31 Oct 2026, 04:32 PM
ISRO Navic Satellite launch: भारत का अपना GPS होगा और ताकतवर, ISRO ने भेजा NVS-03 सैटेलाइट
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>ISRO Navic Satellite launch:</strong> आप जब फोन में मैप खोलकर रास्ता देखते हैं, कैब बुक करते हैं या खाना ऑर्डर करते हैं तो आपकी लोकेशन पता करने का काम GPS करता है. GPS अमेरिका का सिस्टम है, लेकिन अब भारत अपना खुद का GPS तैयार कर रहा है जिसका नाम है NavIC. इसी NavIC को मजबूत करने के लिए ISRO ने एक नया सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह सैटेलाइट है NVS-03, जिसे 30 अक्टूबर की देर रात आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भेजा गया. रॉकेट ने सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सही जगह पहुंचा दिया है. जैसे ही यह खबर आई ISRO के वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे और एक दूसरे को बधाई दी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आखिर NavIC है क्या?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सीधी भाषा में कहें तो NavIC भारत का अपना GPS है. यह आसमान में घूम रहे सैटेलाइट्स की मदद से बताता है कि आप इस वक्त ठीक किस जगह पर हैं. यह भारत और उसके आसपास करीब 1500 किलोमीटर तक के इलाके में काम करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आपकी जिंदगी में इससे क्या बदलेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज कई नए स्मार्टफोन में NavIC का सपोर्ट आने लगा है यानी आपका फोन रास्ता बताने के लिए सिर्फ अमेरिका के GPS पर नहीं टिका रहेगा. इसके अलावा गाड़ियों में लोकेशन ट्रैक करने, समुद्र में मछुआरों और जहाजों को रास्ता दिखाने और बाढ़ या तूफान जैसी आफत के वक्त लोगों तक मदद पहुंचाने में भी यह काम आता है. सेना के लिए तो यह और भी जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका पर निर्भर क्यों नहीं रहना चाहता भारत?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसके पीछे एक पुरानी कहानी है. 1999 में कारगिल की लड़ाई के समय भारतीय सेना को दुश्मन की सही लोकेशन जानने के लिए GPS की जानकारी चाहिए थी, लेकिन अमेरिका ने यह मदद देने से मना कर दिया था. तब भारत को समझ आ गया कि मुश्किल वक्त में दूसरे देश हाथ खींच सकते हैं. इसके बाद भारत ने अपना सिस्टम बनाने की ठान ली. 2006 में इस काम को मंजूरी मिली और 2013 में पहला सैटेलाइट भेजा गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस सैटेलाइट में खास क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">NVS-03 में भारत में ही बनी एक खास घड़ी लगी है जिसे एटॉमिक क्लॉक कहते हैं. यह घड़ी इतना सटीक समय बताती है कि आपकी लोकेशन भी बिल्कुल सही पता चलती है. लोकेशन के मामले में एक पल की गलती भी कई मीटर का फर्क डाल देती है इसलिए यह घड़ी बहुत मायने रखती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp; <a href="https://www.abplive.com/technology/moon-first-ai-supercomputing-will-be-tested-by-hpe-spaceborne-computer-4-flip-rover-3208785">चांद पर पहुंचेगा AI का दिमाग, पहली बार वहां होगा सुपरकंप्यूटर का टेस्ट</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह मिशन इतना जरूरी क्यों था?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पिछले साल जनवरी 2025 में भेजा गया NVS-02 सैटेलाइट अपनी सही जगह तक नहीं पहुंच पाया था. साथ ही NavIC के कुछ पुराने सैटेलाइट्स में भी खराबी आती रही है. अपने दम पर पूरी सेवा देने के लिए कम से कम चार सैटेलाइट चाहिए लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तीन ही काम कर रहे हैं, ऐसे में NVS-03 की कामयाबी बहुत जरूरी थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अभी एक काम बाकी है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रॉकेट ने अपना काम कर दिया है लेकिन अभी सैटेलाइट को उसकी आखिरी जगह तक ले जाना बाकी है. अगले कुछ दिनों में ISRO यह काम करेगा. पिछली बार इसी हिस्से में दिक्कत आई थी इसलिए सबकी नजर इस पर रहेगी. इसके बाद जांच पूरी होने पर सैटेलाइट काम शुरू करेगा, आगे दो और सैटेलाइट भेजने की तैयारी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/shubman-gill-was-seen-wearing-a-temple-on-his-forehead-know-the-price-of-this-device-3208814">माथे पर टेंपल चिपकाए नजर आए शुभमन गिल, जान लें इस डिवाइस की कीमत</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;">यह सैटेलाइट है NVS-03, जिसे 30 अक्टूबर की देर रात आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भेजा गया. रॉकेट ने सैटेलाइट को अंतरिक्ष में सही जगह पहुंचा दिया है. जैसे ही यह खबर आई ISRO के वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे और एक दूसरे को बधाई दी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आखिर NavIC है क्या?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">सीधी भाषा में कहें तो NavIC भारत का अपना GPS है. यह आसमान में घूम रहे सैटेलाइट्स की मदद से बताता है कि आप इस वक्त ठीक किस जगह पर हैं. यह भारत और उसके आसपास करीब 1500 किलोमीटर तक के इलाके में काम करता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आपकी जिंदगी में इससे क्या बदलेगा?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज कई नए स्मार्टफोन में NavIC का सपोर्ट आने लगा है यानी आपका फोन रास्ता बताने के लिए सिर्फ अमेरिका के GPS पर नहीं टिका रहेगा. इसके अलावा गाड़ियों में लोकेशन ट्रैक करने, समुद्र में मछुआरों और जहाजों को रास्ता दिखाने और बाढ़ या तूफान जैसी आफत के वक्त लोगों तक मदद पहुंचाने में भी यह काम आता है. सेना के लिए तो यह और भी जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अमेरिका पर निर्भर क्यों नहीं रहना चाहता भारत?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इसके पीछे एक पुरानी कहानी है. 1999 में कारगिल की लड़ाई के समय भारतीय सेना को दुश्मन की सही लोकेशन जानने के लिए GPS की जानकारी चाहिए थी, लेकिन अमेरिका ने यह मदद देने से मना कर दिया था. तब भारत को समझ आ गया कि मुश्किल वक्त में दूसरे देश हाथ खींच सकते हैं. इसके बाद भारत ने अपना सिस्टम बनाने की ठान ली. 2006 में इस काम को मंजूरी मिली और 2013 में पहला सैटेलाइट भेजा गया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस सैटेलाइट में खास क्या है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">NVS-03 में भारत में ही बनी एक खास घड़ी लगी है जिसे एटॉमिक क्लॉक कहते हैं. यह घड़ी इतना सटीक समय बताती है कि आपकी लोकेशन भी बिल्कुल सही पता चलती है. लोकेशन के मामले में एक पल की गलती भी कई मीटर का फर्क डाल देती है इसलिए यह घड़ी बहुत मायने रखती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें:&nbsp; <a href="https://www.abplive.com/technology/moon-first-ai-supercomputing-will-be-tested-by-hpe-spaceborne-computer-4-flip-rover-3208785">चांद पर पहुंचेगा AI का दिमाग, पहली बार वहां होगा सुपरकंप्यूटर का टेस्ट</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह मिशन इतना जरूरी क्यों था?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">पिछले साल जनवरी 2025 में भेजा गया NVS-02 सैटेलाइट अपनी सही जगह तक नहीं पहुंच पाया था. साथ ही NavIC के कुछ पुराने सैटेलाइट्स में भी खराबी आती रही है. अपने दम पर पूरी सेवा देने के लिए कम से कम चार सैटेलाइट चाहिए लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तीन ही काम कर रहे हैं, ऐसे में NVS-03 की कामयाबी बहुत जरूरी थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अभी एक काम बाकी है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">रॉकेट ने अपना काम कर दिया है लेकिन अभी सैटेलाइट को उसकी आखिरी जगह तक ले जाना बाकी है. अगले कुछ दिनों में ISRO यह काम करेगा. पिछली बार इसी हिस्से में दिक्कत आई थी इसलिए सबकी नजर इस पर रहेगी. इसके बाद जांच पूरी होने पर सैटेलाइट काम शुरू करेगा, आगे दो और सैटेलाइट भेजने की तैयारी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/technology/shubman-gill-was-seen-wearing-a-temple-on-his-forehead-know-the-price-of-this-device-3208814">माथे पर टेंपल चिपकाए नजर आए शुभमन गिल, जान लें इस डिवाइस की कीमत</a></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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