01 Nov 2026, 08:18 PM
Aaj Ka Panchang 1 November 2026: अहोई अष्टमी आज, तारे या चांद देखकर कब खोलें व्रत?
ABP News
@abpnews
<p style="text-align: justify;"><strong>Aaj Ka Panchang:</strong> अहोई अष्टमी का व्रत आज, रविवार 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा. नई दिल्ली में पूजा का मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक है. तारों के दर्शन के लिए पंचांग में शाम 6 बजे का समय दिया गया है, जबकि चंद्रोदय रात 11:40 बजे होगा. व्रत अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार खोलें.</p>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय के समय सप्तमी रहेगी और अष्टमी दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी. इसके बावजूद अहोई का व्रत आज ही है, क्योंकि शाम की पूजा के समय अष्टमी रहेगी. रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग भी आज सुबह से अगली भोर तक रहेंगे.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अहोई अष्टमी पर व्रत कब खोलें?</h3>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/HT0bHTAjhV8?si=XZaU7Gu_eWlDJjZy" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">अहोई पर तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा प्रचलित है. कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है. इसलिए सभी व्रतियों के लिए रात 11:40 बजे तक इंतजार करना जरूरी नहीं है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अहोई अष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त</h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>पूजा मुहूर्त :</strong> शाम 5:36-6:54 बजे<br /><strong>तारों के दर्शन का पंचांग समय :</strong> शाम 6 बजे<br /><strong>चंद्रोदय :</strong> रात 11:40 बजे<br /><strong>अष्टमी आरंभ :</strong> 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे<br /><strong>अष्टमी समाप्त :</strong> 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">शाम 6 बजे का समय तारों की वास्तविक दृश्यता की गारंटी नहीं है. बादल, धुंध और आसपास की रोशनी से दर्शन प्रभावित हो सकते हैं. वहीं, चंद्रमा देखकर व्रत खोलने वाले परिवारों में स्थानीय चंद्रोदय का समय देखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सुबह सप्तमी है, फिर अहोई का व्रत आज क्यों?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय पर सप्तमी है, लेकिन दोपहर बाद अष्टमी आ जाएगी. अहोई की संध्या पूजा और तारों के दर्शन के समय अष्टमी रहेगी. इसी आधार पर व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">इसका अर्थ यह नहीं है कि व्रत दोपहर 2:51 बजे से शुरू करना है. परंपरानुसार व्रत सुबह से रखा जाता है. अगले दिन दोपहर तक अष्टमी रहने के कारण व्रत को 2 नवंबर पर न ले जाएं. पूजा की तारीख तय करते समय संबंधित पूजा-काल भी देखा जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार : रविवार<br />मास : कार्तिक<br />पक्ष : कृष्ण पक्ष<br />तिथि : सप्तमी दोपहर 2:51 बजे तक, फिर अष्टमी<br />नक्षत्र : पुष्य 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक, फिर आश्लेषा<br />योग : साध्य दोपहर 2:39 बजे तक, फिर शुभ<br />सूर्य चंद्र राशि : <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a> / कर्क<br />सूर्योदय- सूर्यास्त : सुबह 6:33, शाम 5:36 बजे<br />चंद्रोदय- चंद्रास्त : रात 11:40, दोपहर 12:42 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">चंद्रमा आज कर्क राशि में ही रहेगा. चंद्रास्त का समय 1 नवंबर की दोपहर का है और चंद्रोदय उसी रात होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रवि पुष्य योग कब तक रहेगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:33 बजे से 2 नवंबर की सुबह 4:30 बजे तक रहेंगे. दोनों योग पूरे अगले दिन तक नहीं चलेंगे. सुबह 4:30 बजे पुष्य समाप्त होकर आश्लेषा शुरू होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रवि पुष्य को परंपरागत रूप से खरीदारी के लिए अनुकूल माना जाता है. हालांकि, शुभ योग होने से राहुकाल और दूसरे समयों की गणना समाप्त नहीं होती. किसी विशेष संस्कार का मुहूर्त भी अलग देखा जाता है.<br /><br />आज के शुभ मुहूर्त और राहुकाल</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:49-5:41 बजे<br />अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:42-दोपहर 12:27 बजे<br />विजय मुहूर्त : दोपहर 1:55-2:39 बजे<br />गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:36-6:02 बजे<br />अमृत काल : रात 10:25-11:56 बजे<br />निशिता मुहूर्त : 1 नवंबर रात 11:39 से 2 नवंबर रात 12:31 बजे तक</p>
<h3 style="text-align: justify;">अशुभ काल</h3>
<p style="text-align: justify;">राहुकाल : शाम 4:13-5:36 बजे<br />यमगण्ड : दोपहर 12:04-1:27 बजे<br />गुलिक काल : दोपहर 2:50-शाम 4:13 बजे<br />दुर्मुहूर्त : शाम 4:08-4:52 बजे<br />वर्ज्य : दोपहर 1:16-2:48 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">अहोई पूजा का निर्धारित मुहूर्त राहुकाल समाप्त होने पर शुरू होगा. अभिजीत का दोपहर 12:04 बजे के बाद का हिस्सा यमगण्ड में और पूरा विजय मुहूर्त वर्ज्य में पड़ेगा. सामान्य शुभ समय और पर्व के निर्धारित पूजा-समय को अलग समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">करण, भद्रा और आज के दूसरे व्रत</h3>
<p style="text-align: justify;">बव करण दोपहर 2:51 बजे तक रहेगा. इसके बाद बालव 2 नवंबर रात 1:57 बजे तक, फिर कौलव रहेगा.&nbsp;आश्लेषा शुरू होने पर 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे से गंडमूल लगेगा. अगले सूर्योदय, सुबह 6:34 बजे तक का हिस्सा आज के पंचांग में शामिल है. यह 1 नवंबर की शाम का समय नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज अहोई अष्टमी के साथ भानु सप्तमी, राधाकुंड स्नान, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी हैं. संतान की सुख-समृद्धि की कामना से अहोई माता की पूजा की जाती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">- अहोई पूजा शाम 5:36-6:54 बजे करें. तारों या चंद्रमा से व्रत खोलने में अपनी परंपरा देखें.<br />- अष्टमी दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी, लेकिन व्रत सुबह से रखा जाएगा.<br />- रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे समाप्त होंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय के समय सप्तमी रहेगी और अष्टमी दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी. इसके बावजूद अहोई का व्रत आज ही है, क्योंकि शाम की पूजा के समय अष्टमी रहेगी. रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग भी आज सुबह से अगली भोर तक रहेंगे.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अहोई अष्टमी पर व्रत कब खोलें?</h3>
<p><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/HT0bHTAjhV8?si=XZaU7Gu_eWlDJjZy" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p style="text-align: justify;">अहोई पर तारों को देखकर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा प्रचलित है. कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है. इसलिए सभी व्रतियों के लिए रात 11:40 बजे तक इंतजार करना जरूरी नहीं है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">अहोई अष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त</h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>पूजा मुहूर्त :</strong> शाम 5:36-6:54 बजे<br /><strong>तारों के दर्शन का पंचांग समय :</strong> शाम 6 बजे<br /><strong>चंद्रोदय :</strong> रात 11:40 बजे<br /><strong>अष्टमी आरंभ :</strong> 1 नवंबर, दोपहर 2:51 बजे<br /><strong>अष्टमी समाप्त :</strong> 2 नवंबर, दोपहर 1:10 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">शाम 6 बजे का समय तारों की वास्तविक दृश्यता की गारंटी नहीं है. बादल, धुंध और आसपास की रोशनी से दर्शन प्रभावित हो सकते हैं. वहीं, चंद्रमा देखकर व्रत खोलने वाले परिवारों में स्थानीय चंद्रोदय का समय देखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">सुबह सप्तमी है, फिर अहोई का व्रत आज क्यों?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज सूर्योदय पर सप्तमी है, लेकिन दोपहर बाद अष्टमी आ जाएगी. अहोई की संध्या पूजा और तारों के दर्शन के समय अष्टमी रहेगी. इसी आधार पर व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">इसका अर्थ यह नहीं है कि व्रत दोपहर 2:51 बजे से शुरू करना है. परंपरानुसार व्रत सुबह से रखा जाता है. अगले दिन दोपहर तक अष्टमी रहने के कारण व्रत को 2 नवंबर पर न ले जाएं. पूजा की तारीख तय करते समय संबंधित पूजा-काल भी देखा जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार : रविवार<br />मास : कार्तिक<br />पक्ष : कृष्ण पक्ष<br />तिथि : सप्तमी दोपहर 2:51 बजे तक, फिर अष्टमी<br />नक्षत्र : पुष्य 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे तक, फिर आश्लेषा<br />योग : साध्य दोपहर 2:39 बजे तक, फिर शुभ<br />सूर्य चंद्र राशि : <a title="तुला" href="https://www.abplive.com/astro/horoscope/libra-daily-rashifal" data-type="interlinkingkeywords">तुला</a> / कर्क<br />सूर्योदय- सूर्यास्त : सुबह 6:33, शाम 5:36 बजे<br />चंद्रोदय- चंद्रास्त : रात 11:40, दोपहर 12:42 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">चंद्रमा आज कर्क राशि में ही रहेगा. चंद्रास्त का समय 1 नवंबर की दोपहर का है और चंद्रोदय उसी रात होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रवि पुष्य योग कब तक रहेगा?</h3>
<p style="text-align: justify;">रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:33 बजे से 2 नवंबर की सुबह 4:30 बजे तक रहेंगे. दोनों योग पूरे अगले दिन तक नहीं चलेंगे. सुबह 4:30 बजे पुष्य समाप्त होकर आश्लेषा शुरू होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">रवि पुष्य को परंपरागत रूप से खरीदारी के लिए अनुकूल माना जाता है. हालांकि, शुभ योग होने से राहुकाल और दूसरे समयों की गणना समाप्त नहीं होती. किसी विशेष संस्कार का मुहूर्त भी अलग देखा जाता है.<br /><br />आज के शुभ मुहूर्त और राहुकाल</h3>
<p style="text-align: justify;">ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:49-5:41 बजे<br />अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:42-दोपहर 12:27 बजे<br />विजय मुहूर्त : दोपहर 1:55-2:39 बजे<br />गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:36-6:02 बजे<br />अमृत काल : रात 10:25-11:56 बजे<br />निशिता मुहूर्त : 1 नवंबर रात 11:39 से 2 नवंबर रात 12:31 बजे तक</p>
<h3 style="text-align: justify;">अशुभ काल</h3>
<p style="text-align: justify;">राहुकाल : शाम 4:13-5:36 बजे<br />यमगण्ड : दोपहर 12:04-1:27 बजे<br />गुलिक काल : दोपहर 2:50-शाम 4:13 बजे<br />दुर्मुहूर्त : शाम 4:08-4:52 बजे<br />वर्ज्य : दोपहर 1:16-2:48 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">अहोई पूजा का निर्धारित मुहूर्त राहुकाल समाप्त होने पर शुरू होगा. अभिजीत का दोपहर 12:04 बजे के बाद का हिस्सा यमगण्ड में और पूरा विजय मुहूर्त वर्ज्य में पड़ेगा. सामान्य शुभ समय और पर्व के निर्धारित पूजा-समय को अलग समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">करण, भद्रा और आज के दूसरे व्रत</h3>
<p style="text-align: justify;">बव करण दोपहर 2:51 बजे तक रहेगा. इसके बाद बालव 2 नवंबर रात 1:57 बजे तक, फिर कौलव रहेगा.&nbsp;आश्लेषा शुरू होने पर 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे से गंडमूल लगेगा. अगले सूर्योदय, सुबह 6:34 बजे तक का हिस्सा आज के पंचांग में शामिल है. यह 1 नवंबर की शाम का समय नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज अहोई अष्टमी के साथ भानु सप्तमी, राधाकुंड स्नान, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी हैं. संतान की सुख-समृद्धि की कामना से अहोई माता की पूजा की जाती है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज की 3 जरूरी बातें</h3>
<p style="text-align: justify;">- अहोई पूजा शाम 5:36-6:54 बजे करें. तारों या चंद्रमा से व्रत खोलने में अपनी परंपरा देखें.<br />- अष्टमी दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी, लेकिन व्रत सुबह से रखा जाएगा.<br />- रवि पुष्य और सर्वार्थ सिद्धि योग 2 नवंबर सुबह 4:30 बजे समाप्त होंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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