14 Oct 2026, 07:47 PM
चुनाव आयोग की बात मानने से सरकार ने किया था इंकार तो टीएन शेषन ने इस्तेमाल किया था अपना अधिकार
News Patrika
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1991 के लोक सभा चुनाव के दौरान टीएन शेषन ने एक बड़ा फैसला लिया था। मार्च 1991 में चुनाव की अधिसूचना जारी हुई। शेषन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह जम्मू कश्मीर सहित पूरे देश में चुनाव कराने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उन्हें इस बात का भरोसा हो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कराने लायक स्थिति है। उस समय पंजाब, जम्मू कश्मीर और असम में बहुत हिंसा हो रही थी। पंजाब के बारे में 25 मार्च को गृह मंत्रालय ने खुफिया रिपोर्ट्स के आधार पर राय दी थी कि वहां चुनाव कराने लायक माहौल नहीं है। लेकिन, प्रधानमंत्री वहां चुनाव करवाना चाहते थे। 1 अप्रैल को अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कहा कि पंजाब और असम में चुनाव कराना ठीक नहीं होगा। सीपीएम-सीपीआई की भी यही राय थी। स्थिति यह थी कि पंजाब के राज्यपाल ने केंद्र से अर्धसैनिक बलों की 400 अतिरिक्त कंपनियां मांगी। 300 कंपनियां वहां पहले से मौजूद थीं। इस तरह करीब 35 प्रतिशत अर्धसैनिक बल अकेले पंजाब में तैनात हो जाते।
Source Credit: patrika.com
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