26 Oct 2026, 06:53 PM
भारत पेट्रोलियम का बड़ा फैसला, रूस से कच्चे तेल की खरीदारी कम करेगी कंपनी
ABP News
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<p style="text-align: justify;">भारत कुछ समय पहले तक लगभग पूरी तरह से ही खाड़ी देशों पर कच्चे तेल के लिए निर्भर था. लेकिन फरवरी से शुरू हुए ईरान और यूएस के बीच के युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई. जिसके बाद भारत ने रशिया से कच्चे तेल की ज्यादा खेप मंगाना शुरू कर दिया. लेकिन अब लगता है कि भारत जल्दी ही रशिया से भी कच्चे तेल की निर्भरता खत्म करने जा रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;">BPCL का अनुमान है कि भारत में नवंबर के महीने में रशिया ने कम मात्रा में कच्चा तेल आयात होगा. इसका कारण है ज्यादा कॉस्टिंग! भारत पेट्रोलियम के कंपनी एग्जीक्यूटव ने हाल ही में इस बारे में बात की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>BPCL की तरफ से आया बयान</strong><br />दरअसल Reuters के मुताबिक सोमवार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के वित्त प्रमुख वेट्सा रामकृष्ण गुप्ता ने इस बारे में बात की है. उन्होंने कंपनी की तिमाही अर्निंग के बाद एनालिस्ट्स को बताया कि, नवंबर में रूस से आने वाले कच्चे तेल की मात्रा कम रहेगी, क्योंकि रूसी ग्रेड की तुलना में पश्चिमी एशियाई ग्रेड व्यावसायिक रूप से ज्यादा किफायती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों होगा कम आयात?</strong><br />गुप्ता ने बताया कि, इसकी सबसे बड़ी वजह माल ढुलाई की ज्यादा लागत है. दरअसल रूस से आना वाला कच्चा तेल कंपनियों को काफी महंगा पड़ रहा है, जिसके कारण BPCL ने भी नवंबर के लिए रूस से आने वाले माल की मात्रा में कमी के बारे में बात की है. जबकि जुलाई से सितंबर की तिमाही में, BPCL के कच्चे तेल की खरीद में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 37% थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पश्चिम एशिया से बढ़ी आपूर्ति</strong><br />तो वहीं BPCL ने ये भी बताया कि पहली तिमाही की तुलना में पश्चिम एशिया से आपूर्ति बढ़ गई है, और उसे अक्टूबर- नवंबर में इस क्षेत्र से और ज्यादा मात्रा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डाटा से पता चलता है कि सितंबर में भारत का पश्चिमी एशियाई कच्चे तेल का आयात बढ़कर युद्ध शुरू होने से पहले वाले के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चीन के साथ तगड़े कॉम्पिटीशन के बाद भी भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कटौती कर दी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/business/lentils-like-arhar-pigeon-pea-masoor-red-lentil-become-expensive-imports-of-foreign-67-3207031">अरहर, मसूर जैसी दाल होगी और महंगी? 67% बढ़ा विदेशी दालों का आयात</a></strong></p>
<p style="text-align: justify;">BPCL का अनुमान है कि भारत में नवंबर के महीने में रशिया ने कम मात्रा में कच्चा तेल आयात होगा. इसका कारण है ज्यादा कॉस्टिंग! भारत पेट्रोलियम के कंपनी एग्जीक्यूटव ने हाल ही में इस बारे में बात की है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>BPCL की तरफ से आया बयान</strong><br />दरअसल Reuters के मुताबिक सोमवार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के वित्त प्रमुख वेट्सा रामकृष्ण गुप्ता ने इस बारे में बात की है. उन्होंने कंपनी की तिमाही अर्निंग के बाद एनालिस्ट्स को बताया कि, नवंबर में रूस से आने वाले कच्चे तेल की मात्रा कम रहेगी, क्योंकि रूसी ग्रेड की तुलना में पश्चिमी एशियाई ग्रेड व्यावसायिक रूप से ज्यादा किफायती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्यों होगा कम आयात?</strong><br />गुप्ता ने बताया कि, इसकी सबसे बड़ी वजह माल ढुलाई की ज्यादा लागत है. दरअसल रूस से आना वाला कच्चा तेल कंपनियों को काफी महंगा पड़ रहा है, जिसके कारण BPCL ने भी नवंबर के लिए रूस से आने वाले माल की मात्रा में कमी के बारे में बात की है. जबकि जुलाई से सितंबर की तिमाही में, BPCL के कच्चे तेल की खरीद में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी करीब 37% थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पश्चिम एशिया से बढ़ी आपूर्ति</strong><br />तो वहीं BPCL ने ये भी बताया कि पहली तिमाही की तुलना में पश्चिम एशिया से आपूर्ति बढ़ गई है, और उसे अक्टूबर- नवंबर में इस क्षेत्र से और ज्यादा मात्रा मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डाटा से पता चलता है कि सितंबर में भारत का पश्चिमी एशियाई कच्चे तेल का आयात बढ़कर युद्ध शुरू होने से पहले वाले के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि चीन के साथ तगड़े कॉम्पिटीशन के बाद भी भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद में कटौती कर दी है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/business/lentils-like-arhar-pigeon-pea-masoor-red-lentil-become-expensive-imports-of-foreign-67-3207031">अरहर, मसूर जैसी दाल होगी और महंगी? 67% बढ़ा विदेशी दालों का आयात</a></strong></p>
Source Credit: abplive.com
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