उन लोगों के लिए है, जो कम उम्र में किसी वजह से अपनी पढ़ाई के सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">राजस्थान के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. दशरथ सिंह शेखावत राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के खिरोड़ गांव के रहने वाले हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार &nbsp;उनका बचपन ऐसे परिवार में बीता जहां उच्च शिक्षा के लिए सही माहौल और आर्थिक चीजों की कमी थी. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. आगे की पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी. इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा. वर्ष 1988 में भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. सैन्य सेवा के दौरान उन्हें अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने उपलब्ध समय का इस्तेमाल अपनी शैक्षणिक योग्यता बढ़ाने के लिए किया.</p>
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<h3 style="text-align: justify;">सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रही पढ़ाई</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत वर्ष 2004 में सेना से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने इंटरेस्ट को और आगे बढ़ाया. उन्होंने वाणिज्य, कानून, पत्रकारिता, शिक्षा, राजनीति, अर्थशास्त्र और धार्मिक अध्ययन जैसे कई विषयों में पढ़ाई की. एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से विशिष्ट योग्यता के साथ वैदिक अध्ययन में मास्टर डिग्री प्राप्त की. यह उनकी 138वीं शैक्षणिक योग्यता थी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अब क्या करते हैं डॉ. शेखावत?</h3>
<p style="text-align: justify;">डॉ. शेखावत ने अपनी शैक्षणिक योग्यता का उपयोग सामाजिक और कानूनी कार्यों में भी किया है. वह कानून के क्षेत्र में एक्टिव हैं और सेना के सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों से जुड़े मामलों में सहायता करते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सेना की सप्त शक्ति कमान में विधि सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं.</p>
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Source Credit: abplive.com
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