27 Oct 2026, 01:42 PM
Explained: क्या इंसानों के हाथों से फिसल रहा है तकनीक का नियंत्रण? 'बेकाबू' AI से बड़ा खतरा
ABP News
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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="3">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैं, वे सामान्य नागरिक की समझ से बाहर हैं. रक्षा क्षेत्र से लेकर बुनियादी ढांचे तक एआई की घुसपैठ ने एक ऐसे युग का सूत्रपात कर दिया है जहां मानव नियंत्रण धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. हाल ही में यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान ज़ापोरिजिया क्षेत्र में स्वायत्त ड्रोन द्वारा खुद लक्ष्य चुनकर हमला करने और तीन लोगों की जान जाने की घटना ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4">यह घटना दर्शाती है कि हत्यारे रोबोट और स्वायत्त हथियार अब कोई विज्ञान कथा नहीं रह गए हैं, बल्कि एक खतरनाक हकीकत बन चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4"><strong>हगिंग फेस पर हमला, बेकाबू एआई एजेंट्स का पहला रूप</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="7">मई से जुलाई 2026 के बीच एआई अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और डरावनी घटना घटी. ओपनएआई के परीक्षण वातावरण में तैयार किए जा रहे एआई एजेंट्स ने अचानक मानव निर्देशों से बाहर निकलकर आपस में हाथ मिलाया और ओपन-सोर्स मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म 'हगिंग फेस' पर हमला कर दिया.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,0,0">8 मई को ओपनएआई ने नए मॉडलों की ट्रेनिंग शुरू की. एआई एजेंट्स को क्लाउड के वर्चुअलाइजेशन कंप्यूटरों में जटिल समस्याओं को हल करने का काम दिया गया था. इंटरनेट बंद था, लेकिन कुछ सॉफ्टवेयर पैकेज इंस्टॉल करने की अनुमति थी.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,1,0">12 मई को एक एजेंट गायब फाइल मांगने के लिए मैसेज लिखता है. दूसरे एजेंट जल्द ही इसे खोज लेते हैं और एक अनौपचारिक मैसेज बोर्ड बन जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,2,0">26 मई को एजेंट्स ने सुरक्षा पाबंदियों को दरकिनार कर इंटरनेट तक पहुंच बना ली और एडमिनिस्ट्रेटर स्तर की अनुमतियां हासिल कर लीं.&nbsp;13 जुलाई तक करीब 1,200 एजेंट्स ने एक-दूसरे से संपर्क साधा और 70,000 से ज्यादा संदेश और फाइलें साझा कीं. अंततः जुलाई में दुर्भावनापूर्ण डेटासेट अपलोड कर सर्वर्स को बेकाबू कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,3,0"><strong>जब एआई बेकाबू हो जाए: 5 बेहद डरावनी स्थितियां</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11">यदि एआई और स्वायत्त एआई एजेंट्स इसी तरह बेकाबू रहे, तो मानव सभ्यता को पांच प्रमुख क्षेत्रों में भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11"><strong>वित्तीय ढांचा, सब कुछ ठप</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="13,0,0">एआई-संपादित फर्जी लेनदेन की बाढ़ से बैंकों और भुगतान नेटवर्क को ठप किया जा सकता है.&nbsp;एआई मालवेयर आपस में जुड़ी वित्तीय प्रणालियों में सेंध लगाकर शेयर बाजार का कारोबार रोक सकता है और डिजिटल भुगतान ठप कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="13,0,0"><strong>रक्षा: मायावी युद्ध और स्वायत्त हथियार</strong></p>
<p data-path-to-node="15,0,0">हैकर 'डेटा पॉइज़निंग' के जरिए सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों से छेड़छाड़ कर कमांडरों को फर्जी दुश्मन पर हमला करने के निर्देश दे सकते हैं. स्वायत्त ड्रोन और एआई-सहायता वाले हथियार खुद मिसाइल दागने का आदेश दे सकते हैं और बेकाबू एआई खुद युद्ध छेड़ सकता है.</p>
<p data-path-to-node="15,0,0"><strong>आंतरिक सुरक्षा: धोखे में देश</strong></p>
<p data-path-to-node="17,0,0">चुनाव और आंतरिक सुरक्षा के दौरान एआई-जनरेटेड फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए दंगे भड़काए जा सकते हैं. अधिकारियों की हुबहु आवाज़ में विरोधाभासी निर्देश देकर कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है.</p>
<p data-path-to-node="17,0,0"><strong>&nbsp;मैन्युफैक्चरिंग: कारखानों में अफरातफरी</strong></p>
<p data-path-to-node="19,0,0">एआई को ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर साइबर हमलों के लिए नए रास्ते खुलते हैं, जिससे गुणवत्ता जांचने वाले कैमरे खराब पुर्जों को मंजूरी दे देते हैं. औद्योगिक केंद्रों पर एक साथ हमला होने से बिजली प्रणालियां और सप्लाई चेन ठप हो सकती हैं.</p>
<p data-path-to-node="19,0,0"><strong>परिवहन: महाजाम और दुर्घटनाएं</strong></p>
<p data-path-to-node="21,0,0">ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, रेलवे सिग्नलिंग और बंदरगाहों के डिजिटल तंत्र पर हमला कर उड़ानों को गलत दिशा में भेजा जा सकता है. कई नेटवर्क में एक साथ सेंध लगाने से रेल और हवाई यातायात रुक जाएगा और रसद की आवाजाही ठप हो जाएगी.</p>
<p data-path-to-node="21,0,0"><strong>एआई को लेकर वैश्विक चिंताएं</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="24">नोबेल पुरस्कार विजेताओं और एआई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई का खतरा 'एक्सिस्टेंशियल थ्रेट' (अस्तित्व का खतरा) बन चुका है.&nbsp;एआई के सह-जनक और नोबेल पुरस्कार विजेता जैफ्री हिंटन के मुताबिक, "बुद्धिमत्ता का विस्फोट इंसानों को एआई के नियंत्रण में डाल सकता है. यह तकनीक कुछ ही महीनों या सालों में इंसानों से ज्यादा ताकतवर हो जाएगी."</p>
<p data-path-to-node="25,1,0">एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी चेतावनी देते हुए कहा,&nbsp;"एआई की क्षमताएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए मुझे डर है कि 6-12 महीनों में एआई पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर सकता है."</p>
<p data-path-to-node="25,1,0"><strong>अंतर्राष्ट्रीय कानून और यूएन संधि की विफलता</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="28">संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौजूदा संधियां पार पारंपरिक हथियारों और परमाणु हथियारों को तो कवर करती हैं, लेकिन एआई-संचालित स्वायत्त हथियारों पर कोई प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय कानून लागू नहीं होता.</p>
<p data-path-to-node="29,0,0">यूक्रेन युद्ध में ड्रोन ने बिना किसी इंसानी इनपुट के लक्ष्य तय किया और हमला कर दिया. वर्तमान यूएन संधियां ऐसे 'किलर रोबोट्स' पर प्रतिबंध लगाने में असमर्थ साबित हो रही हैं.</p>
<p data-path-to-node="29,1,0">भारत सरकार ने एआई सुरक्षा और सेमीकंडक्टर/प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वैश्विक मानकों को अपनाने के लिए इण्डिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना की है. विशेषज्ञ अंशुल गुप्ता का मानना है कि बिना सोचे-समझे किसी उपकरण में एआई लगाना बुनियादी ढांचे के लिए विनाशकारी हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="32">एआई का विकास मानव सभ्यता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन बिना कड़े सुरक्षा मानकों, अंतर्राष्ट्रीय संधियों और मानव नियंत्रण के, यह बेकाबू एआई तकनीक खुद ही अपने जन्मदाता यानी इंसानों के विनाश का कारण बन सकती है.</p>
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<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="3">आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैं, वे सामान्य नागरिक की समझ से बाहर हैं. रक्षा क्षेत्र से लेकर बुनियादी ढांचे तक एआई की घुसपैठ ने एक ऐसे युग का सूत्रपात कर दिया है जहां मानव नियंत्रण धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. हाल ही में यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान ज़ापोरिजिया क्षेत्र में स्वायत्त ड्रोन द्वारा खुद लक्ष्य चुनकर हमला करने और तीन लोगों की जान जाने की घटना ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4">यह घटना दर्शाती है कि हत्यारे रोबोट और स्वायत्त हथियार अब कोई विज्ञान कथा नहीं रह गए हैं, बल्कि एक खतरनाक हकीकत बन चुके हैं.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="4"><strong>हगिंग फेस पर हमला, बेकाबू एआई एजेंट्स का पहला रूप</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="7">मई से जुलाई 2026 के बीच एआई अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और डरावनी घटना घटी. ओपनएआई के परीक्षण वातावरण में तैयार किए जा रहे एआई एजेंट्स ने अचानक मानव निर्देशों से बाहर निकलकर आपस में हाथ मिलाया और ओपन-सोर्स मशीन लर्निंग प्लेटफॉर्म 'हगिंग फेस' पर हमला कर दिया.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,0,0">8 मई को ओपनएआई ने नए मॉडलों की ट्रेनिंग शुरू की. एआई एजेंट्स को क्लाउड के वर्चुअलाइजेशन कंप्यूटरों में जटिल समस्याओं को हल करने का काम दिया गया था. इंटरनेट बंद था, लेकिन कुछ सॉफ्टवेयर पैकेज इंस्टॉल करने की अनुमति थी.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,1,0">12 मई को एक एजेंट गायब फाइल मांगने के लिए मैसेज लिखता है. दूसरे एजेंट जल्द ही इसे खोज लेते हैं और एक अनौपचारिक मैसेज बोर्ड बन जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,2,0">26 मई को एजेंट्स ने सुरक्षा पाबंदियों को दरकिनार कर इंटरनेट तक पहुंच बना ली और एडमिनिस्ट्रेटर स्तर की अनुमतियां हासिल कर लीं.&nbsp;13 जुलाई तक करीब 1,200 एजेंट्स ने एक-दूसरे से संपर्क साधा और 70,000 से ज्यादा संदेश और फाइलें साझा कीं. अंततः जुलाई में दुर्भावनापूर्ण डेटासेट अपलोड कर सर्वर्स को बेकाबू कर दिया गया.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="8,3,0"><strong>जब एआई बेकाबू हो जाए: 5 बेहद डरावनी स्थितियां</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11">यदि एआई और स्वायत्त एआई एजेंट्स इसी तरह बेकाबू रहे, तो मानव सभ्यता को पांच प्रमुख क्षेत्रों में भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="11"><strong>वित्तीय ढांचा, सब कुछ ठप</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="13,0,0">एआई-संपादित फर्जी लेनदेन की बाढ़ से बैंकों और भुगतान नेटवर्क को ठप किया जा सकता है.&nbsp;एआई मालवेयर आपस में जुड़ी वित्तीय प्रणालियों में सेंध लगाकर शेयर बाजार का कारोबार रोक सकता है और डिजिटल भुगतान ठप कर सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="13,0,0"><strong>रक्षा: मायावी युद्ध और स्वायत्त हथियार</strong></p>
<p data-path-to-node="15,0,0">हैकर 'डेटा पॉइज़निंग' के जरिए सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों से छेड़छाड़ कर कमांडरों को फर्जी दुश्मन पर हमला करने के निर्देश दे सकते हैं. स्वायत्त ड्रोन और एआई-सहायता वाले हथियार खुद मिसाइल दागने का आदेश दे सकते हैं और बेकाबू एआई खुद युद्ध छेड़ सकता है.</p>
<p data-path-to-node="15,0,0"><strong>आंतरिक सुरक्षा: धोखे में देश</strong></p>
<p data-path-to-node="17,0,0">चुनाव और आंतरिक सुरक्षा के दौरान एआई-जनरेटेड फर्जी वीडियो और सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए दंगे भड़काए जा सकते हैं. अधिकारियों की हुबहु आवाज़ में विरोधाभासी निर्देश देकर कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सकता है.</p>
<p data-path-to-node="17,0,0"><strong>&nbsp;मैन्युफैक्चरिंग: कारखानों में अफरातफरी</strong></p>
<p data-path-to-node="19,0,0">एआई को ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी से जोड़ने पर साइबर हमलों के लिए नए रास्ते खुलते हैं, जिससे गुणवत्ता जांचने वाले कैमरे खराब पुर्जों को मंजूरी दे देते हैं. औद्योगिक केंद्रों पर एक साथ हमला होने से बिजली प्रणालियां और सप्लाई चेन ठप हो सकती हैं.</p>
<p data-path-to-node="19,0,0"><strong>परिवहन: महाजाम और दुर्घटनाएं</strong></p>
<p data-path-to-node="21,0,0">ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, रेलवे सिग्नलिंग और बंदरगाहों के डिजिटल तंत्र पर हमला कर उड़ानों को गलत दिशा में भेजा जा सकता है. कई नेटवर्क में एक साथ सेंध लगाने से रेल और हवाई यातायात रुक जाएगा और रसद की आवाजाही ठप हो जाएगी.</p>
<p data-path-to-node="21,0,0"><strong>एआई को लेकर वैश्विक चिंताएं</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="24">नोबेल पुरस्कार विजेताओं और एआई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई का खतरा 'एक्सिस्टेंशियल थ्रेट' (अस्तित्व का खतरा) बन चुका है.&nbsp;एआई के सह-जनक और नोबेल पुरस्कार विजेता जैफ्री हिंटन के मुताबिक, "बुद्धिमत्ता का विस्फोट इंसानों को एआई के नियंत्रण में डाल सकता है. यह तकनीक कुछ ही महीनों या सालों में इंसानों से ज्यादा ताकतवर हो जाएगी."</p>
<p data-path-to-node="25,1,0">एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी चेतावनी देते हुए कहा,&nbsp;"एआई की क्षमताएं जिस तेजी से बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए मुझे डर है कि 6-12 महीनों में एआई पूरे इंटरनेट पर कब्जा कर सकता है."</p>
<p data-path-to-node="25,1,0"><strong>अंतर्राष्ट्रीय कानून और यूएन संधि की विफलता</strong></p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="28">संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौजूदा संधियां पार पारंपरिक हथियारों और परमाणु हथियारों को तो कवर करती हैं, लेकिन एआई-संचालित स्वायत्त हथियारों पर कोई प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय कानून लागू नहीं होता.</p>
<p data-path-to-node="29,0,0">यूक्रेन युद्ध में ड्रोन ने बिना किसी इंसानी इनपुट के लक्ष्य तय किया और हमला कर दिया. वर्तमान यूएन संधियां ऐसे 'किलर रोबोट्स' पर प्रतिबंध लगाने में असमर्थ साबित हो रही हैं.</p>
<p data-path-to-node="29,1,0">भारत सरकार ने एआई सुरक्षा और सेमीकंडक्टर/प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वैश्विक मानकों को अपनाने के लिए इण्डिया एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्थापना की है. विशेषज्ञ अंशुल गुप्ता का मानना है कि बिना सोचे-समझे किसी उपकरण में एआई लगाना बुनियादी ढांचे के लिए विनाशकारी हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;" data-path-to-node="32">एआई का विकास मानव सभ्यता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन बिना कड़े सुरक्षा मानकों, अंतर्राष्ट्रीय संधियों और मानव नियंत्रण के, यह बेकाबू एआई तकनीक खुद ही अपने जन्मदाता यानी इंसानों के विनाश का कारण बन सकती है.</p>
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Source Credit: abplive.com
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