Rajgarh, Madhya Pradesh
20 Oct 2026, 02:40 PM
Dussehra 2026: नीलकंठ के दर्शन, अखाड़ों के करतब से शुरु होता था दशहरा, नए जमाने में फीकी पड़ी पुरानी परंपराएं
News Patrika
@newspatrika
Dussehra 2026: दशहरे की सुबह नीलकंठ के दर्शन की आस, मंदिर में मत्था टेकने के बाद बड़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा और शाम होते ही रामलीला, झांकियों, चल समारोह व अखाड़ों के करतब देखने उमड़ती भीड़… दशहरा कभी सिर्फ रावण दहन का नाम नहीं था। यह आस्था, उल्लास, लोक संस्कृति और सामाजिक रिश्तों को एक साथ जीने का अवसर हुआ करता था। वक्त बदला तो उत्सव का रंग भी बदलने लगा। अब रावण दहन के आयोजन होते हैं, झांकियां भी निकलती हैं, लेकिन पुराने दशहरे की वे तमाम परंपराएं धीरे-धीरे यादों के पन्नों में सिमटती जा रही हैं। जिले के बुजुर्गों और वरिष्ठ साहित्यकारों की यादों में आज भी वह दशहरा जिंदा है, जिसमें हर रस्म का अपना महत्व और हर आयोजन के पीछे एक परंपरा हुआ करती थी।
Source Credit: patrika.com
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