Masik Karthigai 2026: कृत्तिका नक्षत्र शुरू, आज शाम दीप जलाने की परंपरा क्यों?
27 Oct 2026, 11:43 PM

Masik Karthigai 2026: कृत्तिका नक्षत्र शुरू, आज शाम दीप जलाने की परंपरा क्यों?

ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Masik Karthigai 27 October 2026:</strong> मासिक कार्तिगाई आज मंगलवार 27 अक्टूबर को मनाई जा रही है. कृत्तिका नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगा और 28 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. इस अवसर पर भगवान कार्तिकेय, जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन भी कहा जाता है, की पूजा की जाती है. श्रद्धालु शाम को घर के पूजा स्थान और द्वार पर दीप भी जलाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">तमिल परंपरा में कृत्तिका नक्षत्र को कार्तिगाई या किरुथिगाई कहा जाता है. हर महीने चंद्रमा के इस नक्षत्र में आने पर मासिक कार्तिगाई का व्रत और पूजन किया जाता है. यह पर्व विशेष रूप से भगवान मुरुगन की आराधना से जुड़ा है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज कितने बजे से है कृत्तिका नक्षत्र?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार, 27 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 39 मिनट तक भरणी नक्षत्र रहेगा. इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र शुरू होगा. इस बार शाम के समय कृत्तिका नक्षत्र रहेगा, इसलिए श्रद्धालु शाम की पूजा में दीप जला सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">- कृत्तिका नक्षत्र शुरू: 27 अक्टूबर, दोपहर 3:39 बजे<br />- कृत्तिका नक्षत्र समाप्त: 28 अक्टूबर, दोपहर 1:26 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">ये समय भारतीय मानक समय के अनुसार हैं. अलग-अलग पंचांगों की गणना में कुछ मिनट का अंतर मिल सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मासिक कार्तिगाई पर दीप जलाने की परंपरा क्यों है?</h3>
<p style="text-align: justify;">कार्तिगाई की परंपरा में दीप को प्रकाश और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है. तमिल हिंदू परिवारों में भगवान मुरुगन की पूजा के साथ दीप जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि दीप का प्रकाश अंधकार दूर करने और जीवन में मंगल की कामना का प्रतीक है.</p>
<p style="text-align: justify;">भगवान कार्तिकेय का कृत्तिका नक्षत्र से संबंध एक पौराणिक कथा में भी मिलता है. कथा के अनुसार, भगवान शिव से निकली छह दिव्य चिनगारियों का पालन-पोषण छह कृत्तिकाओं ने किया. आगे चलकर उनसे छह मुख वाले भगवान मुरुगन प्रकट हुए. इसी कथा के कारण कृत्तिका नक्षत्र को भगवान कार्तिकेय की उपासना के लिए विशेष माना जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">शाम को कैसे करें पूजा?</h3>
<p style="text-align: justify;">मासिक कार्तिगाई पर पूजा की विधि और व्रत के नियम परिवार तथा स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं. श्रद्धालु शाम को अपनी परंपरा के अनुसार इस तरह पूजा कर सकते हैं:</p>
<p style="text-align: justify;">1. पूजा स्थान साफ करें और भगवान कार्तिकेय या मुरुगन की तस्वीर अथवा प्रतिमा स्थापित करें.<br />2. फूल और फल अर्पित करें. इच्छा हो तो भगवान मुरुगन के नाम का स्मरण करें या उनकी स्तुति पढ़ें.<br />3. शाम को पूजा स्थान और घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी के दीप जलाएं.<br />4. आरती के बाद परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करें.</p>
<p style="text-align: justify;">दीपों की संख्या या उनके लिए घी अथवा तेल का चुनाव अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मासिक कार्तिगाई और कार्तिगाई दीपम में क्या अंतर है?</h3>
<p style="text-align: justify;">मासिक कार्तिगाई हर महीने कृत्तिका नक्षत्र के अवसर पर मनाई जाती है. वहीं, कार्तिगाई दीपम तमिल महीने कार्तिगाई में मनाया जाने वाला वार्षिक दीपोत्सव है. दोनों आपस में जुड़े हैं, लेकिन 27 अक्टूबर की मासिक कार्तिगाई को वार्षिक कार्तिगाई दीपम समझना सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">वार्षिक पर्व पर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलै में अरुणाचल पर्वत पर विशाल दीप प्रज्वलित किया जाता है. इस परंपरा को भगवान शिव के दिव्य प्रकाश से भी जोड़ा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
Read Full Story
3

Comments (0)

Login to join the conversation