आज अष्टमी शुरू होते ही भद्रा भी लगेगी, दोपहर में सर्वार्थ सिद्धि योग, क्या देवी की पूजा पर पड़ेगा असर?
18 Oct 2026, 11:48 PM

आज अष्टमी शुरू होते ही भद्रा भी लगेगी, दोपहर में सर्वार्थ सिद्धि योग, क्या देवी की पूजा पर पड़ेगा असर?

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Navratri 2026:</strong> शारदीय नवरात्रि में आज 18 अक्टूबर, रविवार को सप्तमी समाप्त होते ही अष्टमी तिथि शुरू हो रही है. खास बात यह है कि अष्टमी के साथ ही भद्रा भी लग जाएगी, जबकि दोपहर से सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा. ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि भद्रा के दौरान मां दुर्गा की पूजा करना शुभ रहेगा या नहीं?</p>
<p style="text-align: justify;">क्या सर्वार्थ सिद्धि योग में भद्रा का दोष समाप्त हो जाएगा? आइए पंचांग के आधार पर समझते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>आज कितने बजे से शुरू होगी अष्टमी और भद्रा?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">पंचांग के अनुसार, 18 अक्टूबर 2026 को सप्तमी तिथि सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी. इसके तुरंत बाद अष्टमी शुरू हो जाएगी. इसी समय विष्टि करण लगने से भद्रा भी आरंभ होगी, जो रात 9 बजकर 42 मिनट तक रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली के पंचांग के अनुसार आज के प्रमुख समय इस प्रकार हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पंचांग समय</strong><br />अष्टमी तिथि प्रारंभ सुबह 8:27 बजे<br />भद्रा प्रारंभ सुबह 8:27 बजे<br />भद्रा समाप्त रात 9:42 बजे<br />सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 12:49 बजे से<br />सर्वार्थ सिद्धि योग समाप्त 19 अक्टूबर, सुबह 6:24 बजे<br />अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 से दोपहर 12:29 बजे<br />राहुकाल शाम 4:23 से 5:49 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">ये समय नई दिल्ली के अनुसार हैं. दूसरे शहरों में मामूली अंतर संभव है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>भद्रा में मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं या नहीं?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को विष्टि करण कहा जाता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और नए मांगलिक कार्यों की शुरुआत से बचने की परंपरा है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि भद्रा लगते ही देवी की पूजा भी बंद कर देनी चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">भद्रा का निषेध मुख्य रूप से नए मांगलिक कार्यों के लिए माना जाता है, नियमित देवी आराधना के लिए नहीं. इसलिए श्रद्धालु आज मां दुर्गा की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र जाप, आरती और ध्यान कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि विशेष अनुष्ठान, हवन या संस्कार के लिए केवल भद्रा का समय देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए. ऐसे कार्यों में तिथि, नक्षत्र, करण और पूजा की परंपरा का भी विचार किया जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>सर्वार्थ सिद्धि योग में क्या भद्रा का दोष खत्म हो जाएगा?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">आज दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र समाप्त होकर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा. रविवार और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के संयोग से सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">ज्योतिषीय मान्यताओं में सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;">सर्वार्थ सिद्धि योग बनने से भद्रा अपने आप समाप्त नहीं होती. आज दोपहर 12:49 बजे से रात 9:42 बजे तक दोनों एक साथ रहेंगे. इसलिए इस अवधि को हर तरह के मांगलिक कार्य के लिए दोषमुक्त मानना सही नहीं होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि देवी की नियमित उपासना और मंत्र जाप के लिए श्रद्धालु इस योग का लाभ ले सकते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>अष्टमी आज शुरू होगी तो महागौरी की पूजा कब करें?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">यहां तिथि और व्रत के दिन का अंतर समझना जरूरी है. अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे शुरू होकर 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10:51 बजे तक रहेगी.</p>
<p style="text-align: justify;">उदया तिथि के आधार पर इस बार महाष्टमी का व्रत और मां महागौरी की विशेष पूजा 19 अक्टूबर, सोमवार को की जाएगी. ऐसे में आज अष्टमी शुरू होने पर देवी की आराधना करना और अगले दिन महाष्टमी का व्रत रखना, दोनों में कोई विरोध नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार समय निर्धारित करना चाहिए.</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>आज देवी भक्तों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">आज अष्टमी के साथ भद्रा और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है. ऐसे में देवी भक्तों को पूजा बंद करने या भद्रा के नाम पर अनावश्यक चिंता करने की जरूरत नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">घर में मां दुर्गा की नियमित पूजा, दीपक जलाना, पुष्प अर्पित करना और मंत्र जाप किया जा सकता है. वहीं किसी नए मांगलिक कार्य की शुरुआत के लिए अलग से मुहूर्त देखना उचित रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ध्यान रखें:</strong> भद्रा और सर्वार्थ सिद्धि योग का एक साथ होना पंचांग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे देवी पूजा के निष्फल होने का निष्कर्ष नहीं निकलता. धार्मिक मान्यताओं में नित्य पूजा और विशेष मांगलिक अनुष्ठान के नियम अलग-अलग माने जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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