17 Oct 2026, 06:22 PM
Ayushman Bharat: अब 'आयुष्मान' में ही होंगे हार्ट-लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट! यह सरकार कर रही तैयारी
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>MP Ayushman Bharat Organ Transplant Coverage:</strong> मध्य प्रदेश सरकार हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट को आयुष्मान भारत निरामयम योजना के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है. राज्य सरकार इन तीनों बड़े ऑर्गन ट्रांसप्लांट को पहली बार योजना में शामिल करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है. इसके साथ ही इन जटिल सर्जरी के लिए इलाज की सालाना सीमा को मौजूदा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने पर भी विचार किया जा रहा है. इस प्रस्ताव से महंगे ट्रांसप्लांट का इलाज कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिल सकती है, खासकर उन परिवारों को जो इलाज का भारी खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए बनेगी पैकेज व्यवस्था</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस प्रस्ताव की बारीकियों और पूरी व्यवस्था को तय करने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की एक विशेष समिति बनाई गई है. इसमें AIIMS और अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट डॉक्टर शामिल हैं. यह समिति हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में आने वाले कुल खर्च का आकलन कर रही है. इसमें सर्जरी के खर्च के साथ ऑपरेशन से पहले और बाद की जांच, ICU का खर्च, दवाइयां और ट्रांसप्लांट के बाद होने वाली नियमित देखभाल को भी शामिल किया जा रहा है. इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद पैकेज की दर और इलाज की कवरेज सीमा से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/ddbeb17129994dfccc194c8daf5be33017922240477151257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मध्य प्रदेश में ट्रांसप्लांट की संख्या कम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या कम होने के बीच सरकार की यह पहल सामने आई है. साल 2025 में देशभर में करीब 20 हजार ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए थे, लेकिन इनमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत रही. वहीं, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच राज्य में मृत व्यक्ति से अंगदान के सिर्फ 13 मामले दर्ज किए गए. ऐसे में सरकार ट्रांसप्लांट की सुविधा और अंगदान से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम कर रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इतना महंगा है ऑर्गन ट्रांसप्लांट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ऑर्गन ट्रांसप्लांट का खर्च काफी ज्यादा होता है. सरकारी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमानित लागत 3 से 5.5 लाख रुपये के बीच है, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च सरकारी अस्पतालों में करीब 8 से 12 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 30 से 35 लाख रुपये तक बताया गया है. इसी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट पर सरकारी अस्पताल में करीब 10 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत 40 से 50 लाख रुपये तक हो सकती है. फेफड़ों के ट्रांसप्लांट की अनुमानित लागत सरकारी अस्पतालों में 10 से 15 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 60 से 70 लाख रुपये तक है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/61ca5e28ebf75856243e5e28f5a7e63a17922240714021257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पूरे खर्च का आकलन कर रही एक्सपर्ट कमेटी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश के CEO अरविंद शाह के मुताबिक, एक्सपर्ट कमेटी हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में होने वाले पूरे खर्च का आकलन कर रही है. इसमें ऑपरेशन से लेकर मरीज की ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल तक के खर्च को देखा जा रहा है. कमेटी की जांच पूरी होने के बाद पैकेज की दरों और कवरेज की सीमा से जुड़ा औपचारिक प्रस्ताव तैयार करके आगे भेजा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक्सपर्ट बोले- कैंसर इलाज की कवरेज भी हो व्यापक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने कैंसर के इलाज की कवरेज को भी व्यापक बनाने की जरूरत बताई है. पूर्व NHM निदेशक डॉ. पंकज शुक्ला के मुताबिक, कैंसर का इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी या रेडिएशन तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें कई चरण शामिल होते हैं और इलाज कई महीनों तक चल सकता है. उनका कहना है कि आयुष्मान भारत में अलग-अलग इलाज या अस्पताल में भर्ती के लिए अलग-अलग कवरेज देने के बजाय पूरे इलाज को एक साथ कवर करने की व्यवस्था होनी चाहिए. इसमें शुरुआती जांच, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, पेलिएटिव केयर और लंबे समय तक होने वाले फॉलो-अप को शामिल किया जाना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अलग-अलग मंजूरी से बढ़ सकता है मरीजों का खर्च</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. पंकज शुक्ला ने कहा कि अलग-अलग चरणों के लिए अलग मंजूरी और पैकेज की सीमाओं के कारण मरीजों पर इलाज का अतिरिक्त खर्च आ सकता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY में 27 मेडिकल स्पेशलिटी के तहत 1,961 प्रक्रियाएं शामिल हैं. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के हेल्थ बेनिफिट Package 2.2 के तहत रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में 14 पैकेज और 46 प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें पहले से मंजूरी और चरणवार अप्रूवल की व्यवस्था है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/epilepsy-mental-health-workplace-relationships-seizure-anxiety-3201540">Epilepsy Symptoms: मिर्गी के साथ कैसे जिएं सामान्य जिंदगी? एक्सपर्ट से जानें सच</a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अंगदान बढ़ाने के लिए डॉक्टरों की होगी ट्रेनिंग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश में अंगदान की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेष ट्रेनिंग भी कराई जाएगी. AIIMS भोपाल राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षण देगा. इसमें ब्रेन डेथ की तय प्रक्रिया के अनुसार पहचान और प्रमाणन, संभावित ऑर्गन डोनर की जल्द पहचान, डोनर के परिवार को समझाने और सहमति लेने की प्रक्रिया, अंगों को सुरक्षित रखने की तकनीक और ट्रांसप्लांट सेंटर तक अंग पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर से जुड़ी व्यवस्था की ट्रेनिंग दी जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/maximum-decibel-human-ear-can-tolerate-sound-level-causes-death-hearing-capacity-3201894">कितनी आवाज सह सकते हैं हमारे कान, कितने डेसीबल पर हो सकती है मौत?</a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>हार्ट, लिवर और लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए बनेगी पैकेज व्यवस्था</strong></p>
<p style="text-align: justify;">इस प्रस्ताव की बारीकियों और पूरी व्यवस्था को तय करने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की एक विशेष समिति बनाई गई है. इसमें AIIMS और अन्य संस्थानों के एक्सपर्ट डॉक्टर शामिल हैं. यह समिति हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में आने वाले कुल खर्च का आकलन कर रही है. इसमें सर्जरी के खर्च के साथ ऑपरेशन से पहले और बाद की जांच, ICU का खर्च, दवाइयां और ट्रांसप्लांट के बाद होने वाली नियमित देखभाल को भी शामिल किया जा रहा है. इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद पैकेज की दर और इलाज की कवरेज सीमा से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/ddbeb17129994dfccc194c8daf5be33017922240477151257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मध्य प्रदेश में ट्रांसप्लांट की संख्या कम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या कम होने के बीच सरकार की यह पहल सामने आई है. साल 2025 में देशभर में करीब 20 हजार ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए गए थे, लेकिन इनमें मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी सिर्फ 2 प्रतिशत रही. वहीं, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच राज्य में मृत व्यक्ति से अंगदान के सिर्फ 13 मामले दर्ज किए गए. ऐसे में सरकार ट्रांसप्लांट की सुविधा और अंगदान से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम कर रही है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इतना महंगा है ऑर्गन ट्रांसप्लांट</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ऑर्गन ट्रांसप्लांट का खर्च काफी ज्यादा होता है. सरकारी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमानित लागत 3 से 5.5 लाख रुपये के बीच है, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. लिवर ट्रांसप्लांट का खर्च सरकारी अस्पतालों में करीब 8 से 12 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 30 से 35 लाख रुपये तक बताया गया है. इसी तरह हार्ट ट्रांसप्लांट पर सरकारी अस्पताल में करीब 10 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी लागत 40 से 50 लाख रुपये तक हो सकती है. फेफड़ों के ट्रांसप्लांट की अनुमानित लागत सरकारी अस्पतालों में 10 से 15 लाख रुपये और निजी अस्पतालों में 60 से 70 लाख रुपये तक है.</p>
<p style="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/10/17/61ca5e28ebf75856243e5e28f5a7e63a17922240714021257_original.jpg" /></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पूरे खर्च का आकलन कर रही एक्सपर्ट कमेटी</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आयुष्मान भारत योजना मध्य प्रदेश के CEO अरविंद शाह के मुताबिक, एक्सपर्ट कमेटी हार्ट, लिवर और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट में होने वाले पूरे खर्च का आकलन कर रही है. इसमें ऑपरेशन से लेकर मरीज की ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल तक के खर्च को देखा जा रहा है. कमेटी की जांच पूरी होने के बाद पैकेज की दरों और कवरेज की सीमा से जुड़ा औपचारिक प्रस्ताव तैयार करके आगे भेजा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>एक्सपर्ट बोले- कैंसर इलाज की कवरेज भी हो व्यापक</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स ने कैंसर के इलाज की कवरेज को भी व्यापक बनाने की जरूरत बताई है. पूर्व NHM निदेशक डॉ. पंकज शुक्ला के मुताबिक, कैंसर का इलाज सिर्फ कीमोथेरेपी या रेडिएशन तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें कई चरण शामिल होते हैं और इलाज कई महीनों तक चल सकता है. उनका कहना है कि आयुष्मान भारत में अलग-अलग इलाज या अस्पताल में भर्ती के लिए अलग-अलग कवरेज देने के बजाय पूरे इलाज को एक साथ कवर करने की व्यवस्था होनी चाहिए. इसमें शुरुआती जांच, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, पेलिएटिव केयर और लंबे समय तक होने वाले फॉलो-अप को शामिल किया जाना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अलग-अलग मंजूरी से बढ़ सकता है मरीजों का खर्च</strong></p>
<p style="text-align: justify;">डॉ. पंकज शुक्ला ने कहा कि अलग-अलग चरणों के लिए अलग मंजूरी और पैकेज की सीमाओं के कारण मरीजों पर इलाज का अतिरिक्त खर्च आ सकता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी PM-JAY में 27 मेडिकल स्पेशलिटी के तहत 1,961 प्रक्रियाएं शामिल हैं. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के हेल्थ बेनिफिट Package 2.2 के तहत रेडिएशन ऑन्कोलॉजी में 14 पैकेज और 46 प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें पहले से मंजूरी और चरणवार अप्रूवल की व्यवस्था है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/epilepsy-mental-health-workplace-relationships-seizure-anxiety-3201540">Epilepsy Symptoms: मिर्गी के साथ कैसे जिएं सामान्य जिंदगी? एक्सपर्ट से जानें सच</a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अंगदान बढ़ाने के लिए डॉक्टरों की होगी ट्रेनिंग</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मध्य प्रदेश में अंगदान की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की विशेष ट्रेनिंग भी कराई जाएगी. AIIMS भोपाल राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को इसके लिए प्रशिक्षण देगा. इसमें ब्रेन डेथ की तय प्रक्रिया के अनुसार पहचान और प्रमाणन, संभावित ऑर्गन डोनर की जल्द पहचान, डोनर के परिवार को समझाने और सहमति लेने की प्रक्रिया, अंगों को सुरक्षित रखने की तकनीक और ट्रांसप्लांट सेंटर तक अंग पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर से जुड़ी व्यवस्था की ट्रेनिंग दी जाएगी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसे भी पढ़ें : </strong><a href="https://www.abplive.com/lifestyle/health/maximum-decibel-human-ear-can-tolerate-sound-level-causes-death-hearing-capacity-3201894">कितनी आवाज सह सकते हैं हमारे कान, कितने डेसीबल पर हो सकती है मौत?</a></p>
Source Credit: abplive.com
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