Aaj Ka Panchang 22 October 2026: पापांकुशा एकादशी, भद्रा, राहुकाल और पारण का समय
22 Oct 2026, 04:12 PM

Aaj Ka Panchang 22 October 2026: पापांकुशा एकादशी, भद्रा, राहुकाल और पारण का समय

ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Aaj Ka Panchang: </strong>पापांकुशा एकादशी का व्रत आज 22 अक्टूबर 2026 को है. गुरुवार को एकादशी तिथि दोपहर 2:47 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन व्रत का पारण आज नहीं होगा. नई दिल्ली के अनुसार व्रत रखने वाले शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 8:42 बजे के बीच पारण करेंगे.</p>
<p style="text-align: justify;">आज के पंचांग में पूजा की तैयारी के साथ दोपहर का समय भी ध्यान देने वाला है. एकादशी समाप्त होने के साथ ही भद्रा भी खत्म होगी. हालांकि, इसके तुरंत बाद के समय को सभी शुभ कामों के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता. राहुकाल और दुर्मुहूर्त की अवधि भी देखनी होगी.</p>
<h3 style="text-align: justify;">एकादशी दोपहर में खत्म होगी तो पारण आज क्यों नहीं?</h3>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/xfl7nNSuc3A?si=UGlPRv9if627c5Rk" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">एकादशी तिथि और एकादशी व्रत की अवधि अलग हैं. तिथि समाप्त होने का अर्थ यह नहीं है कि उसी समय व्रत भी खोल दिया जाए. एकादशी का उपवास रखने के बाद अगले दिन सूर्योदय और द्वादशी के अनुसार पारण किया जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बार एकादशी 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे शुरू हुई थी. आज सूर्योदय पर एकादशी होने के कारण व्रत 22 अक्टूबर को रखा जाएगा. दोपहर बाद द्वादशी लगने पर भी व्रत जारी रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">पारण का समय 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक है. उस दिन द्वादशी दोपहर 2:35 बजे तक रहेगी. द्वादशी समाप्त होने का समय और पारण के लिए दिया गया सुबह का समय एक न समझें. पूजा तथा पारण की तैयारी सुबह की अवधि के अनुसार रखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार- गुरुवार <br />मास- आश्विन, पूर्णिमांत और अमांत दोनों <br />पक्ष- शुक्ल <br />तिथि- एकादशी दोपहर 2:47 तक, फिर द्वादशी <br />नक्षत्र- शतभिषा रात 8:49 तक, फिर पूर्वाभाद्रपद <br />योग- वृद्धि रात 11:40 तक, फिर ध्रुव <br />करण- विष्टि दोपहर 2:47 तक, फिर बव <br />चंद्र राशि- कुंभ <br />सूर्य राशि- <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a> <br />सूर्योदय- सुबह 6:26 <br />सूर्यास्त- शाम 5:45 <br />चंद्रोदय- दोपहर 3:25 <br />चंद्रास्त- 23 अक्टूबर की रात 3:17</p>
<p style="text-align: justify;">बव करण 23 अक्टूबर की रात 2:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद बालव करण शुरू होगा. चंद्रमा आज कुंभ राशि में ही रहेगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">भद्रा खत्म होते ही क्या शुभ काम कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज भद्रा दोपहर 2:47 बजे तक है. राहुकाल दोपहर 1:30 से 2:55 बजे तक रहेगा. यानी भद्रा समाप्त होने के बाद भी कुछ समय राहुकाल बना रहेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">इसके अलावा दोपहर का दुर्मुहूर्त 2:44 से 3:29 बजे तक है. इसलिए केवल भद्रा समाप्त होने का समय देखकर नया काम शुरू करने का निर्णय न लें. विवाह, गृहप्रवेश या किसी बड़े संस्कार के लिए संबंधित कार्य का पूरा मुहूर्त देखना जरूरी है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह अंतर आज खास तौर पर उपयोगी है. पंचांग में किसी एक बाधा का समाप्त होना अपने आप में नए शुभ मुहूर्त की शुरुआत नहीं होता.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पंचक आज भी रहेगा, कब समाप्त होगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">पंचक कल 21 अक्टूबर को सुबह 7 बजे शुरू हुआ था और आज पूरे दिन रहेगा. इसका समापन 25 अक्टूबर को शाम 7:22 बजे होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">आज रात शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र शुरू होने पर भी पंचक समाप्त नहीं होगा. पंचक चंद्रमा के कई नक्षत्रों में भ्रमण की अवधि से जुड़ा है. इसलिए नक्षत्र बदलने और पंचक समाप्त होने के समय अलग-अलग देखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज के शुभ मुहूर्त और राहुकाल</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4:45–5:35 <br />अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43–दोपहर 12:28 <br />विजय मुहूर्त- दोपहर 1:58–2:44 <br />अमृत काल- दोपहर 1:18–2:58 <br />गोधूलि मुहूर्त- शाम 5:45–6:10 <br />यमगण्ड- सुबह 6:26–7:51 <br />गुलिक काल- सुबह 9:16–10:41 <br />सुबह का दुष्टमुहूर्त- सुबह 10:12–10:57</p>
<p style="text-align: justify;">अमृत काल का बड़ा हिस्सा राहुकाल से मिलता है. विजय मुहूर्त भी राहुकाल के भीतर है. इसलिए इन समयों की सूची को हर नए काम की अनुमति न समझें. एकादशी व्रत के लिए सबसे जरूरी बात आज का संकल्प और कल का निर्धारित पारण है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">- पापांकुशा एकादशी का व्रत आज है. दोपहर में तिथि समाप्त होने पर व्रत न खोलें.<br />- पारण 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक करें.<br />- भद्रा समाप्त होने के बाद भी राहुकाल और दुर्मुहूर्त का ध्यान रखें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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