26 Oct 2026, 08:53 PM
Explained: 'मैं आईना देखूं तो चेहरे पर कमियां दिखती हैं...', फिल्टर सेल्फी से लगी आदत है या बीमारी?
ABP News
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<p style="text-align: justify;">आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे पर नजर आने वाली छोटी-छोटी कमियों को देखना और उन्हें ठीक करने की कोशिश करना एक आम आदत है. साइकोलॉजी की रिसर्च बताती है कि यह 'मासूम' आदत एक ऐसे खतरनाक साइकिल में बदल सकती है, जहां आप जितना ज्यादा अपने चेहरे को देखेंगे, उतना ही बैचेन महसूस करेंगे. 'बॉडी इमेज' जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, अगर आप किसी ऐसी चीज पर ध्यान देते हैं जो आपको अपने चेहरे पर पसंद नहीं है, तो इससे आपकी 'दिखावटी संतुष्टि', 'आकर्षण की भावना' और 'आत्म-सम्मान' तीनों कम हो सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>यह चक्र सामान्य लोगों को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले सकता है. इसमें व्यक्ति अपने शरीर के बारे में ऐसी कमियां महसूस करता है जो असल में होती ही नहीं हैं...</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आइने में चेहरा देखने को साइंस कैसे देखता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने खुद को घूरने की आदत पर कई रिसर्च हुई हैं. 'बॉडी इमेज' जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, लोगों को उनके चेहरे की उस विशेषता पर ध्यान देने के लिए कहा गया जो उन्हें पसंद नहीं थी. नतीजतन, उनकी दिखावटी संतुष्टि, कथित आकर्षण और आत्म-सम्मान में कमी आई.</p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्चर्स का मानना है कि यह 'चयनात्मक आत्म-केंद्रित ध्यान' BDD को बनाए रखने में मदद करता है. यानी आप जितना ज्यादा देखेंगे, उतने ही ज्यादा कारण आपको नाखुश होने के मिलेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">2011 में 'बिहेवियर रिसर्च एंड थेरेपी' जर्नल में छपी एक और स्टडी में पाया गया कि BDD वाले लोगों और सामान्य लोगों, दोनों को ही आईने के सामने देखने के बाद ज्यादा परेशानी और आत्म-केंद्रित ध्यान महसूस हुआ. इसका मतलब है कि लंबे समय तक खुद को घूरना किसी के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है, चाहे उसे कोई विकार हो या न हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो क्या यह सिर्फ 'आदत' है या कोई बीमारी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने कभी-कभी अपनी कमियां देखना सामान्य है, लेकिन जब यह आदत घंटों तक चलने लगे, आपको रोजमर्रा के कामों से रोकने लगे और गंभीर परेशानी पैदा करे, तो यह BDD हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इंटरनेशनल OCD फाउंडेशन के मुताबिक, BDD एक गंभीर मानसिक विकार है जिसमें लोग अपने शरीर के 'काल्पनिक दोषों' से इतने ग्रस्त हो जाते हैं कि वे खुद को बदसूरत महसूस करते हैं. BDD से पीड़ित लोग अक्सर घंटों तक खुद को आईने में देखते हैं, दूसरों से बचते हैं या अपनी शक्ल बदलने की कोशिश करते हैं (जैसे प्लास्टिक सर्जरी करवाना).</p>
<p style="text-align: justify;">BDD का सबसे बड़ा लक्षण है अपनी शक्ल का 'विकृत' एहसास. किसी को लगता है कि उसकी नाक टेढ़ी है, चेहरे पर दाग-धब्बे हैं या बाल पतले हो रहे हैं, जबकि असल में कोई और इन 'कमियों' को नोटिस ही नहीं करता.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">BDD से पीड़ित लोग इतने यकीन से अपनी बात कहते हैं कि उन्हें कोई समझा नहीं सकता. यह एनोरेक्सिया (भूख न लगने की बीमारी) जैसा ही है, जहां मरीज खुद को मोटा महसूस करता है जबकि बाकी दुनिया उसे बहुत पतला देखती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/69f4fb69166dbd68b870575b9fd011a117930166362441317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपेरिमेंटल इंडक्शन ऑफ सेल्फ-फोकस्ड अटेंशन विआ मिरर गेजिंग स्टडी के मुताबिक, 'आईना घूरना' सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि कई जटिल 'सेफ्टी बिहेवियर्स' का एक सिलसिला है. इसे व्यक्ति अपनी चिंता कम करने के लिए अपनाता है, लेकिन असर उल्टा होता है. लगभग 90% BDD मरीज बार-बार और बहुत ज्यादा आईने में खुद को देखते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में कितना बड़ा खतरा है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">BDD सिर्फ पश्चिमी देशों की समस्या नहीं है. भारत में किए गए कई अध्ययनों ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>कॉलेज छात्रों में:</strong> एक अध्ययन में 13.3% छात्रों में BDD के लक्षण पाए गए, तो वहीं दूसरे अध्ययन में यह दर 6.9% थी.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>युवा वयस्कों में:</strong> मेहसाणा जिले के एक अध्ययन में कॉलेज जाने वाले 9.36% और कॉलेज न जाने वाले 15.79% युवाओं में BDD पाया गया.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>मेडिकल छात्रों में:</strong> यह आंकड़ा और भी ज्यादा चौंकाने वाला है. शहरी भारतीय मेडिकल छात्रों में BDD का प्रसार 30.7% तक पाया गया.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>जम्मू के किशोरों में:</strong> BDD का प्रसार 29.45% पाया गया.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में BDD एक बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोशल मीडिया और फिल्टर कैसे बढ़ावा दे रहे हैं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज के दौर में इस समस्या को और बढ़ाने में सोशल मीडिया और फोटो-एडिटिंग ऐप्स का बहुत बड़ा हाथ है. इसे 'सोशल मीडिया डिस्मॉर्फिया' या 'सेल्फी डिस्मॉर्फिया' कहा जाता है. सोशल मीडिया पर दिखने वाली 'परफेक्ट' तस्वीरें और फिल्टर लगी सेल्फी लोगों में अस्वस्थ तुलना पैदा करती हैं. Fससे शरीर की छवि विकृत हो जाती है और BDD का खतरा बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में द एस्थेटिक क्लीनिक्स की एक्सपेरिमेंटल स्टडी में पाया गया कि जो लोग रीटच की हुई सेल्फी पोस्ट करते हैं, उनमें कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की इच्छा 82% ज्यादा होती है. भारत में डर्मेटोलॉजी क्लीनिक्स ने 18-26 साल के क्लाइंट्स में इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट में लगातार दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या इसका इलाज मुमकिन है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">BDD का इलाज मुमकिन है, लेकिन इसके लिए सही मदद लेना जरूरी है. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की गाइडलाइन के मुताबिक, इसके इलाज के दो बड़े तरीके हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>दवाइयां:</strong> SSRIs जैसी एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां पहली पसंद हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>थेरेपी:</strong> कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) खास तौर पर BDD के लक्षणों के लिए बनाई गई है. यह सबसे असरदार इलाज मानी जाती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">CBT में मरीज को यह सिखाया जाता है कि वह अपने बारे में बनी विकृत धारणाओं को कैसे पहचाने और बदले. साथ ही, उसे आईना चेक करने, बार-बार दूसरों से अपनी शक्ल के बारे में पूछने और खुद की तुलना करने जैसी आदतों को कम करने के तरीके सिखाए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आईना आपका दोस्त है, दुश्मन नहीं</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे की छोटी-छोटी कमियां ढूंढना और उन्हें ठीक करने की कोशिश करना एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे आपके आत्म-सम्मान को खोखला कर सकती है. साइंस बताता है कि जितना ज्यादा आप अपनी 'कमियों' पर ध्यान देंगे, उतना ही ज्यादा आप उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर देखेंगे और उतना ही कम संतुष्ट महसूस करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में BDD के बढ़ते आंकड़े और सोशल मीडिया का प्रभाव इसे और भी गंभीर बना रहे हैं. अगर आपको लगता है कि आप या आपका कोई करीबी इस चक्र में फंस रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है. आईना आपका दोस्त है, उसे अपना दुश्मन मत बनने दें.</p>
<p style="text-align: justify;"><em><strong>यह चक्र सामान्य लोगों को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ मामलों में यह बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर (BDD) जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का रूप ले सकता है. इसमें व्यक्ति अपने शरीर के बारे में ऐसी कमियां महसूस करता है जो असल में होती ही नहीं हैं...</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आइने में चेहरा देखने को साइंस कैसे देखता है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने खुद को घूरने की आदत पर कई रिसर्च हुई हैं. 'बॉडी इमेज' जर्नल में छपी स्टडी के मुताबिक, लोगों को उनके चेहरे की उस विशेषता पर ध्यान देने के लिए कहा गया जो उन्हें पसंद नहीं थी. नतीजतन, उनकी दिखावटी संतुष्टि, कथित आकर्षण और आत्म-सम्मान में कमी आई.</p>
<p style="text-align: justify;">रिसर्चर्स का मानना है कि यह 'चयनात्मक आत्म-केंद्रित ध्यान' BDD को बनाए रखने में मदद करता है. यानी आप जितना ज्यादा देखेंगे, उतने ही ज्यादा कारण आपको नाखुश होने के मिलेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">2011 में 'बिहेवियर रिसर्च एंड थेरेपी' जर्नल में छपी एक और स्टडी में पाया गया कि BDD वाले लोगों और सामान्य लोगों, दोनों को ही आईने के सामने देखने के बाद ज्यादा परेशानी और आत्म-केंद्रित ध्यान महसूस हुआ. इसका मतलब है कि लंबे समय तक खुद को घूरना किसी के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है, चाहे उसे कोई विकार हो या न हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो क्या यह सिर्फ 'आदत' है या कोई बीमारी?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने कभी-कभी अपनी कमियां देखना सामान्य है, लेकिन जब यह आदत घंटों तक चलने लगे, आपको रोजमर्रा के कामों से रोकने लगे और गंभीर परेशानी पैदा करे, तो यह BDD हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इंटरनेशनल OCD फाउंडेशन के मुताबिक, BDD एक गंभीर मानसिक विकार है जिसमें लोग अपने शरीर के 'काल्पनिक दोषों' से इतने ग्रस्त हो जाते हैं कि वे खुद को बदसूरत महसूस करते हैं. BDD से पीड़ित लोग अक्सर घंटों तक खुद को आईने में देखते हैं, दूसरों से बचते हैं या अपनी शक्ल बदलने की कोशिश करते हैं (जैसे प्लास्टिक सर्जरी करवाना).</p>
<p style="text-align: justify;">BDD का सबसे बड़ा लक्षण है अपनी शक्ल का 'विकृत' एहसास. किसी को लगता है कि उसकी नाक टेढ़ी है, चेहरे पर दाग-धब्बे हैं या बाल पतले हो रहे हैं, जबकि असल में कोई और इन 'कमियों' को नोटिस ही नहीं करता.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">BDD से पीड़ित लोग इतने यकीन से अपनी बात कहते हैं कि उन्हें कोई समझा नहीं सकता. यह एनोरेक्सिया (भूख न लगने की बीमारी) जैसा ही है, जहां मरीज खुद को मोटा महसूस करता है जबकि बाकी दुनिया उसे बहुत पतला देखती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/26/69f4fb69166dbd68b870575b9fd011a117930166362441317_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपेरिमेंटल इंडक्शन ऑफ सेल्फ-फोकस्ड अटेंशन विआ मिरर गेजिंग स्टडी के मुताबिक, 'आईना घूरना' सिर्फ एक आदत नहीं, बल्कि कई जटिल 'सेफ्टी बिहेवियर्स' का एक सिलसिला है. इसे व्यक्ति अपनी चिंता कम करने के लिए अपनाता है, लेकिन असर उल्टा होता है. लगभग 90% BDD मरीज बार-बार और बहुत ज्यादा आईने में खुद को देखते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत में कितना बड़ा खतरा है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">BDD सिर्फ पश्चिमी देशों की समस्या नहीं है. भारत में किए गए कई अध्ययनों ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>कॉलेज छात्रों में:</strong> एक अध्ययन में 13.3% छात्रों में BDD के लक्षण पाए गए, तो वहीं दूसरे अध्ययन में यह दर 6.9% थी.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>युवा वयस्कों में:</strong> मेहसाणा जिले के एक अध्ययन में कॉलेज जाने वाले 9.36% और कॉलेज न जाने वाले 15.79% युवाओं में BDD पाया गया.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>मेडिकल छात्रों में:</strong> यह आंकड़ा और भी ज्यादा चौंकाने वाला है. शहरी भारतीय मेडिकल छात्रों में BDD का प्रसार 30.7% तक पाया गया.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>जम्मू के किशोरों में:</strong> BDD का प्रसार 29.45% पाया गया.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में BDD एक बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>सोशल मीडिया और फिल्टर कैसे बढ़ावा दे रहे हैं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज के दौर में इस समस्या को और बढ़ाने में सोशल मीडिया और फोटो-एडिटिंग ऐप्स का बहुत बड़ा हाथ है. इसे 'सोशल मीडिया डिस्मॉर्फिया' या 'सेल्फी डिस्मॉर्फिया' कहा जाता है. सोशल मीडिया पर दिखने वाली 'परफेक्ट' तस्वीरें और फिल्टर लगी सेल्फी लोगों में अस्वस्थ तुलना पैदा करती हैं. Fससे शरीर की छवि विकृत हो जाती है और BDD का खतरा बढ़ जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में द एस्थेटिक क्लीनिक्स की एक्सपेरिमेंटल स्टडी में पाया गया कि जो लोग रीटच की हुई सेल्फी पोस्ट करते हैं, उनमें कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की इच्छा 82% ज्यादा होती है. भारत में डर्मेटोलॉजी क्लीनिक्स ने 18-26 साल के क्लाइंट्स में इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट में लगातार दोहरे अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या इसका इलाज मुमकिन है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">BDD का इलाज मुमकिन है, लेकिन इसके लिए सही मदद लेना जरूरी है. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) की गाइडलाइन के मुताबिक, इसके इलाज के दो बड़े तरीके हैं:</p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>दवाइयां:</strong> SSRIs जैसी एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां पहली पसंद हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>थेरेपी:</strong> कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) खास तौर पर BDD के लक्षणों के लिए बनाई गई है. यह सबसे असरदार इलाज मानी जाती है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;">CBT में मरीज को यह सिखाया जाता है कि वह अपने बारे में बनी विकृत धारणाओं को कैसे पहचाने और बदले. साथ ही, उसे आईना चेक करने, बार-बार दूसरों से अपनी शक्ल के बारे में पूछने और खुद की तुलना करने जैसी आदतों को कम करने के तरीके सिखाए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आईना आपका दोस्त है, दुश्मन नहीं</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे की छोटी-छोटी कमियां ढूंढना और उन्हें ठीक करने की कोशिश करना एक ऐसी आदत है जो धीरे-धीरे आपके आत्म-सम्मान को खोखला कर सकती है. साइंस बताता है कि जितना ज्यादा आप अपनी 'कमियों' पर ध्यान देंगे, उतना ही ज्यादा आप उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर देखेंगे और उतना ही कम संतुष्ट महसूस करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में BDD के बढ़ते आंकड़े और सोशल मीडिया का प्रभाव इसे और भी गंभीर बना रहे हैं. अगर आपको लगता है कि आप या आपका कोई करीबी इस चक्र में फंस रहा है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मदद लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है. आईना आपका दोस्त है, उसे अपना दुश्मन मत बनने दें.</p>
Source Credit: abplive.com
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