26 Oct 2026, 11:52 AM
Aaj Ka Panchang 26 October 2026: वाल्मीकि जयंती आज, सुबह 9:41 बजे तक पूर्णिमा, जानें स्नान-दान और शुभ समय
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Aaj Ka Panchang:</strong> 26 अक्टूबर 2026 सोमवार को वाल्मीकि जयंती और आश्विन पूर्णिमा है. नई दिल्ली-NCR में पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे तक रहेगी, फिर कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शुरू होगी. पूर्णिमा तिथि में स्नान-दान और पूजा करने की तैयारी है तो सुबह का समय ध्यान में रखें. देर तक पूर्णिमा रहने की उम्मीद में कार्यक्रम न टालें.</p>
<p style="text-align: justify;">शरद पूर्णिमा की चंद्र पूजा कल रात हुई थी, जबकि आज सूर्योदय के समय पूर्णिमा मिल रही है. इसी कारण दोनों दिनों के धार्मिक कार्यक्रम अलग हैं. आज वाल्मीकि जयंती के साथ मीराबाई जयंती भी है. शाम को अश्विनी नक्षत्र समाप्त होने पर गंडमूल की अवधि भी पूरी होगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूर्णिमा स्नान-दान सुबह कितने बजे तक करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय सुबह 6:29 बजे होगा और पूर्णिमा सुबह 9:41 बजे तक रहेगी. पूर्णिमा तिथि रहते स्नान, दान और पूजा करनी है तो इन्हीं समयों के अनुसार तैयारी रखें. यह तिथि की उपलब्ध अवधि है, कोई अलग से घोषित विशेष मुहूर्त नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमा 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू हुई थी. कल रात चंद्र पूजा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के लिए पूर्णिमा मिली, जबकि आज सुबह स्नान-दान के लिए पूर्णिमा तिथि उपलब्ध है. इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर और उदयकालीन आश्विन पूर्णिमा 26 अक्टूबर को दी गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज शाम चंद्रोदय होने तक पूर्णिमा समाप्त हो चुकी होगी. इसलिए आज के चंद्रोदय को देखकर शरद पूर्णिमा की खीर रखने की रात तय न करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">वाल्मीकि जयंती पर पूजा और पाठ कैसे रखें?</h3>
<p style="text-align: justify;">महर्षि वाल्मीकि की जयंती आश्विन पूर्णिमा पर मनाई जाती है. संस्कृत साहित्य में उन्हें आदिकवि और रामायण के रचयिता के रूप में सम्मान दिया जाता है. आज उनकी स्मृति में पूजा, रामायण पाठ और उनके जीवन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमा तिथि में पूजा करना चाहते हैं तो सुबह 9:41 बजे से पहले का समय रखें. हालांकि, तिथि की समाप्ति को पूरे दिन होने वाले पाठ, स्मरण या जयंती कार्यक्रमों की अंतिम समय-सीमा न समझें. मंदिर और स्थानीय आयोजनों का कार्यक्रम अलग हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज मीराबाई जयंती भी है. कृष्ण भक्ति की परंपरा में मीरा के पदों और भजनों का विशेष स्थान है. पंचांग में उनकी जयंती भी आज दर्ज है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार- सोमवार<br />मास- सूर्योदय पर आश्विन<br />तिथि- पूर्णिमा सुबह 9:41 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा<br />नक्षत्र- अश्विनी शाम 5:41 तक, फिर भरणी<br />योग- वज्र दोपहर 2:17 तक, फिर सिद्धि<br />करण- बव सुबह 9:41 तक, फिर बालव<br />चंद्र राशि- मेष<br />सूर्य राशि- <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a><br />सूर्योदय- सुबह 6:29<br />सूर्यास्त- शाम 5:41<br />चंद्रोदय- शाम 5:39</p>
<p style="text-align: justify;">बालव करण रात 8:23 बजे तक रहेगा, इसके बाद कौलव करण शुरू होगा. चंद्रमा आज <a title="मेष" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/aries-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">मेष</a> राशि में ही रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पंचक समाप्त हो चुका है, गंडमूल कब हटेगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचक कल शाम 7:22 बजे समाप्त हो गया था. आज पंचक नहीं है, लेकिन अश्विनी नक्षत्र रहने तक गंडमूल रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">शाम 5:41 बजे अश्विनी से भरणी नक्षत्र में परिवर्तन होगा और गंडमूल समाप्त होगा. इसलिए पंचक समाप्त होने को गंडमूल की समाप्ति न मानें. जन्म नक्षत्र या संस्कार का समय देखने वाले परिवारों के लिए दोनों का अंतर समझना जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शुभ मुहूर्त और राहुकाल कब है?</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:46&ndash;5:38<br />अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:42&ndash;दोपहर 12:27<br />अमृत काल- सुबह 10:59&ndash;दोपहर 12:28<br />विजय मुहूर्त- दोपहर 1:57&ndash;2:42<br />गोधूलि- शाम 5:41&ndash;6:07<br />राहुकाल- सुबह 7:53&ndash;9:17<br />यमगण्ड- सुबह 10:41&ndash;दोपहर 12:05<br />गुलिक काल- दोपहर 1:29&ndash;2:53<br />दुष्टमुहूर्त- दोपहर 12:27&ndash;1:12 और 2:42&ndash;3:27</p>
<p style="text-align: justify;">आज अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल, दोनों का कुछ हिस्सा यमगण्ड से मिलता है. विजय मुहूर्त भी गुलिक काल के भीतर है. इसलिए किसी नए काम के लिए केवल एक शुभ समय देखकर निर्णय न लें. संबंधित काम का पूरा मुहूर्त देखना उपयोगी रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">- पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे तक है. स्नान-दान की तैयारी सुबह रखें.<br />- वाल्मीकि जयंती और मीराबाई जयंती आज हैं.<br />- पंचक समाप्त हो चुका है; गंडमूल शाम 5:41 बजे समाप्त होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">यह पंचांग नई दिल्ली-NCR के स्थानीय समय के अनुसार तैयार किया गया है. स्थान बदलने पर सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, चंद्रोदय और स्थानीय मुहूर्त में अंतर हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">शरद पूर्णिमा की चंद्र पूजा कल रात हुई थी, जबकि आज सूर्योदय के समय पूर्णिमा मिल रही है. इसी कारण दोनों दिनों के धार्मिक कार्यक्रम अलग हैं. आज वाल्मीकि जयंती के साथ मीराबाई जयंती भी है. शाम को अश्विनी नक्षत्र समाप्त होने पर गंडमूल की अवधि भी पूरी होगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूर्णिमा स्नान-दान सुबह कितने बजे तक करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय सुबह 6:29 बजे होगा और पूर्णिमा सुबह 9:41 बजे तक रहेगी. पूर्णिमा तिथि रहते स्नान, दान और पूजा करनी है तो इन्हीं समयों के अनुसार तैयारी रखें. यह तिथि की उपलब्ध अवधि है, कोई अलग से घोषित विशेष मुहूर्त नहीं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमा 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू हुई थी. कल रात चंद्र पूजा और कोजागरी लक्ष्मी पूजा के लिए पूर्णिमा मिली, जबकि आज सुबह स्नान-दान के लिए पूर्णिमा तिथि उपलब्ध है. इसीलिए शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर और उदयकालीन आश्विन पूर्णिमा 26 अक्टूबर को दी गई है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज शाम चंद्रोदय होने तक पूर्णिमा समाप्त हो चुकी होगी. इसलिए आज के चंद्रोदय को देखकर शरद पूर्णिमा की खीर रखने की रात तय न करें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">वाल्मीकि जयंती पर पूजा और पाठ कैसे रखें?</h3>
<p style="text-align: justify;">महर्षि वाल्मीकि की जयंती आश्विन पूर्णिमा पर मनाई जाती है. संस्कृत साहित्य में उन्हें आदिकवि और रामायण के रचयिता के रूप में सम्मान दिया जाता है. आज उनकी स्मृति में पूजा, रामायण पाठ और उनके जीवन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमा तिथि में पूजा करना चाहते हैं तो सुबह 9:41 बजे से पहले का समय रखें. हालांकि, तिथि की समाप्ति को पूरे दिन होने वाले पाठ, स्मरण या जयंती कार्यक्रमों की अंतिम समय-सीमा न समझें. मंदिर और स्थानीय आयोजनों का कार्यक्रम अलग हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज मीराबाई जयंती भी है. कृष्ण भक्ति की परंपरा में मीरा के पदों और भजनों का विशेष स्थान है. पंचांग में उनकी जयंती भी आज दर्ज है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार- सोमवार<br />मास- सूर्योदय पर आश्विन<br />तिथि- पूर्णिमा सुबह 9:41 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा<br />नक्षत्र- अश्विनी शाम 5:41 तक, फिर भरणी<br />योग- वज्र दोपहर 2:17 तक, फिर सिद्धि<br />करण- बव सुबह 9:41 तक, फिर बालव<br />चंद्र राशि- मेष<br />सूर्य राशि- <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a><br />सूर्योदय- सुबह 6:29<br />सूर्यास्त- शाम 5:41<br />चंद्रोदय- शाम 5:39</p>
<p style="text-align: justify;">बालव करण रात 8:23 बजे तक रहेगा, इसके बाद कौलव करण शुरू होगा. चंद्रमा आज <a title="मेष" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/aries-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">मेष</a> राशि में ही रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पंचक समाप्त हो चुका है, गंडमूल कब हटेगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचक कल शाम 7:22 बजे समाप्त हो गया था. आज पंचक नहीं है, लेकिन अश्विनी नक्षत्र रहने तक गंडमूल रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">शाम 5:41 बजे अश्विनी से भरणी नक्षत्र में परिवर्तन होगा और गंडमूल समाप्त होगा. इसलिए पंचक समाप्त होने को गंडमूल की समाप्ति न मानें. जन्म नक्षत्र या संस्कार का समय देखने वाले परिवारों के लिए दोनों का अंतर समझना जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज शुभ मुहूर्त और राहुकाल कब है?</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:46&ndash;5:38<br />अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:42&ndash;दोपहर 12:27<br />अमृत काल- सुबह 10:59&ndash;दोपहर 12:28<br />विजय मुहूर्त- दोपहर 1:57&ndash;2:42<br />गोधूलि- शाम 5:41&ndash;6:07<br />राहुकाल- सुबह 7:53&ndash;9:17<br />यमगण्ड- सुबह 10:41&ndash;दोपहर 12:05<br />गुलिक काल- दोपहर 1:29&ndash;2:53<br />दुष्टमुहूर्त- दोपहर 12:27&ndash;1:12 और 2:42&ndash;3:27</p>
<p style="text-align: justify;">आज अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल, दोनों का कुछ हिस्सा यमगण्ड से मिलता है. विजय मुहूर्त भी गुलिक काल के भीतर है. इसलिए किसी नए काम के लिए केवल एक शुभ समय देखकर निर्णय न लें. संबंधित काम का पूरा मुहूर्त देखना उपयोगी रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">- पूर्णिमा तिथि सुबह 9:41 बजे तक है. स्नान-दान की तैयारी सुबह रखें.<br />- वाल्मीकि जयंती और मीराबाई जयंती आज हैं.<br />- पंचक समाप्त हो चुका है; गंडमूल शाम 5:41 बजे समाप्त होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">यह पंचांग नई दिल्ली-NCR के स्थानीय समय के अनुसार तैयार किया गया है. स्थान बदलने पर सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, चंद्रोदय और स्थानीय मुहूर्त में अंतर हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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