कुंवारा पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर या 1 अक्टूबर कब ? अविवाहित पितरों का श्राद्ध कैसे करें जान लें
30 Sep 2026, 11:36 AM

कुंवारा पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर या 1 अक्टूबर कब ? अविवाहित पितरों का श्राद्ध कैसे करें जान लें

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Kunwara Panchami 2026:</strong> 30 सितंबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी और पंचमी तिथि श्राद्ध है. पितृ पक्ष की पंचमी को कुंवारा पंचमी भी कहा जाता है. इस दिन जिन लोगों की मृत्यु पंचमी पर हुई हो उनके अलावा कुंवारे मृत्यु को प्राप्त होने वाले लोगों का श्राद्ध भी किया जाता है. </p>
<p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 30 सितंबर दोपहर 2:55 बजे से शुरू होकर 1 अक्टूबर दोपहर 12:35 बजे तक रहेगी. इस बार बुधवार को ही पंचमी तिथि श्राद्ध करना सही होगा क्योंकि गुरुवार को पंचमी दोपहर 12:36 पर समाप्त हो जाती है, ऐसे में इस दिन पंचमी पर अपराह्न काल नहीं मिल रहा. श्राद्ध के लिए अपराह्न समय बहुत जरुरी है. </p>
<p style="text-align: justify;"><strong>किन पितरों का किया जाता है श्राद्ध?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">धार्मिक परंपरा में पितृ पक्ष की पंचमी को अविवाहित अवस्था में दिवंगत हुए परिजनों के श्राद्ध के लिए भी विशेष माना जाता है. इसी वजह से इसे कुंवारा पंचमी नाम से जाना जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कुंवारा पंचमी पर कैसे करें श्राद्ध?</strong></p>
<ul style="text-align: justify;">
<li>सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद जिस स्थान पर श्राद्ध करना है, उसे साफ करके गंगाजल से शुद्ध करें. परंपरा हो तो स्थान को गोबर से भी लीप सकते हैं.</li>
<li>घर के आंगन में रंगोली बनाकर पितरों का स्मरण करें. घर की महिलाएं स्नान के बाद श्राद्ध के लिए भोजन तैयार करें. मान्यता के अनुसार, भोजन में खीर जरूर रखी जाती है.</li>
<li>कुंवारा पंचमी पर परंपरा के अनुसार किसी अविवाहित ब्राह्मण को भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है. उनके मार्गदर्शन में श्राद्ध की अन्य विधियां पूरी करें और पूरे समय पितरों का ध्यान करें.</li>
<li>पितरों के निमित्त तैयार खीर और अन्य भोजन सामग्री की थोड़ी-थोड़ी मात्रा अग्नि में अर्पित करें. इसके बाद गाय, कुत्ते, कौए और अतिथि के लिए भोजन का हिस्सा अलग निकालें.</li>
<li>श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद ब्राह्मण को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं. अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें वस्त्र, बर्तन, छाता और दक्षिणा भेंट करें.</li>
<li>भोजन और दान-दक्षिणा के बाद ब्राह्मण को आदरपूर्वक विदा करें और घर के द्वार तक छोड़कर आएं.</li>
<li>पूरे श्राद्ध कर्म के दौरान दिवंगत अविवाहित परिजन और पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें. श्राद्ध का मूल भाव पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करना है.</li>
<li>धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों की शांति की कामना की जाती है. पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहने की प्रार्थना की जाती है.</li>
</ul>
<p><strong>FAQ</strong></p>
<ol>
<li><strong>क्या कुंवारा पंचमी सिर्फ पुरुषों के लिए होती है?</strong><br />नहीं, प्रचलित परंपरा में <strong>अविवाहित अवस्था में दिवंगत पुरुष और महिला दोनों</strong> का श्राद्ध इस दिन किया जा सकता है.</li>
<li><strong>क्या कम उम्र में मृत्यु हुए अविवाहित परिजन का भी श्राद्ध कर सकते हैं?</strong><br />हां, धार्मिक परंपरा में <strong>विवाह से पहले दिवंगत हुए परिजनों</strong> के लिए पंचमी श्राद्ध करने की मान्यता मिलती है.</li>
<li><strong>अगर मृत व्यक्ति की मृत्यु तिथि पंचमी नहीं थी तो क्या उसका श्राद्ध पंचमी पर कर सकते हैं?</strong><br />कुंवारा पंचमी की प्रचलित परंपरा में अविवाहित मृतकों का श्राद्ध पंचमी को किया जाता है, लेकिन <strong>मृत्यु तिथि ज्ञात होने पर सामान्य श्राद्ध-विधान अलग हो सकता है</strong>.</li>
<li><strong>क्या कुंवारा पंचमी पर तर्पण करना जरूरी है?</strong><br />श्राद्ध-विधान में <strong>तर्पण महत्वपूर्ण कर्म</strong> माना जाता है. इसे पितरों का स्मरण करते हुए विधिपूर्वक किया जाता है.</li>
</ol>
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Source Credit: abplive.com
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