03 Oct 2026, 03:22 PM
Captain Smit Machchhar: हमले के बीच पढ़ते रहे हनुमान चालीसा, संकट में हनुमान जी ही क्यों आते हैं याद?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;">कॉकपिट में हमला हो चुका था. भारतीय कैप्टन स्मित माछर घायल थे. विमान हवा में था और हर सेकंड कीमती था. लेकिन इस पूरी घटना के बीच एक चीज लगातार उनके साथ थी... हनुमान चालीसा.</p>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/topic/narendra-modi" data-type="interlinkingkeywords">नरेंद्र मोदी</a> से बातचीत में स्मित ने खुद बताया कि दर्द और मुश्किल वक्त में वे हनुमान चालीसा पढ़ते हैं. उस दिन भी पढ़ रहे थे. अब जरा इस बात को कैप्टन स्मित से आगे समझते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में किसी बच्चे को रात में डर लगे तो अक्सर कहा जाता है कि हनुमान जी का नाम लो. घर से लंबा सफर शुरू हो, कोई बड़ी परेशानी आ जाए या मन में अनजाना डर बैठ जाए, हनुमान चालीसा याद आने लगती है.</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/ggOU5jjwdJQ?si=VnPtoGkfAT89-WDR" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन कृष्ण, शिव और राम की पूजा भी घर-घर होती है. फिर डर और संकट के समय हनुमान जी से यह रिश्ता इतना गहरा कैसे बन गया?</p>
<h3 style="text-align: justify;">हनुमान चालीसा में बार-बार आता है डर, पीड़ा और संकट</h3>
<p style="text-align: justify;">इसका एक जवाब हनुमान चालीसा के भीतर ही छिपा है.</p>
<p style="text-align: justify;">भूत पिशाच निकट नहिं आवै. &nbsp;<br />महाबीर जब नाम सुनावै॥</p>
<p style="text-align: justify;">फिर आता है-</p>
<p style="text-align: justify;">नासै रोग हरै सब पीरा. &nbsp;<br />जपत निरंतर हनुमत बीरा॥</p>
<p style="text-align: justify;">और आगे तुलसीदास लिखते हैं-</p>
<p style="text-align: justify;">संकट तें हनुमान छुड़ावै. &nbsp;<br />मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥</p>
<p style="text-align: justify;">यानी हनुमान चालीसा में हनुमान जी की छवि केवल बलवान देवता की नहीं है. उनके साथ डर से रक्षा, पीड़ा और संकट से निकलने का भाव भी लगातार जुड़ा है. यही बात पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के मन में बैठती चली गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रामायण में भी हनुमान तब आए, जब रास्ता आसान नहीं था</h3>
<p style="text-align: justify;">सीता जी की खोज में रुकावट आ गई तो सामने समुद्र था. हनुमान जी उसे पार कर गए. लंका में वे अकेले थे. फिर भी सीता जी तक पहुंचे. लक्ष्मण जी के प्राणों पर संकट आया और समय बहुत कम था. संजीवनी लाने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी पर आई.</p>
<p style="text-align: justify;">इन प्रसंगों में एक बात समान है. हनुमान जी संकट देखकर रुकते नहीं हैं. वे तुरंत काम में लगते हैं. शायद यही वजह है कि घरों में उनकी कहानी केवल भगवान की कहानी बनकर नहीं रही. वह डर के समय हिम्मत रखने की सीख भी बन गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूरी चालीसा याद न हो, फिर भी बजरंगबली याद आ जाते हैं</h3>
<p style="text-align: justify;">यह हिस्सा और दिलचस्प है. कई लोगों को हनुमान चालीसा की सभी चौपाइयां याद नहीं होंगी. लेकिन अचानक डर लगने पर जय बजरंगबली या हनुमान जी रक्षा करना जैसे शब्द अपने आप निकल जाते हैं. क्यों?</p>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि हम संकट आने के बाद पहली बार यह रिश्ता नहीं बनाते. इसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी होती है. बचपन की कहानियों से. मंगलवार की पूजा से. घर में किसी बड़े को हनुमान चालीसा पढ़ते देखने से. डर लगने पर मां-दादी से सुनी बातों से. वही याद मुश्किल समय में फिर सामने आ सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">कैप्टन स्मित के मामले में भी इसका एक संकेत मिलता है. उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में परिवार में हनुमान चालीसा के पाठ की पुरानी परंपरा का जिक्र किया है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">तो क्या हनुमान चालीसा ने उन्हें बचाया?</h3>
<p style="text-align: justify;">बात को यहां साफ रखना जरूरी है. कैप्टन स्मित एक अनुभवी पायलट हैं. उस मुश्किल स्थिति में उनकी ट्रेनिंग, सूझबूझ और फैसले अहम थे.&nbsp; लेकिन स्मित के अपने शब्द बताते हैं कि उस बेहद मुश्किल वक्त में उनकी आस्था उनके साथ थी.</p>
<p style="text-align: justify;">और शायद इसी में उस सवाल का जवाब भी है कि संकट में हनुमान जी इतनी जल्दी क्यों याद आते हैं. क्योंकि पीढ़ियों से हनुमान जी की पहचान उस देवता की रही है, जो संकट देखकर पीछे नहीं हटते.</p>
<p style="text-align: justify;">कैप्टन स्मित के सामने भी संकट था. हनुमान चालीसा उनके मन में थी. लेकिन आखिर में उन्हें वही करना था, जो उस समय सबसे जरूरी था, डटे रहना.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">प्रधानमंत्री <a title="नरेंद्र मोदी" href="https://www.abplive.com/topic/narendra-modi" data-type="interlinkingkeywords">नरेंद्र मोदी</a> से बातचीत में स्मित ने खुद बताया कि दर्द और मुश्किल वक्त में वे हनुमान चालीसा पढ़ते हैं. उस दिन भी पढ़ रहे थे. अब जरा इस बात को कैप्टन स्मित से आगे समझते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">भारत में किसी बच्चे को रात में डर लगे तो अक्सर कहा जाता है कि हनुमान जी का नाम लो. घर से लंबा सफर शुरू हो, कोई बड़ी परेशानी आ जाए या मन में अनजाना डर बैठ जाए, हनुमान चालीसा याद आने लगती है.</p>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/ggOU5jjwdJQ?si=VnPtoGkfAT89-WDR" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन कृष्ण, शिव और राम की पूजा भी घर-घर होती है. फिर डर और संकट के समय हनुमान जी से यह रिश्ता इतना गहरा कैसे बन गया?</p>
<h3 style="text-align: justify;">हनुमान चालीसा में बार-बार आता है डर, पीड़ा और संकट</h3>
<p style="text-align: justify;">इसका एक जवाब हनुमान चालीसा के भीतर ही छिपा है.</p>
<p style="text-align: justify;">भूत पिशाच निकट नहिं आवै. &nbsp;<br />महाबीर जब नाम सुनावै॥</p>
<p style="text-align: justify;">फिर आता है-</p>
<p style="text-align: justify;">नासै रोग हरै सब पीरा. &nbsp;<br />जपत निरंतर हनुमत बीरा॥</p>
<p style="text-align: justify;">और आगे तुलसीदास लिखते हैं-</p>
<p style="text-align: justify;">संकट तें हनुमान छुड़ावै. &nbsp;<br />मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥</p>
<p style="text-align: justify;">यानी हनुमान चालीसा में हनुमान जी की छवि केवल बलवान देवता की नहीं है. उनके साथ डर से रक्षा, पीड़ा और संकट से निकलने का भाव भी लगातार जुड़ा है. यही बात पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के मन में बैठती चली गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रामायण में भी हनुमान तब आए, जब रास्ता आसान नहीं था</h3>
<p style="text-align: justify;">सीता जी की खोज में रुकावट आ गई तो सामने समुद्र था. हनुमान जी उसे पार कर गए. लंका में वे अकेले थे. फिर भी सीता जी तक पहुंचे. लक्ष्मण जी के प्राणों पर संकट आया और समय बहुत कम था. संजीवनी लाने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी पर आई.</p>
<p style="text-align: justify;">इन प्रसंगों में एक बात समान है. हनुमान जी संकट देखकर रुकते नहीं हैं. वे तुरंत काम में लगते हैं. शायद यही वजह है कि घरों में उनकी कहानी केवल भगवान की कहानी बनकर नहीं रही. वह डर के समय हिम्मत रखने की सीख भी बन गई.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूरी चालीसा याद न हो, फिर भी बजरंगबली याद आ जाते हैं</h3>
<p style="text-align: justify;">यह हिस्सा और दिलचस्प है. कई लोगों को हनुमान चालीसा की सभी चौपाइयां याद नहीं होंगी. लेकिन अचानक डर लगने पर जय बजरंगबली या हनुमान जी रक्षा करना जैसे शब्द अपने आप निकल जाते हैं. क्यों?</p>
<p style="text-align: justify;">क्योंकि हम संकट आने के बाद पहली बार यह रिश्ता नहीं बनाते. इसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी होती है. बचपन की कहानियों से. मंगलवार की पूजा से. घर में किसी बड़े को हनुमान चालीसा पढ़ते देखने से. डर लगने पर मां-दादी से सुनी बातों से. वही याद मुश्किल समय में फिर सामने आ सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">कैप्टन स्मित के मामले में भी इसका एक संकेत मिलता है. उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में परिवार में हनुमान चालीसा के पाठ की पुरानी परंपरा का जिक्र किया है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">तो क्या हनुमान चालीसा ने उन्हें बचाया?</h3>
<p style="text-align: justify;">बात को यहां साफ रखना जरूरी है. कैप्टन स्मित एक अनुभवी पायलट हैं. उस मुश्किल स्थिति में उनकी ट्रेनिंग, सूझबूझ और फैसले अहम थे.&nbsp; लेकिन स्मित के अपने शब्द बताते हैं कि उस बेहद मुश्किल वक्त में उनकी आस्था उनके साथ थी.</p>
<p style="text-align: justify;">और शायद इसी में उस सवाल का जवाब भी है कि संकट में हनुमान जी इतनी जल्दी क्यों याद आते हैं. क्योंकि पीढ़ियों से हनुमान जी की पहचान उस देवता की रही है, जो संकट देखकर पीछे नहीं हटते.</p>
<p style="text-align: justify;">कैप्टन स्मित के सामने भी संकट था. हनुमान चालीसा उनके मन में थी. लेकिन आखिर में उन्हें वही करना था, जो उस समय सबसे जरूरी था, डटे रहना.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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