08 Oct 2026, 10:48 PM
Explained: 4F क्राइसिस क्या है और आपको डरने की जरूरत है या नहीं? एक्सपर्ट्स से जानें सच
ABP News
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<p style="text-align: justify;">विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान '4F क्राइसिस' की चेतावनी दी थी. 4F यानी फूड (भोजन), फ्यूल (ईंधन), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फाइनेंस (वित्त). यह कोई नई बीमारी नहीं, बल्कि ऐसी चेन है जिसमें एक चीज महंगी होती है तो दूसरी भी महंगी हो जाती है. आखिर में आम आदमी की जेब पर असर पड़ता है. इससे डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है. भारत पूरी तरह संकट में नहीं है, लेकिन हवा का रुख गंभीर है. <em><strong>तो 4F के बारे में जानते हैं और यह कैसे आपको कंगाल कर सकती है...</strong></em></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>4F की चेन कैसे काम करती है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कहीं भी युद्ध या तनाव होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है. तेल-गैस महंगी होती है. उर्वरक बनाने में गैस लगती है, इसलिए उर्वरक भी महंगा होता है. उर्वरक महंगा होने से खेती की लागत बढ़ती है. खेती महंगी होने से अनाज महंगा होता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित जगहों पर पैसा भेजते हैं. इससे विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है. यानी एक ही चिंगारी चार जगह आग लगा देती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत की हालत क्या है?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>खाना (Food):</strong> भारत में अगस्त 2026 तक खाद्य महंगाई 5.95% पर थी. प्याज अगस्त में 43% महंगा हो गया. टमाटर जुलाई में 31.92% तक उछला था. मानसून ने इस साल 10% कम बारिश दी है और अल नीनो की स्थिति बन रही है. सरकार ने 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373 मिलियन टन कर दिया है, जो पिछले साल से 2.63 मिलियन टन कम है. राहत की बात है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 28 मई 2026 तक 513 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 1 जुलाई के लिए जरूरी बफर स्टॉक सिर्फ 275.80 लाख मीट्रिक टन है. यानी भंडार जरूरत से लगभग दोगुना है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>ईंधन (Fuel):</strong> भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और 50% गैस आयात करता है. अप्रैल 2026 में ईंधन और बिजली की कीमतें सालाना आधार पर 24.71% बढ़ गई थीं. भारत का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व सिर्फ 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो लगभग 8 दिन की खपत के बराबर है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी 90 दिन का स्टॉक रखने की सलाह देती है. सरकार अब ओडिशा के चंडीखोल में 4 मिलियन टन और कर्नाटक के पडूर में 2.5 मिलियन टन का नया भंडार बना रही है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>उर्वरक (Fertilizer):</strong> भारत अपनी DAP जरूरत का 60% आयात करता है और पोटाश पूरी तरह आयात पर निर्भर है. मार्च 2026 में उर्वरक उत्पादन 24.6% गिर गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच उर्वरक की कीमतें 66% बढ़ीं. सरकार ने तैयारी भी कर ली है. खरीफ 2026 से पहले देश में 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक है, जो <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a>ी मांग का 51% से ज्यादा है, जबकि सामान्य बफर स्टॉक 33% का होता है. 2026-27 के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पैसा (Finance):</strong> यहां भारत सबसे मजबूत दिख रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त 2026 के अंत में 740.80 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. यह 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए काफी है. RBI की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय बैंकों की हालत मजबूत है, NPA कम है और तनाव परीक्षण में बैंक विपरीत हालात झेलने में सक्षम पाए गए. RBI गवर्नर ने खुद कहा है कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक बुनियाद कई दूसरे देशों से बेहतर है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो डरना चाहिए या नहीं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स का मानना है कि डरने की जरूरत नहीं, लेकिन लापरवाही की भी जरूरत नहीं है. जयशंकर की चेतावनी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए थी. भारत के पास अनाज का भंडार है, उर्वरक का स्टॉक है और विदेशी मुद्रा का पहाड़ है.</p>
<p style="text-align: justify;">दिक्कत यह है कि ये सारी चीजें बाहरी झटकों पर निर्भर हैं. अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, ब्लैक सी से अनाज की आवाजाही रुकी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें और उछलीं, तो भारत में मंहगाई बढ़ सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">असली चिंता की बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है और स्ट्रैटेजिक रिजर्व सिर्फ 8 दिन का है. अगर सप्लाई लाइन में कोई बड़ी रुकावट आई, तो देश के पास बहुत कम समय होगा. सरकार ने मई 2026 में नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील भी की थी. इसका मतलब है कि चिंता का स्तर हल्का से मध्यम है.</p>
<p style="text-align: justify;">इससे निपटने के लिए भारत को अपनी निर्भरता कम करनी होगी. ज्यादा घरेलू उत्पादन, ज्यादा भंडारण और दूसरे देशों के साथ मजबूत सप्लाई चेन बनानी होगी. जयशंकर ने भी यही कहा है कि 4F संकट को अपने आप हल होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, इसके लिए वैश्विक स्तर पर नियम और सुरक्षा कवच बनाने होंगे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>4F की चेन कैसे काम करती है?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">कहीं भी युद्ध या तनाव होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई बाधित होती है. तेल-गैस महंगी होती है. उर्वरक बनाने में गैस लगती है, इसलिए उर्वरक भी महंगा होता है. उर्वरक महंगा होने से खेती की लागत बढ़ती है. खेती महंगी होने से अनाज महंगा होता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित जगहों पर पैसा भेजते हैं. इससे विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है. यानी एक ही चिंगारी चार जगह आग लगा देती है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>भारत की हालत क्या है?</strong></p>
<ul>
<li style="text-align: justify;"><strong>खाना (Food):</strong> भारत में अगस्त 2026 तक खाद्य महंगाई 5.95% पर थी. प्याज अगस्त में 43% महंगा हो गया. टमाटर जुलाई में 31.92% तक उछला था. मानसून ने इस साल 10% कम बारिश दी है और अल नीनो की स्थिति बन रही है. सरकार ने 2026-27 के लिए अनाज उत्पादन का लक्ष्य घटाकर 373 मिलियन टन कर दिया है, जो पिछले साल से 2.63 मिलियन टन कम है. राहत की बात है कि सरकारी गोदामों में गेहूं का भंडार 28 मई 2026 तक 513 लाख मीट्रिक टन था, जबकि 1 जुलाई के लिए जरूरी बफर स्टॉक सिर्फ 275.80 लाख मीट्रिक टन है. यानी भंडार जरूरत से लगभग दोगुना है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>ईंधन (Fuel):</strong> भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल और 50% गैस आयात करता है. अप्रैल 2026 में ईंधन और बिजली की कीमतें सालाना आधार पर 24.71% बढ़ गई थीं. भारत का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व सिर्फ 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो लगभग 8 दिन की खपत के बराबर है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी 90 दिन का स्टॉक रखने की सलाह देती है. सरकार अब ओडिशा के चंडीखोल में 4 मिलियन टन और कर्नाटक के पडूर में 2.5 मिलियन टन का नया भंडार बना रही है.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>उर्वरक (Fertilizer):</strong> भारत अपनी DAP जरूरत का 60% आयात करता है और पोटाश पूरी तरह आयात पर निर्भर है. मार्च 2026 में उर्वरक उत्पादन 24.6% गिर गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच उर्वरक की कीमतें 66% बढ़ीं. सरकार ने तैयारी भी कर ली है. खरीफ 2026 से पहले देश में 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक है, जो <a title="मौसम" href="https://www.abplive.com/weather" data-type="interlinkingkeywords">मौसम</a>ी मांग का 51% से ज्यादा है, जबकि सामान्य बफर स्टॉक 33% का होता है. 2026-27 के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं.</li>
<li style="text-align: justify;"><strong>पैसा (Finance):</strong> यहां भारत सबसे मजबूत दिख रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त 2026 के अंत में 740.80 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. यह 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए काफी है. RBI की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय बैंकों की हालत मजबूत है, NPA कम है और तनाव परीक्षण में बैंक विपरीत हालात झेलने में सक्षम पाए गए. RBI गवर्नर ने खुद कहा है कि भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक बुनियाद कई दूसरे देशों से बेहतर है.</li>
</ul>
<p style="text-align: justify;"><strong>तो डरना चाहिए या नहीं?</strong></p>
<p style="text-align: justify;">एक्सपर्ट्स का मानना है कि डरने की जरूरत नहीं, लेकिन लापरवाही की भी जरूरत नहीं है. जयशंकर की चेतावनी सिर्फ भारत के लिए नहीं थी, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए थी. भारत के पास अनाज का भंडार है, उर्वरक का स्टॉक है और विदेशी मुद्रा का पहाड़ है.</p>
<p style="text-align: justify;">दिक्कत यह है कि ये सारी चीजें बाहरी झटकों पर निर्भर हैं. अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, ब्लैक सी से अनाज की आवाजाही रुकी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक की कीमतें और उछलीं, तो भारत में मंहगाई बढ़ सकती है.</p>
<p style="text-align: justify;">असली चिंता की बात यह है कि भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है और स्ट्रैटेजिक रिजर्व सिर्फ 8 दिन का है. अगर सप्लाई लाइन में कोई बड़ी रुकावट आई, तो देश के पास बहुत कम समय होगा. सरकार ने मई 2026 में नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील भी की थी. इसका मतलब है कि चिंता का स्तर हल्का से मध्यम है.</p>
<p style="text-align: justify;">इससे निपटने के लिए भारत को अपनी निर्भरता कम करनी होगी. ज्यादा घरेलू उत्पादन, ज्यादा भंडारण और दूसरे देशों के साथ मजबूत सप्लाई चेन बनानी होगी. जयशंकर ने भी यही कहा है कि 4F संकट को अपने आप हल होने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, इसके लिए वैश्विक स्तर पर नियम और सुरक्षा कवच बनाने होंगे.</p>
Source Credit: abplive.com
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