14 Oct 2026, 07:08 PM
Aaj Ka Panchang 14 October 2026: मां कूष्मांडा की पूजा आज, शुभ योग के बीच भद्रा भी, जानें पूजा और राहुकाल का समय
ABP News
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<p style="text-align: justify;"><strong>Aaj Ka Panchang:</strong> 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को नवरात्रि का चौथा दिन है. आज मां कूष्मांडा की पूजा होगी. कपर्दिश चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना भी की जाएगी. सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग सुबह से रहेंगे, लेकिन दोपहर में भद्रा शुरू होगी. दिल्ली-NCR में राहुकाल दोपहर 12:07 से 1:34 बजे तक है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज शुभ समय चुनते हुए सिर्फ योग का नाम देखना पर्याप्त नहीं होगा. अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है. वहीं, शुभ योग की अवधि में राहुकाल और भद्रा भी पड़ रहे हैं. रोज की पूजा, चतुर्थी व्रत और नए काम की शुरुआत के समय का फर्क समझ लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार- बुधवार <br />मास और पक्ष- आश्विन, शुक्ल पक्ष <br />तिथि- चतुर्थी, 15 अक्टूबर की रात 1:13 बजे तक <br />नक्षत्र- अनुराधा, 15 अक्टूबर की सुबह 4:03 बजे तक <br />योग- आयुष्मान, रात 8:39 बजे तक; फिर सौभाग्य <br />चंद्र राशि- वृश्चिक <br />सूर्योदय- सुबह 6:21 बजे <br />सूर्यास्त- शाम 5:53 बजे <br />राहुकाल- दोपहर 12:07-1:34 बजे <br />अभिजीत मुहूर्त- आज उपलब्ध नहीं</p>
<p style="text-align: justify;">चतुर्थी की समाप्ति Hindu Panchang में रात 1:13 बजे है. की गणना में यह समय 1:14:30 बजे दिया गया है. यहां तिथि के लिए Panchang का समय रखा गया है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">शुभ योग हैं, तो क्या पूरे दिन शुभ काम कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग सुबह 6:21 बजे से 15 अक्टूबर की सुबह 4:03 बजे तक रहेंगे. मुहूर्त परंपरा में दोनों शुभ माने जाते हैं. लेकिन इनकी लंबी अवधि का मतलब यह नहीं कि दिन का हर समय सभी कामों के लिए उपयुक्त है.</p>
<p style="text-align: justify;">दोपहर 12:07 बजे राहुकाल शुरू होगा. इसके कुछ देर बाद, 12:16 बजे विष्टि करण यानी भद्रा शुरू हो जाएगी. भद्रा 15 अक्टूबर की रात 1:13 बजे तक रहेगी. इसलिए नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बाकी पंचांग भी देखना होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">दिए गए समयों में यमगण्ड और गुलिक से बाहर, भद्रा शुरू होने से पहले का अंतराल सुबह 9:15 से 10:39 बजे है. इसे पूरा संस्कार-मुहूर्त न मानें. विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे कामों के लिए उस कार्य का अलग मुहूर्त जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता में उनका स्वरूप सृष्टि की रचना और सूर्य के तेज से जुड़ा है. उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्नान के बाद पूजा स्थान साफ करें. मां को फूल अर्पित करें, दीप जलाएं और &ldquo;ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः&rdquo; मंत्र का जप करें. अपने घर की परंपरा के अनुसार भोग लगाकर आरती करें.</p>
<p style="text-align: justify;">सुबह पूजा का समय न मिले तो शाम को भी मां का ध्यान और आरती कर सकते हैं. आज शाम तक चतुर्थी बनी रहेगी. रोज चल रहे नवरात्रि पाठ और आरती को नए व्यवसाय या संस्कार की शुरुआत वाले मुहूर्त से अलग समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कपर्दिश चतुर्थी पर क्या करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज आश्विन शुक्ल चतुर्थी है. इस दिन भगवान गणेश के कपर्दिश विनायक स्वरूप की पूजा की जाती है. व्रत की परंपरा में मध्याह्न गणेश पूजन का महत्व है. नवरात्रि की आराधना के साथ गणेशजी को भी प्रणाम करें और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें.</p>
<p style="text-align: justify;">यह कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी नहीं है. इसलिए संकष्टी का चंद्रोदय देखकर व्रत खोलने वाला नियम अपने-आप इस व्रत पर लागू न करें. कपर्दिश चतुर्थी की बताई गई विधि में अगले दिन पंचमी पर पारण किया जाता है. सिर्फ नवरात्रि व्रत रखने वाले अपनी पहले से तय व्रत-परंपरा जारी रखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज कब-कब बदलेगा पंचांग?</h3>
<p style="text-align: justify;">- दोपहर 12:16 बजे: वणिज करण समाप्त होगा और विष्टि करण शुरू होगा.<br />- रात 8:39 बजे: आयुष्मान के बाद सौभाग्य योग आएगा.<br />- 15 अक्टूबर, रात 1:13 बजे: चतुर्थी और भद्रा समाप्त होंगी. पंचमी तथा बव करण शुरू होंगे.<br />- 15 अक्टूबर, सुबह 4:03 बजे: अनुराधा के बाद ज्येष्ठा नक्षत्र आएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">चंद्रमा आज पूरे दिन वृश्चिक राशि में रहेंगे. नक्षत्र बदलने पर भी उसी समय राशि परिवर्तन नहीं होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का राहुकाल</h3>
<p style="text-align: justify;">राहुकाल दोपहर 12:07-1:34 बजे <br />यमगण्ड सुबह 7:47-9:14 बजे <br />गुलिक काल सुबह 10:41-दोपहर 12:07 बजे <br />दुर्मुहूर्त सुबह 11:44-दोपहर 12:30 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पद्धतियों में आश्विन मास है. विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 चल रहा है. सूर्य कन्या राशि में हैं. दिल्ली-NCR की गणना के अनुसार चंद्रोदय सुबह 9:44 बजे और चंद्रास्त रात 8:01 बजे है.<br />आज की 3 जरूरी बातें</p>
<p style="text-align: justify;">1. मां कूष्मांडा की पूजा के साथ आज कपर्दिश चतुर्थी भी है.<br />2. सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग रहेंगे, लेकिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है.<br />3. नए काम का समय चुनते हुए दोपहर के राहुकाल और भद्रा को भी देखें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आज शुभ समय चुनते हुए सिर्फ योग का नाम देखना पर्याप्त नहीं होगा. अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है. वहीं, शुभ योग की अवधि में राहुकाल और भद्रा भी पड़ रहे हैं. रोज की पूजा, चतुर्थी व्रत और नए काम की शुरुआत के समय का फर्क समझ लें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का पंचांग एक नजर में</h3>
<p style="text-align: justify;">वार- बुधवार <br />मास और पक्ष- आश्विन, शुक्ल पक्ष <br />तिथि- चतुर्थी, 15 अक्टूबर की रात 1:13 बजे तक <br />नक्षत्र- अनुराधा, 15 अक्टूबर की सुबह 4:03 बजे तक <br />योग- आयुष्मान, रात 8:39 बजे तक; फिर सौभाग्य <br />चंद्र राशि- वृश्चिक <br />सूर्योदय- सुबह 6:21 बजे <br />सूर्यास्त- शाम 5:53 बजे <br />राहुकाल- दोपहर 12:07-1:34 बजे <br />अभिजीत मुहूर्त- आज उपलब्ध नहीं</p>
<p style="text-align: justify;">चतुर्थी की समाप्ति Hindu Panchang में रात 1:13 बजे है. की गणना में यह समय 1:14:30 बजे दिया गया है. यहां तिथि के लिए Panchang का समय रखा गया है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">शुभ योग हैं, तो क्या पूरे दिन शुभ काम कर सकते हैं?</h3>
<p style="text-align: justify;">सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग सुबह 6:21 बजे से 15 अक्टूबर की सुबह 4:03 बजे तक रहेंगे. मुहूर्त परंपरा में दोनों शुभ माने जाते हैं. लेकिन इनकी लंबी अवधि का मतलब यह नहीं कि दिन का हर समय सभी कामों के लिए उपयुक्त है.</p>
<p style="text-align: justify;">दोपहर 12:07 बजे राहुकाल शुरू होगा. इसके कुछ देर बाद, 12:16 बजे विष्टि करण यानी भद्रा शुरू हो जाएगी. भद्रा 15 अक्टूबर की रात 1:13 बजे तक रहेगी. इसलिए नए शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बाकी पंचांग भी देखना होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">दिए गए समयों में यमगण्ड और गुलिक से बाहर, भद्रा शुरू होने से पहले का अंतराल सुबह 9:15 से 10:39 बजे है. इसे पूरा संस्कार-मुहूर्त न मानें. विवाह, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे कामों के लिए उस कार्य का अलग मुहूर्त जरूरी है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यता में उनका स्वरूप सृष्टि की रचना और सूर्य के तेज से जुड़ा है. उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्नान के बाद पूजा स्थान साफ करें. मां को फूल अर्पित करें, दीप जलाएं और &ldquo;ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः&rdquo; मंत्र का जप करें. अपने घर की परंपरा के अनुसार भोग लगाकर आरती करें.</p>
<p style="text-align: justify;">सुबह पूजा का समय न मिले तो शाम को भी मां का ध्यान और आरती कर सकते हैं. आज शाम तक चतुर्थी बनी रहेगी. रोज चल रहे नवरात्रि पाठ और आरती को नए व्यवसाय या संस्कार की शुरुआत वाले मुहूर्त से अलग समझें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">कपर्दिश चतुर्थी पर क्या करें?</h3>
<p style="text-align: justify;">आज आश्विन शुक्ल चतुर्थी है. इस दिन भगवान गणेश के कपर्दिश विनायक स्वरूप की पूजा की जाती है. व्रत की परंपरा में मध्याह्न गणेश पूजन का महत्व है. नवरात्रि की आराधना के साथ गणेशजी को भी प्रणाम करें और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करें.</p>
<p style="text-align: justify;">यह कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी नहीं है. इसलिए संकष्टी का चंद्रोदय देखकर व्रत खोलने वाला नियम अपने-आप इस व्रत पर लागू न करें. कपर्दिश चतुर्थी की बताई गई विधि में अगले दिन पंचमी पर पारण किया जाता है. सिर्फ नवरात्रि व्रत रखने वाले अपनी पहले से तय व्रत-परंपरा जारी रखें.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज कब-कब बदलेगा पंचांग?</h3>
<p style="text-align: justify;">- दोपहर 12:16 बजे: वणिज करण समाप्त होगा और विष्टि करण शुरू होगा.<br />- रात 8:39 बजे: आयुष्मान के बाद सौभाग्य योग आएगा.<br />- 15 अक्टूबर, रात 1:13 बजे: चतुर्थी और भद्रा समाप्त होंगी. पंचमी तथा बव करण शुरू होंगे.<br />- 15 अक्टूबर, सुबह 4:03 बजे: अनुराधा के बाद ज्येष्ठा नक्षत्र आएगा.</p>
<p style="text-align: justify;">चंद्रमा आज पूरे दिन वृश्चिक राशि में रहेंगे. नक्षत्र बदलने पर भी उसी समय राशि परिवर्तन नहीं होगा.</p>
<h3 style="text-align: justify;">आज का राहुकाल</h3>
<p style="text-align: justify;">राहुकाल दोपहर 12:07-1:34 बजे <br />यमगण्ड सुबह 7:47-9:14 बजे <br />गुलिक काल सुबह 10:41-दोपहर 12:07 बजे <br />दुर्मुहूर्त सुबह 11:44-दोपहर 12:30 बजे</p>
<p style="text-align: justify;">पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पद्धतियों में आश्विन मास है. विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 चल रहा है. सूर्य कन्या राशि में हैं. दिल्ली-NCR की गणना के अनुसार चंद्रोदय सुबह 9:44 बजे और चंद्रास्त रात 8:01 बजे है.<br />आज की 3 जरूरी बातें</p>
<p style="text-align: justify;">1. मां कूष्मांडा की पूजा के साथ आज कपर्दिश चतुर्थी भी है.<br />2. सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग रहेंगे, लेकिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है.<br />3. नए काम का समय चुनते हुए दोपहर के राहुकाल और भद्रा को भी देखें.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.</strong></p>
Source Credit: abplive.com
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